उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर यूपीपीसीएल के दावों पर उपभोक्ता परिषद का पलटवार

Smart Meter: पावर कॉर्पोरेशन ने बयान जारी कर 6.22 लाख पुराने मीटरों के जमा न होने पर सफाई पेश की है।

Prashant Vinay Dixit
Published on: 3 Sept 2025 8:22 PM IST
Smart Meter in UP
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Smart Meter in UP (Photo: Social Media)

Smart Meter in UP: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉर्पोरेशन के उस बयान को खारिज कर दिया है, उसमें पुराने मीटरों की रीडिंग गायब होने की बात को एक भ्रम बताया गया था। उपभोक्ता परिषद ने यूपीपीसीएल द्वारा खुद तैयार किए गए दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया है, जिससे पावर कॉर्पोरेशन की पोल खुल गई है।

पुराने मीटर जमा न होने पर सफाई

पावर कॉर्पोरेशन ने बयान जारी कर 6.22 लाख पुराने मीटरों के जमा न होने पर सफाई पेश की थी। कॉर्पोरेशन ने दावा किया था कि पुराने मीटरों से रीडिंग गायब होने की बात सिर्फ अफवाह है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने दावे को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन खुद भ्रम फैला रहा है, जबकि उनके अपने दस्तावेज सच्चाई को उजागर करते हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने खुद अध्यक्ष की समीक्षा बैठक के लिए बुकलेट जारी की है।

मीटर कंपनी के साथ हुई बैठक

उसमें साफ लिखा है कि 29 अगस्त 2025 तक 6.22 लाख पुराने मीटर जमा नहीं हुए हैं। गोंडा में मुख्य अभियंता और मीटर कंपनी के बीच साझा बैठक के स्पष्ट रूप से दर्ज हुआ कि मीटर रीडिंग शून्य भरी जा रही है। यह भी लिखा कि दस्तावेज़ में 80 प्रतिशत मीटरों की कवर सीलिंग टूटी हुई है। जबकि कई मीटरों को लेजर या अन्य माध्यमों से क्षतिग्रस्त किया गया है, जिससे विभाग को भारी राजस्व हानि की आशंका है। उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉर्पोरेशन द्वारा लगाए गए 2 लाख चेक मीटरों पर सवाल उठाए हैं।

मिलान की रिपोर्ट सार्वजनिक

उन्होंने कहा कि अगर कॉर्पोरेशन ने चेक मीटर लगाए हैं, तो उन्हें सभी मीटरों के मिलान की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। भारत सरकार ने प्रत्येक माह चेक मीटरों की मिलान रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिए थे, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन केवल एक या दो मीटरों का मिलान दिखा कर बात सही साबित करने की कोशिश कर रहा है। यह भी सवाल उठाया कि पावर कॉर्पोरेशन ने लंबी-चौड़ी सफाई पेश की है, उसमें यह नहीं बताया गया कि बयान किसके तरफ से दिया गया है, जो अपने में संदेह पैदा करता है।

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