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बिजली निजीकरण विरोधी आंदोलन में शामिल तीसरे नेता पर कार्रवाई, दो अभियंताओं पर पहले ही दर्ज हो चुका है केस
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ उठी आवाजों को लेकर कार्रवाई का दौर तेज हो गया है।
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Lucknow News: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ उठी आवाजों को लेकर कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। राजधानी लखनऊ में बिजली विभाग के वरिष्ठ तकनीशियन चंद्र भूषण उपाध्याय के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया है। आंदोलन से जुड़े तीसरे बड़े नेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इससे पहले दो अभियंताओं के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
आंदोलन से जुड़े कर्मचारी पर मुकदमा
इस लिस्ट में और नाम जुड़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, चार अन्य बिजली कर्मचारियों या नेताओं के खिलाफ भी जल्द मामला दर्ज किए जा सकते हैं। इस कार्रवाई ने ऊर्जा विभाग से जुड़े कर्मचारियों और आंदोलनों से जुड़े संगठनों में हड़कंप मचा दिया है। यह पूरा मामला वर्ष 2023 में निजीकरण विरोधी आंदोलन से जुड़ा है। उस समय बिजली कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने निजीकरण के खिलाफ प्रदेशभर में जोरदार आंदोलन किया था। इससे राज्य में विद्युत आपूर्ति और प्रशासन पर बड़ा असर पड़ा था।
दो कर्मचारियों पर पहले की मुकदमा
उस दौरान कई संगठनों के पदाधिकारी सरकार के निशाने पर आए थे। यह मामला कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में चला गया था, लेकिन दोबारा निजीकरण प्रक्रिया फिर से शरू हुई है, तो विजिलेंस विभाग ने उस समय से जुड़ी फाइलों को खोलना शुरू कर दिया है। विजिलेंस विभाग ने दो दिन पहले ही अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर और जूनियर इंजीनियर संघ के पूर्व अध्यक्ष जय प्रकाश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामलों में रिपोर्ट दर्ज की थी। इन दोनों नेताओं की संपत्तियों की जांच हो रही है।
दस्तावेजों-ट्रांजैक्शनों की छानबीन
विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक कई अहम दस्तावेजों और बैंक ट्रांजैक्शनों की छानबीन की जा रही है। इस ताजा कार्रवाई से बिजली विभाग में काम कर रहे कई कर्मचारी संगठनों में आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर निजीकरण का विरोध करने वाले नेताओं और कर्मचारियों को निशाना बना रही है। कुछ संगठनों ने 'प्रतिशोध की राजनीति' करार दिया है। उन्होंने चेतावनी देकर कहा कि यदि कार्रवाई नहीं रुकी तो वह आंदोलन की राह पर वापस लौटने को मजबूर हो जाएंगे।
बिजली विभाग व कर्मचारियों में टकराव
विजिलेंस विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई संपत्ति की जांच के आधार पर की जा रही है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनके पास आय से अधिक संपत्ति पाए जाने के प्रथम दृष्टया प्रमाण हैं। बिजली विभाग में निजीकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जहां एक ओर सरकार विजिलेंस जांच के जरिए भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की बात कह रही है, वहीं कर्मचारी संगठन निजीकरण आंदोलन को दबाने की साजिश मान रहे हैं।


