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Child Health: नवजात शिशुओं में मृत्युदर में कमी लाना हमारा लक्ष्य- ब्रजेश पाठक
Lucknow News: प्रदेश सरकार लगतार नवजात शिशुओं की मृत्युदर में कमी लाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए सरकार की नई योजनाएं ला रही है। डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की मेहनत खूब रंग ला रही है।
Child Health Care ( File Photo)
Lucknow News: प्रदेश सरकार लगतार नवजात शिशुओं की मृत्युदर में कमी लाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए सरकार की नई योजनाएं ला रही है। वहीं, सरकार की इस मुहीम में डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की मेहनत खूब रंग ला रही है। पहले की अपेक्षा अब शिशुओं के मृत्युदर में काफी कमी भी है। लेकिन, हमें इसे और कम करने की जरूरत है। यह बातें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कही।
भारतीय बाल अकादमी में किया सम्बोधित
वह शनिवार को भारतीय बाल अकादमी (आईएपी) के नियोनेटोलॉजी स्पेशिलिटी ( नियोकॉन) चैप्टर के 16 वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन को स्वास्थ्य मंत्री सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग में नवजात शिशुओं के मृत्युदर में कमी लाने के लिए तेजी से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि बच्चों के इलाज की सुविधाओं में भी तेजी से इजाफा किया जा रहा है। सिक न्यूबार्न केयर यूनिट, एनआईसीयू जैसे वार्ड बनाए जा रहे हैं। ताकि गंभीर अवस्था में आने वाले शिशुओं को बेहतर इलाज मिल सके। यही नहीं गर्भवती महिलाएं स्वस्थ्य शिशु को जन्म दे सकें इसके लिए प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर से करार हुआ है। इनमें गर्भवती महिलाओं की डॉक्टर की सलाह पर मुफ्त जांच की सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
जागरुकता और इलाज के लिए बढ़ी सुविधा तो घटा मृत्युदर
केजीएमयू के बाल रोग विशेषज्ञ विभाग की डॉ. शालिनी त्रिपाठी बताती हैं कि वर्तमान में जागरुकता और अस्पतालों में लगातार बढ़ाई जा रही सुविधाओं के कारण अब बच्चों के मृत्युदर में लगातार गिरावट आ रही है। जहां पहले 1000 में 30 शिशुओं की मृत्यु हो जाती थी। वह अब घटकर 25 पर पहुंच गई है। इसे अगले दो साल में 50 फीसदी तक घटाने की योजना है। उन्होंने बताया कि शिशुओं की संक्रमण से अधिक मृत्यु हो रही है। इसे आसानी से रोका जा सकता है। नवजात शिशुओं को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह साबुन से धो लें। सैनेटाइजर से भी हाथों को धुलना चाहिए।


