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Lucknow News: : लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने खराब फल-सब्जी कराई नष्ट, गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई
Lucknow News: लखनऊ में मानसून के मौसम में बीमारियों की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सख्ती बढ़ा दी है।
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Lucknow News: राजधानी लखनऊ में मानसून के मौसम में बीमारियों की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग की जनपद स्तरीय टीमों ने लखनऊ के केजीएमयू, मानस विहार रोड, इंदिरानगर, बटहा सबौली, कुर्सी रोड, सिटी स्टेशन रोड, गोलागंज और कैसरबाग जैसे प्रमुख इलाकों में औचक निरीक्षण कर खराब फल और सब्जी मौके पर नष्ट कराएं।
स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना लक्ष्य
इस कार्रवाई का नेतृत्व सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय विजय प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने बताया अभियान का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। इन टीमों ने निरीक्षण के दौरान खाद्य विक्रेताओं के लाइसेंस चेक किए। उन्हें साफ-सुथरे और ताजे फल बेचने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी खाद्य प्रतिष्ठान में भविष्य में सड़े-गले या खराब गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री पाई गई, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम का हिस्सा
सहायक आयुक्त ने जानकारी देकर बताया कि यह विशेष अभियान संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे जुलाई माह चलाया जाएगा। इस अभियान का मकसद बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया, हैजा, दस्त आदि बीमारियों को फैलने से रोकना है, जो अक्सर अस्वच्छ खाद्य पदार्थों के सेवन से फैलती हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी दूषित, मिलावटी या सड़ी-गली खाद्य सामग्री की बिक्री होती दिखाई दे, तो वे तुरंत इसकी शिकायत फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप के माध्यम से करें।
फल-सब्जी विक्रेताओं को दी हिदायत
यह मोबाइल एप्लिकेशन आम जनमानस को खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु प्रभावी माध्यम प्रदान करता है। बाजारों में फल-सब्जी विक्रेताओं को हिदायत दी गई है कि वे सड़ा-गला माल न बेचें और न ही सड़कों पर गंदगी फैलाएं। इसके साथ ही स्वच्छता बनाए रखने, खाद्य सामग्री को ढककर रखने और नियमित रूप से सफाई करने के निर्देश दिए गए। यह मुहिम राजधानी के नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।


