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Mainpuri News: जिला कोर्ट बंद होने पर अधिवक्ताओं का 11वें दिन भी विरोध प्रदर्शन, RO कोर्ट खोलने की मांग
Mainpuri News: कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेंद्र यादव ने बताया कि 100 वर्षों से संचालित हो रही आरओ कोर्ट को बंद करने का निर्णय पीठासीन अधिकारी ध्रुव शुक्ला और जिलाधिकारी के बीच हुई गोपनीय वार्ता के बाद लिया गया है।
जिला कोर्ट बंद होने पर अधिवक्ताओं का 11वें दिन भी विरोध प्रदर्शन (photo: social media )
Mainpuri News: मैनपुरी में कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं की हड़ताल लगातार 11वें दिन भी जारी रही। राजस्व अधिकारी कोर्ट (आरओ कोर्ट) को बिना किसी पूर्व सूचना के बंद किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं ने आज जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस कार्रवाई से न्यायिक प्रक्रिया बुरी तरह बाधित हो रही है।
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेंद्र यादव ने बताया कि 100 वर्षों से संचालित हो रही आरओ कोर्ट को बंद करने का निर्णय पीठासीन अधिकारी ध्रुव शुक्ला और जिलाधिकारी के बीच हुई गोपनीय वार्ता के बाद लिया गया है। अधिवक्ताओं को इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे उत्तर प्रदेश सरकार को भी लक्षित करते हुए भूख हड़ताल पर उतरेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने प्रशासन को सोमवार तक का समय दिया है और चेतावनी दी है कि जब तक अधिवक्ताओं और वादकारियों की समस्याओं को सुना नहीं जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
विरोध के प्रतीक के रूप में, अधिवक्ताओं ने अपने चैंबरों में तालाबंदी भी कर दी है। उन्होंने कोर्ट बंद करने के पीछे शासन के दिशा-निर्देशों की जानकारी मांगी है, लेकिन जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है, जिससे अधिवक्ताओं की नाराजगी और बढ़ गई है।
धरना-प्रदर्शन
वकील लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप रहे हैं। उनका मुख्य सवाल यह है कि जब अधिवक्ताओं की ही बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम वादकारियों को न्याय कैसे मिलेगा? राजस्व अधिकारी कोर्ट में नए मामलों की सुनवाई ठप है, जिससे हजारों वादकारी प्रभावित हो रहे हैं। अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग है कि आरओ कोर्ट को तुरंत पुनः खोला जाए और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी का अधिकार दिया जाए।


