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Meerut News: किसान दिवस बैठक में किसान और अधिकारियों के बीच गरमाई बहस, जिलाधिकारी की देरी से बढ़ी नाराजगी
Meerut News: बैठक की शुरुआत ही विवादों से हुई क्योंकि जिलाधिकारी करीब आधे घंटे देर से पहुंचे। इससे किसानों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने जिलाधिकारी के खिलाफ जमकर विरोध जताया।
किसान दिवस बैठक में किसान और अधिकारियों के बीच गरमाई बहस (photo: social media )
Meerut News: मेरठ के विकास भवन सभागार में आज किसान दिवस की बैठक में किसानों और प्रशासन के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में सैकड़ों किसान शामिल हुए। किसानों ने पिछले महीनों से लंबित शिकायतों को लेकर प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताई।
बैठक की शुरुआत ही विवादों से हुई क्योंकि जिलाधिकारी करीब आधे घंटे देर से पहुंचे। इससे किसानों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने जिलाधिकारी के खिलाफ जमकर विरोध जताया। अनुराग चौधरी ने कहा, “जब अधिकारी हमारी समस्याओं को सुनने और हल करने के लिए समय पर नहीं आते, तो किसानों का भरोसा कैसे बनेगा?” इस पर जैसा कि भारतीय किसान यूनियन प्रवक्ता का कहना है कि जिलाधिकारी ने माफी मांगते हुए शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इन समस्याओं पर विशेष चर्चा
बैठक में बिजली, सिंचाई और गन्ना विभाग से जुड़ी समस्याओं पर विशेष चर्चा हुई। किसानों ने गन्ना भुगतान में देरी, किनोनी शुगर मिल से तीन क्विंटल उधार चीनी की मांग, और समिति ब्याज दर को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। सिंचाई बिजली की दस घंटे की मांग को प्रशासन ने स्वीकार किया, लेकिन किसानों ने 12 घंटे की मांग जारी रखी।
जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी अधिकारी पर दबाव बनता है तो वे शिकायत करें। “हम गलत काम के लिए किसी को दबाव में नहीं आने देंगे और जवाबदेही तय करेंगे,” उन्होंने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसानों की जायज समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने का फैसला लिया जाएगा।
किसानों ने 50 से अधिक नई शिकायतें जिलाधिकारी को सौंपीं
बैठक के दौरान किसानों ने 50 से अधिक नई शिकायतें भी जिलाधिकारी को सौंपीं, जिनमें तालाब सफाई, सड़क निर्माण और सिंचाई से संबंधित समस्याएं प्रमुख थीं। किसानों ने त्वरित कार्रवाई की मांग की।
इस बैठक में अधिकारियों और किसानों दोनों ने माहौल को शांत रखने की कोशिश की, लेकिन स्पष्ट था कि किसान अब और इंतजार नहीं करना चाहते। उन्होंने प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया।


