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सफेद टोपी, कुर्ता पैजामा पहने हजारों की भीड़ इकट्ठा... Talibani मंत्री के दीदार के लिए बेताब देवबंदी
Saharanpur News: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के देवबंद पहुंचने पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। तालिबान मंत्री के इस दौरे को देवबंदी विचारधारा से जुड़ाव और वैचारिक जड़ों को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
Saharanpur News: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी सात दिवसीय भारत यात्रा पर हैं और अब उनका एक कदम भारतीय राजनीति और कूटनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मुत्ताकी अपनी दिल्ली यात्रा के बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद पहुंचे। यहां उनके एक दीदार के लिए हजारों की भीड़ इकट्ठा है, जो सफेद कुर्ता पैजाया और टोपी लगाकर मौजूद हैं। मुत्ताकी के पहुंचते ही फूलों से उनका भव्य स्वागत किया गया। बता दें कि तालिबानी मंत्री का यहां पांच घंटे तक रुकने का पूरा कार्यक्रम है।
2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद किसी भी वरिष्ठ तालिबानी नेता का देवबंद आना यह पहला मौका है, और इस दौरे को तालिबान की वैचारिक जड़ों को मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
तालिबान और देवबंदी विचारधारा का संबंध
दारुल उलूम देवबंद की स्थापना 19वीं सदी में हुई थी और यह सुन्नी इस्लाम की देवबंदी विचारधारा का एक प्रमुख केंद्र है। यह विचारधारा दुनिया के कई हिस्सों में फैली हुई है, जिसमें अफगानिस्तान भी शामिल है। तालिबान की नींव इसी देवबंदी विचारधारा से प्रभावित मानी जाती है।
मुत्ताकी का यह दौरा न केवल एक कूटनीतिक कदम है, बल्कि यह अफगानिस्तान और देवबंदी विचारधारा के वैश्विक केंद्रों के बीच संबंधों को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी है। यह दौरा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की आंतरिक धार्मिक और वैचारिक गतिशीलता को छूता है। मुत्ताकी के इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि तालिबान अब सिर्फ राजनीतिक मंच पर ही नहीं, बल्कि वैचारिक और धार्मिक मंच पर भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
दौरे का निहितार्थ
मुत्ताकी के इस दौरे को उनकी विदेश यात्रा का एक गैर-आधिकारिक लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। दिल्ली में उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार और सुरक्षा पर चर्चा की, लेकिन देवबंद का दौरा तालिबान की वैश्विक वैधता प्राप्त करने की कोशिश से जुड़ा है। तालिबान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मान्यता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में दारुल उलूम देवबंद जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का दौरा करना उन्हें एक प्रकार की धार्मिक और वैचारिक स्वीकार्यता दिला सकता है। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान मुत्ताकी देवबंद के प्रमुख धार्मिक नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच वैचारिक संवाद को बढ़ावा मिलेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस दौरे का राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर क्या असर पड़ता है।


