Shravasti News: बौद्ध तपोस्थली अनुयायियों से गुलजार, श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने की पूजा अर्चना

Shravasti News: आज कटरा श्रावस्ती, बुद्ध की तपोस्थली में, श्रीलंका के बौद्ध अनुयायी अपने रीति-रिवाज के अनुसार जेतवन में परिक्रमा कर बोधि वृक्ष के समक्ष बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो की अध्यक्षता में पूजा-अर्चना की।

Radheshyam Mishra
Published on: 22 Aug 2025 5:43 PM IST
Shravasti News: बौद्ध तपोस्थली अनुयायियों से गुलजार, श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने की पूजा अर्चना
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बौद्ध तपोस्थली अनुयायियों से गुलजार   (photo: social media )

Shravasti News: बौद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती आजकल अनुयायियों से गुलजार है। श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो के नेतृत्व में पूजा की। इस दौरान अनुयायियों ने जेतवन एवं महामंकोल बुद्ध विहार की परिक्रमा कर ध्यान किया।

आज कटरा श्रावस्ती, बुद्ध की तपोस्थली में, श्रीलंका के बौद्ध अनुयायी अपने रीति-रिवाज के अनुसार जेतवन में परिक्रमा कर बोधि वृक्ष के समक्ष बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो की अध्यक्षता में पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने बताया कि तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण है। तृष्णा के कारण मनुष्य संसार की विभिन्न वस्तुओं की ओर प्रवृत्त होता है, और जब वह उन्हें प्राप्त नहीं कर पाता अथवा जब वे प्राप्त होकर भी नष्ट हो जाती हैं, तब उसे दुख होता है। तृष्णा के साथ मृत्यु को प्राप्त करने वाला प्राणी उसकी प्रेरणा से पुनः जन्म लेता है और संसार के दुखचक्र में पिसता रहता है। इसलिए तृष्णा को त्याग देने का मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है।

उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है जो दुख के निवारण का मार्ग बताता है। उनका यह अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्म, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के संदर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है। गौतम बुद्ध ने मनुष्य के बहुत से दुखों का कारण उसका स्वयं का अज्ञान और मिथ्या दृष्टि बताया है।

मृत बच्चे को लेकर बुद्ध के पास पहुंची

इसके साथ एक प्रसंग में बताया कि एक महिला अपने मृत बच्चे को लेकर बुद्ध के पास पहुंची, जिसने रोते हुए कहा कि मेरा बेटा मेरे जीवन का एकमात्र आधार है, कृपा करें, इसे किसी तरह फिर से जीवित कर दीजिए। बुद्ध ने कहा कि ठीक है, लेकिन तुम इससे पहले गांव के किसी ऐसे घर से मुट्ठी भर अनाज ले आओ, जहां कभी भी किसी की मृत्यु न हुई हो। महिला गांव के एक-एक घर जाकर कहने लगी कि अगर तुम्हारे घर में किसी की मृत्यु न हुई हो तो मुझे एक मुट्ठी अनाज दे दो। सुबह से शाम हो गई, लेकिन उसे गांव में ऐसा एक भी घर नहीं मिला, जहां कभी किसी की मृत्यु न हुई हो।

वह बुद्ध के पास लौट आई। बुद्ध ने महिला से कहा कि मैंने तुम्हें घर-घर इसलिए भेजा था, ताकि तुम्हें मृत्यु की सच्चाई मालूम हो सके। जिसने जन्म लिया है, उसे एक दिन अवश्य मरना है। महिला को बुद्ध की बातें समझ आ गईं और उसने बुद्ध से दीक्षा ले ली और उसके जीवन में शांति आ गई। इस मौके पर कई अन्य बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।

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