Sonbhadra News: यूनेस्को की संभावित सूची में सोनभद्र के फासिल्स: बोले जयंत चौधरी, यह राष्ट्र की धरोहर

सोनभद्र के सलखन स्थित 150 करोड़ वर्ष पुराने फासिल्स को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इसे राष्ट्र की अनमोल धरोहर बताया, जिससे पर्यटन और वैश्विक पहचान को मिलेगा बढ़ावा।

Kaushlendra Pandey
Published on: 23 Jun 2025 10:03 PM IST (Updated on: 23 Jun 2025 10:12 PM IST)
Sonbhadra News: यूनेस्को की संभावित सूची में सोनभद्र के फासिल्स: बोले जयंत चौधरी, यह राष्ट्र की धरोहर
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Sonbhadra News: दुनिया के अजूबे और अनूठी धरोहर के रूप में पहचान रखने वाले सोनभद्र के सलखन स्थित फासिल्स को यूनेस्को की सूची में शामिल करने को लेकर चल रही पहल के बीच, केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है। सोनभद्र दौरे पर आए जयंत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सोनभद्र के फासिल्स राष्ट्र की धरोहर हैं। इसे यूनेस्को की सूची में शामिल होने से जहां, जिले का गौरव बढ़ेगा। वहीं, सोनभद्र के पर्यटन में भी तेजी से वृद्धि होगी।

कहा कि सोनभद्र का प्राकृतिक सौंदर्य और यहां की संस्कृति दोनों अपने आप में अनूठी है। फासिल्स पार्क भी सोनभद्र को एक अलग पहचान देता है। सलखन में पाए जाने वाला फासिल्स पूरे राष्ट्र की धरोहर है। यूनेस्को की तरफ से इसे संभावित सूची में शामिल किया जाना गौरव की बात है। उम्मीद है कि जल्द ही, यूनेस्को की तरफ से इस धरोहर को जल्द ही विश्व विरासत सूची जारी कर दी जाएगी।


धरती पर जीवन की उत्पत्ति के जीते-जागते हैं प्रमाण हैं फासिल्स

सोनभद्र में पाए जाने वाले फासिल्स जहां अमेरिका के यलो स्टोन पार्क को भी पीछे छोड़ने वाले और दुनिया में सबसे अधिक सुरक्षित स्थिति में मौजूद हैं। वहीं, यहां पाए जाने वाले जीवाश्म, पृथ्वी पर जीवन के उत्पत्ति की शुरूआती गाथा बयां करते हैं। समुद्री शैवाल की पहचान रखने वाले इन जीवाश्मों के बारे में भू-वैज्ञानिक का दावा है कि, जब पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति शुरू हुई, तब समुद्री शैवाल ही आक्सीजन के सबसे पहले वाहक के रूप में सामने आए। बाद में यही शैवाल जीवाश्म के रूप में बदल गए।



150 वर्ष करोड़ प्राचीन धरोहर की है मान्यता:

सोनभद्र में जहां महाकौशल चट्टानों को लगभग 400 करोड़ वर्ष प्राचीन होने का दावा किया जा चुका है। वहीं, सलखन स्थित फासिल्स को डेढ़ सौ करोड़ प्राचीन होने का दावा किया जाता है। इस बात की पुष्टि, सिर्फ भारत के ही वैज्ञानिकों ने ही, दूसरे देशों से आए भू-वैज्ञानिकों द्वारा भी की जा चुकी है। पृथ्वी विज्ञान के अध्ययन के लिए फासिल्स को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में भी बताया जा चुका है लेकिन इस धरोहर को उसकी सही पहचान न मिलने से, इसका समुचित संरक्षण और इसके प्रति पर्यटकों का पूरा आकर्षण नहीं मिल पा रहा है।

यूनेस्को की संभावित सूची को माना जा रहा बड़ी उपलब्धि:

बताते चलें कि भारत की अन्य धरोहरों के साथ, सोनभद्र के फासिल्स को यूनेस्को की विश्व धरोहरों की संभावित सूची में शामिल कराने में सफलता है। इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब इस संभावित सूची पर आगे चलकर विश्व धरोहर समिति को निर्णय लेना है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही, डेढ़ अरब पुरानी इस विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलती दिखाई देगी।

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Harsh Sharma

Harsh Sharma

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