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UP News: स्कूल मर्जर पर सदन में गरमाई बहस ! सपा एमएलसी बोले- शिक्षा व्यवसाय नहीं, मौलिक अधिकार है, शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब
UP News: सपा नेता और विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव ने कहा कि सरकार छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों को बंद कर रही है, जो कि गलत है। उन्होंने कहा, चाहे स्कूल में 50 बच्चे हों या 25, उसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव (photo: social media )
UP News: उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मानसून सत्र के दौरान शिक्षा व्यवस्था को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव ने स्कूलों के मर्जर का मुद्दा जोरशोर से उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है, इसे किसी भी हाल में व्यवसायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
सपा नेता और विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव ने कहा कि सरकार छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों को बंद कर रही है, जो कि गलत है। उन्होंने कहा, चाहे स्कूल में 50 बच्चे हों या 25, उसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की एडमिशन नीति में अंतर छात्रों की उपस्थिति को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि परिषदीय स्कूलों में दाखिले की उम्र 5 साल है, जबकि निजी स्कूल 3 साल में ही बच्चों को ले लेते हैं। सरकार को या तो दोनों में एकसमान आयु तय करनी चाहिए या तो तीन साल या पांच साल।
शिक्षा मंत्री का पलटवार,हमने शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का किया काम
सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव के सवालों का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार ने 2017 के बाद शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी शासनकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2012 से 2017 तक तीन करोड़ बच्चे ऐसे थे जो शिक्षा से वंचित रहे।
शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि स्कूल मर्जर का फैसला शिक्षा समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 50 से कम बच्चों वाले स्कूलों को मर्ज करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन इससे किसी भी क्षेत्र के बच्चों को स्कूल पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
बीजेपी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
संदीप सिंह ने शिक्षा क्षेत्र में भाजपा सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2012 से 2017 के बीच केवल 1708 स्कूलों में ही विद्युतीकरण हुआ था, जबकि डबल इंजन की सरकार में अब तक 65,000 विद्यालयों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि सरकार ने अब तक 53,000 से अधिक शौचालयों का निर्माण भी करवाया है। वहीं इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि आगामी समय में शिक्षा नीति और स्कूल मर्जर का मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।


