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UP News: 20 दिनों में पूरे प्रदेश में 200 प्रयोगशालाओं में डेंगू एवं चिकनगुनिया की राज्य स्तरीय प्रशिक्षण
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर 20 दिनों के लिए डेंगू,चिकनगुनिया की जांच के लिए 200 लैब चिन्हित कर कर्मियों को प्रशिक्षण देने का फैसला किया है।
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Uttar Pradesh News: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर 20 दिनों के लिए डेंगू,चिकनगुनिया की जांच के लिए 200 लैब चिन्हित कर कर्मियों को प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। इसके तहत मरीजों की जांच के लिए कर्मियों को जांच के दौरान कई तरीकों की बारीकियों के बारे में बताया जाएगा। इस प्रशिक्षण की शुरुआत आज से कर दी गयी है।
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) लखनऊ के वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (VRDL) माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग के डेंगू प्रकोष्ठ के सहयोग के साथ डेंगू, चिकनगुनिया की एलाइजा आधारित प्रयोगशाला जांच पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार से पूरे प्रदेश में कर दी है। इस प्रशिक्षण के लिए पूरे प्रदेश में 200 लैब चिन्हित किये गए हैं। जिनमे काम कर रहे टेक्नीशियन अलग-अलग चरणों मे प्रशिक्षित किये जायेंगे। पीजीआई इस कार्यक्रम को 20 दिनों तक चलाएगा।
त्वरित इलाज में मिलेगा फायदा
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संगमयी एस. के. मारक ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रदेश स्तर पर जांच क्षमताओं को सुदृढ करने और मच्छरजनित रोगों के प्रकोप की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।
इन प्रमुख बिंदुओं पर होगा प्रशिक्षण
वीआरडीएल प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. अतुल गर्ग ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है जिसमें डेंगू एवं चिकनगुनिया की एलिसा आधारित जांच की व्यवहारिक ट्रेनिंग, आरटी-पीसीआर तकनीक द्वारा डेंगू वायरस सीरो-टाइपिंग,गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिस (गल्प) एवं बायोसेफ्टी मानकों का अनुपालन,गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रियाएं होंगी। यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव देकर राज्य भर की प्रयोगशालाओं में सटीक, एकरूप और गुणवत्तापूर्ण जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
शशक्त नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य
डेंगू प्रकोष्ठ के संयुक्त निदेशक डेंगू डॉ. वी. के. सिंगल ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में एक सशक्त नैदानिक नेटवर्क तैयार करेगा। जिससे किसी भी डेंगू या चिकनगुनिया प्रकोप की स्थिति में समयबद्ध और प्रभावी प्रतिक्रिया संभव होगी।इस पहल के माध्यम से राज्य की वायरल डायग्नोस्टिक क्षमताओं में वृद्धि होगी। जिससे उत्तर प्रदेश मच्छरजनित रोगों से निपटने के राष्ट्रीय प्रयासों में अहम भूमिका निभा सकेगा।


