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ईरानी हमलों के बीच अबू धाबी का भव्य हिंदू मंदिर अस्थायी रूप से बंद, जानिए इतिहास
Israel Iran Tension Latest Update: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच एहतियातन 9 मार्च तक बंद रहेगा अबू धाबी का BAPS स्वामीनारायण मंदिर, अंदर जारी हैं शांति प्रार्थनाएं।
BAPS Hindu Temple Abu Dhabi Closed Amid Iran Attacks
Israel Iran Tension Latest Update: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरानी हमलों के बीच अबू धाबी स्थित बीएपीएस हिंदू मंदिर को एहतियातन 9 मार्च तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। मंदिर प्रबंधन ने साफ कहा है कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहों के अनुरूप लिया गया है। इस दौरान श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रहेगी, लेकिन मंदिर के भीतर संत-महंत विश्व शांति, सुरक्षा और सभी के कल्याण के लिए नियमित प्रार्थना करते रहेंगे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
जंग के हालात और सुरक्षा को प्राथमिकता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों की स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। अबू धाबी और दुबई के हवाई अड्डों पर हमलों की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने एहतियातन अपना एयर स्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार अब तक 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज मिसाइलों और 541 ड्रोन हमलों को झेला गया है। इन घटनाओं में 58 लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि वह घायल भारतीय के संपर्क में है और हर संभव सहायता दी जा रही है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ने मंदिर को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी तरह का जोखिम न हो।
रेगिस्तान में खिला आस्था का भव्य कमल
अबू धाबी का यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और वैश्विक सद्भाव का प्रतीक बन चुका है। 27 एकड़ में फैला यह मंदिर पारंपरिक हिंदू शिल्पकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है।
साल 2018 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई दौरे पर गए थे, तब इस मंदिर के निर्माण की घोषणा की गई थी। इसके बाद 14 फरवरी 2024 को उन्होंने ही इसका भव्य उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय और स्थानीय लोग शामिल हुए थे। यह मध्य पूर्व का पहला पारंपरिक पत्थर से बना हिंदू मंदिर है, जो धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक सम्मान का संदेश देता है।
बीएपीएस परंपरा, सेवा और संस्कार का संदेश
बीएपीएस संस्था भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाओं पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को नैतिक जीवन, भक्ति, सेवा और संस्कारों से जोड़ना है। दुनिया भर में बीएपीएस के मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र भी हैं। अबू धाबी का मंदिर भी इसी सोच को आगे बढ़ाता है। यहां नियमित रूप से प्रार्थना, सत्संग, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक सेवा गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। यह मंदिर खाड़ी में बसे लाखों भारतीयों के लिए भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
पत्थरों में उकेरी गई भारतीय सभ्यता
मंदिर की वास्तुकला इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इसका निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया गया है। राजस्थान और गुजरात से लाए गए गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से इसे बनाया गया है।
हर स्तंभ और दीवार पर बारीक नक्काशी की गई है, जिसमें भारतीय महाकाव्यों, देवी-देवताओं, प्रकृति और पशु-पक्षियों की सुंदर आकृतियां उकेरी गई हैं। हजारों कारीगरों ने मिलकर हर पत्थर को भारत में तराशा और फिर उन्हें यूएई लाकर जोड़ा गया। यह पूरी प्रक्रिया अपने आप में एक अनोखा उदाहरण है कि परंपरा और तकनीक कैसे साथ चल सकती हैं।
सात शिखरों में छिपा एकता का संदेश
मंदिर के सात शिखर संयुक्त अरब अमीरात के सात अमीरात का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि विविधता में एकता ही किसी भी देश की असली ताकत होती है।
मंदिर परिसर में प्रार्थना हॉल, प्रदर्शनी क्षेत्र, सामुदायिक सभागार और हरियाली से सजे उद्यान भी हैं। यहां आने वाले लोग न केवल पूजा करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास के बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं।
मान्यताएं और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में मंदिर को ईश्वर के निवास का स्थान माना जाता है। बीएपीएस मंदिर में भगवान स्वामीनारायण सहित विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां रोज सुबह और शाम आरती होती है, भजन गाए जाते हैं और विशेष अवसरों पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। दीपावली, जन्माष्टमी, राम नवमी और होली जैसे त्योहार यहां बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। मंदिर का उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक शांति देना और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।
भारत-यूएई संबंधों की मजबूत कड़ी
यह मंदिर भारत और यूएई के बीच गहरे होते संबंधों का भी प्रतीक है। यूएई सरकार द्वारा मंदिर निर्माण के लिए भूमि देना यह दर्शाता है कि वहां धार्मिक विविधता को सम्मान दिया जाता है।
खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह मंदिर गर्व और आत्मीयता का केंद्र बन चुका है। यहां आकर लोग अपने देश और संस्कृति से जुड़ाव महसूस करते हैं।
संकट के समय भी जारी है शांति की प्रार्थना
हालांकि मंदिर के द्वार फिलहाल बंद हैं, लेकिन भीतर से प्रार्थना का क्रम जारी है। संत-महंत सभी की सुरक्षा और विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थनाएं कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि हालात सामान्य होते ही श्रद्धालुओं के लिए द्वार फिर खोल दिए जाएंगे।
क्योंकि आस्था के साथ-साथ सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
9 मार्च के बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद है और श्रद्धालु फिर से इस भव्य मंदिर में दर्शन कर सकेंगे। तब तक इस मंदिर में शांति, सुरक्षा और मानवता के कल्याण के लिए प्रार्थनाएं जारी हैं।


