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चुनाव से पहले बांग्लादेश में 'ब्लैकआउट' का खतरा! अडानी का अल्टीमेटम- 1000 करोड़ दो वरना कटेगी बिजली?
Adani Power Bangladesh Dues: बांग्लादेश में चुनाव से पहले मचेगा अंधेरा? अडानी ग्रुप ने 1000 करोड़ के बकाये के लिए भेजा अल्टीमेटम। भुगतान न होने पर बिजली सप्लाई रोकने की चेतावनी।
Adani Power Bangladesh Dues: बांग्लादेश इस वक्त एक दोहरी मुसीबत के बीच खड़ा है। एक तरफ 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों की सरगर्मी है, तो दूसरी तरफ पूरे देश को अंधेरे में डूबने का डर सता रहा है। भारत के दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी के 'अडानी ग्रुप' ने बांग्लादेश सरकार को एक ऐसी चिट्ठी भेजी है, जिसने ढाका से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी है। चुनावों से ऐन पहले आई इस चेतावनी ने बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के हाथ-पांव फुला दिए हैं। अडानी ग्रुप ने साफ लफ्जों में कह दिया है कि अगर बकाये का भुगतान तुरंत नहीं किया गया, तो बिजली की सप्लाई किसी भी वक्त रोकी जा सकती है। यह सिर्फ एक कारोबारी चिट्ठी नहीं है, बल्कि एक ऐसा झटका है जो चुनावों के नतीजे बदल सकता है।
अडानी ग्रुप की 'डेडली' चिट्ठी में क्या है?
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'प्रथम आलो' की रिपोर्ट के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) के चेयरमैन को एक कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में बताया गया है कि झारखंड के गोड्डा स्थित पावर प्लांट को चलाने के लिए पैसों की भारी किल्लत हो रही है। अडानी ग्रुप ने मांग की है कि उन्हें तुरंत 112.7 मिलियन डॉलर (लगभग 1,000 करोड़ रुपये) का भुगतान किया जाए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस रकम में पिछले साल जून तक का 53.2 मिलियन डॉलर और अक्टूबर महीने का 59.6 मिलियन डॉलर का बकाया शामिल है। बार-बार की अपील के बाद भी जब बांग्लादेश की ओर से पैसा नहीं मिला, तो अडानी ग्रुप को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
बिजली गुल होने से बढ़ सकता है जनता का गुस्सा
अडानी ग्रुप ने अपनी चेतावनी में साफ किया है कि बढ़ते बकाये के कारण पावर प्लांट के मेंटेनेंस और वहां काम करने वाले पार्टनर्स को भुगतान करना नामुमकिन होता जा रहा है। अगर पैसा नहीं मिला, तो बिजली का उत्पादन ठप पड़ सकता है। बता दें कि बांग्लादेश अपनी बिजली की जरूरतों के लिए अडानी के गोड्डा प्लांट पर काफी हद तक निर्भर है। पिछले साल बकाये की वजह से ही सप्लाई में गिरावट देखी गई थी और कुल क्षमता का बहुत छोटा हिस्सा ही बांग्लादेश को मिल पाया था। अब जबकि देश में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में अगर बिजली की सप्लाई रुकती है, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और सरकार के खिलाफ गुस्सा भड़क सकता है।
क्या फिर से मान जाएगी बांग्लादेश सरकार?
यह पहली बार नहीं है जब अडानी ग्रुप ने बांग्लादेश को इस तरह का अल्टीमेटम दिया हो। पिछले साल भी नवंबर में ऐसी ही स्थिति बनी थी। तब अडानी ग्रुप ने 10 नवंबर की डेडलाइन दी थी और चेतावनी दी थी कि 11 नवंबर से बिजली काट दी जाएगी। उस वक्त घबराई बांग्लादेश सरकार ने फौरन 100 मिलियन डॉलर का भुगतान कर दिया था। लेकिन दिसंबर आते-आते बकाया फिर से पहाड़ जैसा खड़ा हो गया। अब 12 फरवरी के चुनावों से पहले बांग्लादेश के पास समय बहुत कम है। क्या सरकार एक बार फिर कर्ज चुकाकर अंधेरे से बचेगी या इस बार मामला हाथ से निकल जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।


