हिंदू मंदिर में नरसंहार की साजिश! राइफल जाम नहीं होती तो हो सकता था बड़ा कांड

America Hindu Temple Attack Plot: अमेरिका के इलिनॉय में हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश के आरोप में 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार हुआ है। घर से राइफल, सैकड़ों कारतूस और नस्लवादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री मिली।

Newstrack Network
Published on: 15 Oct 2026 6:02 PM IST
Illinois Hindu Temple
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America Hindu Temple Attack Plot

America Hindu Temple Attack Plot: अमेरिका के इलिनॉय राज्य के ऑरोरा शहर में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर सामूहिक गोलीबारी करने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 19 वर्षीय अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस (Alexandros Paporakis) को गिरफ्तार किया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी भारतीय मूल के लोगों समेत कई समुदायों के प्रति नस्लवादी विचार रखता था और बड़ी संख्या में लोगों की हत्या करने की योजना बना रहा था। पुलिस ने उसके घर से एआर शैली की राइफल, सैकड़ों कारतूस, सुरक्षा उपकरण और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री बरामद की है। मामले की जांच में अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) भी शामिल है।

आरोपी इलिनॉय के पैलेटाइन इलाके का रहने वाला है। बुधवार, 14 अक्टूबर को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायाधीश ने मुकदमे की सुनवाई तक उसे हिरासत में रखने का आदेश दिया। उसकी अगली पेशी 30 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

मंदिर के आसपास पहुंचा था आरोपी, राइफल जाम होने का दावा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी 11 अक्टूबर को ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर के आसपास पहुंचा था। उसके पास एआर शैली की राइफल, लगभग 300 कारतूस और शरीर की सुरक्षा के लिए विशेष कवच समेत अन्य उपकरण थे। आरोप है कि उसने गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन राइफल जाम हो गई। इसके बाद वह वहां से चला गया।

हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि आरोपी किस मंदिर को निशाना बनाना चाहता था। कुछ समाचार रिपोर्टों में श्री वेंकटेश्वर स्वामी यानी बालाजी मंदिर का नाम संभावित लक्ष्य के रूप में सामने आया है, लेकिन पुलिस ने किसी विशेष मंदिर को निश्चित निशाना बनाए जाने की पुष्टि नहीं की है।

सहकर्मियों की सतर्कता से सामने आई कथित साजिश

पुलिस जांच के मुताबिक, पापोराकिस अमेरिका की फास्ट फूड कंपनी टैको बेल के एक प्रतिष्ठान में कैशियर के रूप में काम करता था। उसके सहकर्मियों ने पुलिस को बताया कि वह अक्सर नस्लवादी और आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। आरोप है कि वह भारतीयों, यहूदियों और अफ्रीकी मूल के लोगों के प्रति नफरत जाहिर करता था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपी श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा और नाजी विचारों से प्रभावित था। वह सहकर्मियों के सामने हथियारों, हिंसा और सामूहिक हत्या की बातें भी करता था।

अदालत में पेश जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को आरोपी ने अपने एक सहकर्मी से ऑरोरा के सबसे बड़े हिंदू मंदिर पर हमला करने की योजना का जिक्र किया था। उसने अगले दिन कुछ विशेष होने का संकेत भी दिया था।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 11 अक्टूबर को आरोपी ने एक सहकर्मी से फोन पर संपर्क कर बताया कि उसकी बंदूक जाम हो गई थी, जिसके कारण उसे वहां से निकलना पड़ा। इसके बाद उसने सिग्नल (Signal) मैसेजिंग एप के जरिए राइफल के काम नहीं करने का वीडियो, हथियार की तस्वीर और सुरक्षा कवच पहने अपनी तस्वीर साझा की। उसने कथित तौर पर दोबारा हमला करने की मंशा भी जताई थी।

इन संदेशों से चिंतित दो सहकर्मियों ने आपातकालीन सेवा को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

घर से राइफल, कारतूस और नाजी प्रतीक बरामद

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली। वहां से बिना सीरियल नंबर वाली एआर शैली की राइफल, गोलियों से भरी कई मैगजीन, सैकड़ों अतिरिक्त कारतूस, सुरक्षा कवच और सामरिक उपकरण बरामद किए गए। पुलिस को श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा से जुड़े प्रतीक और एक गैस कनस्तर भी मिला, जिस पर दक्षिण एशियाई लोगों के लिए अपमानजनक शब्द लिखा हुआ था।

जांचकर्ताओं को आरोपी से संबंधित आठ पृष्ठों का एक दस्तावेज भी मिला। इसका शीर्षक 'Why I Fought: A.K.A. (Aurora Shooter's Manifesto)' था, जिसका हिंदी अर्थ है- 'मैंने संघर्ष क्यों किया: ऑरोरा हमलावर का घोषणापत्र'।

पुलिस के अनुसार, इस दस्तावेज में श्वेत वर्चस्व और नव-नाजी विचारधारा से जुड़े विचार दर्ज थे। इसमें दक्षिण एशियाई लोगों, विशेष रूप से भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा का उल्लेख होने का आरोप है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि दस्तावेज में विभिन्न नस्ली और धार्मिक समुदायों के प्रति नफरत और बड़ी संख्या में लोगों की हत्या करने की कल्पना से जुड़ी बातें लिखी गई थीं।

किस हिंदू मंदिर को निशाना बनाना चाहता था आरोपी?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपी किस हिंदू मंदिर पर हमला करने की योजना बना रहा था। ऑरोरा और शिकागो महानगरीय क्षेत्र में भारतीय समुदाय के कई धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र हैं। कुछ समाचार रिपोर्टों में श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर का नाम संभावित लक्ष्य के रूप में सामने आया है, लेकिन पैलेटाइन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में अभी तक किसी खास मंदिर को निश्चित लक्ष्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, संदेशों और दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि आरोपी ऑरोरा क्षेत्र के किसी हिंदू धार्मिक स्थल को निशाना बनाना चाहता था। खतरे की जानकारी मिलने के बाद ऑरोरा पुलिस विभाग को सूचित किया गया। स्थानीय पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले हिंदू धार्मिक स्थलों से संपर्क कर उन्हें संभावित खतरे के बारे में आगाह किया।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस मामले से जुड़ा कोई सक्रिय खतरा सामने नहीं आया है। हालांकि, जांच जारी है।

एफबीआई भी कर रही मामले की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए एफबीआई के शिकागो कार्यालय को भी जांच में शामिल किया गया है। पैलेटाइन और माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस विभागों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 11 अक्टूबर को आरोपी को गिरफ्तार किया था।

जांचकर्ता उसके इलेक्ट्रॉनिक संदेशों, डिजिटल दस्तावेजों और हथियारों की पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने हथियार कैसे हासिल किए, कथित हमले की योजना कब बनाई और क्या उसकी गतिविधियों के बारे में किसी अन्य व्यक्ति को जानकारी थी।

पैलेटाइन के पुलिस प्रमुख विलियम नॉर्ड ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि कथित खतरे को कम करके नहीं आंका जा सकता। उनके अनुसार, पुलिस विभागों के बीच समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान होने से आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी संभव हो सकी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी के किसी व्यापक चरमपंथी नेटवर्क से संबंध थे या नहीं। हालांकि, अभी तक ऐसे किसी नेटवर्क से उसके संबंधों की पुष्टि नहीं हुई है।

आतंकवादी धमकी और अवैध हथियार रखने के आरोप

अमेरिकी अधिकारियों ने पापोराकिस पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध हथियार रखने के आरोप लगाए हैं। उस पर 16 इंच से कम लंबाई की नली वाले हथियार को अवैध रूप से रखने का आरोप भी है। इलिनॉय के कानून के तहत आतंकवादी धमकी से संबंधित आरोप को क्लास एक्स श्रेणी का गंभीर अपराध माना गया है, जबकि हथियार संबंधी आरोप क्लास तीन श्रेणी में आता है।

14 अक्टूबर को आरोपी को इलिनॉय के रोलिंग मीडोज स्थित कुक काउंटी अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद उसे मुकदमे से पहले रिहा नहीं करने का आदेश दिया। उसकी अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोप जोड़े जाने की संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं।

हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। उसे अपना बचाव करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

भारतीय वाणिज्य दूतावास ने जताई चिंता

शिकागो स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने भी मामले का संज्ञान लिया है। दूतावास ने कहा कि उसे इलिनॉय के ऑरोरा में एक धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की कथित नाकाम कोशिश से जुड़ी खबरों की जानकारी है। भारतीय अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई करने के लिए अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सराहना की है। दूतावास के मुताबिक, वह भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और घटनाक्रम पर नजर रख रहा है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने भी पुलिस कार्रवाई की सराहना करते हुए समुदाय के लोगों से सतर्क रहने और किसी संभावित खतरे की सूचना संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की है। संगठन ने धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षित माहौल में पूजा-अर्चना करने के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया है।

ओहायो के मंदिर में तोड़फोड़ की घटना भी आई थी सामने

ऑरोरा की कथित साजिश से करीब दो सप्ताह पहले अमेरिका के ओहायो राज्य में स्थित श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। उस घटना में मंदिर की खिड़कियों को नुकसान पहुंचाया गया था। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह के संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

ऑरोरा का मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जांच में कथित धमकी भरे संदेशों के साथ हथियार, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, सुरक्षा उपकरण और हिंसक विचारों वाला दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी कथित हमले के लिए निर्धारित इलाके तक भी पहुंच चुका था।

फिलहाल अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि इस मामले से जुड़ा कोई ज्ञात सक्रिय खतरा सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी की तैयारी किस स्तर तक पहुंच गई थी और उसके कथित इरादों के संबंध में डिजिटल तथा भौतिक साक्ष्य क्या साबित करते हैं। यह मामला नस्लीय नफरत से जुड़ी धमकियों को समय रहते पहचानने और संभावित हिंसा रोकने के लिए पुलिस तथा समुदाय के बीच समन्वय के महत्व को भी सामने लाता है।

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