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America में 'शक्तियों' की जंग! ट्रंप ने कोर्ट के आदेश को पलटा... 15% Tariff से भारत को तगड़ा झटक...
Trump Tariffs 15% India Impact: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव के बाद वैश्विक आयात शुल्क 15% कर दिया गया है।
Trump Tariffs 15% India Impact
Trump Tariffs 15% India Impact: अमेरिका में सियासत और न्यायपालिका के बीच छिड़ी जंग अब दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाने लगी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक और बड़ा फैसला लेते हुए वैश्विक आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा कर दी। खास बात यह है कि यह फैसला उनके पिछले ऐलान के महज 24 घंटे बाद आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ आर्थिक कदम है या फिर अदालत के फैसले के खिलाफ सीधी प्रतिक्रिया?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ा विवाद
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स ने 6-3 के बहुमत से कहा था कि 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता। अदालत ने साफ किया कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर वैश्विक शुल्क थोपना संविधान के अनुरूप नहीं है। इस फैसले के बाद उम्मीद थी कि भारत समेत कई देशों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क घटकर करीब 3.5 प्रतिशत रह जाएंगे।
लेकिन ट्रंप ने अदालत के आदेश को “हास्यास्पद” और “अमेरिका विरोधी” बताते हुए न सिर्फ कड़ी आलोचना की, बल्कि एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर पहले 10 प्रतिशत और अब 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया। उन्होंने असहमति जताने वाले जजों की खुलकर तारीफ भी की।
भारत के लिए क्या मायने?
भारत के लिए यह स्थिति राहत और अनिश्चितता के बीच झूलती दिख रही है। पिछले साल भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा था, जिसे रूस से तेल आयात के मुद्दे पर बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया था। फरवरी 2026 में कुछ राहत मिली और हाल ही में एक अंतरिम व्यापार समझौते के बाद शुल्क 18 प्रतिशत तय हुआ।
अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह लागू होता, तो भारत पर शुल्क घटकर 3.5 प्रतिशत रह सकता था। लेकिन अब नए 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ के बाद भारत के लिए प्रभावी दर करीब 18.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यानी मौजूदा 18 प्रतिशत के मुकाबले 0.5 प्रतिशत का अतिरिक्त बोझ।
150 दिनों की उलटी गिनती
ट्रंप का यह नया टैरिफ आदेश केवल 150 दिनों के लिए वैध है। आगे इसे जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन पर टिकी हैं, क्योंकि इस टकराव का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और बाजारों पर भी पड़ सकता है।


