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30 सेकंड के विस्फोट ने मचाया हड़कंप! अनाक क्राकाटोआ की राख से जकार्ता एयरपोर्ट ठप, उड़ानें प्रभावित
Anak Krakatoa Eruption: इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद राख फैलने से जकार्ता एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। 209 उड़ानें और 22,800 यात्री प्रभावित हुए।
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Anak Krakatoa Eruption: इंडोनेशिया (Indonesia) में रविवार तड़के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में जोरदार विस्फोट के बाद हालात अचानक बदल गए। ज्वालामुखी से निकली भारी राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कई हिस्सों में फैल गई, जिसका सीधा असर हवाई यातायात पर पड़ा। राख के खतरे को देखते हुए राजधानी जकार्ता (Jakarta) के सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Soekarno-Hatta International Airport) से सभी उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इस वजह से रविवार को 209 उड़ानें प्रभावित हुईं और करीब 22,800 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
शनिवार से बढ़ रही थी ज्वालामुखी की गतिविधि
इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, जावा (Java) और सुमात्रा (Sumatra) के प्रमुख द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट (Sunda Strait) में स्थित अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखीय द्वीप में शनिवार से ही गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिलने लगे थे। इसके बाद रविवार तड़के करीब 3 बजकर 53 मिनट पर ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ, जो लगभग 30 सेकंड तक जारी रहा।
विस्फोट के बाद ज्वालामुखी से निकली राख तेजी से आसपास के इलाकों में फैलने लगी। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और न ही आसपास रहने वाले लोगों को वहां से हटाने का कोई आदेश जारी किया गया है।
सबसे नजदीकी आबादी 16 किलोमीटर दूर
ज्वालामुखी के सबसे करीब बसी आबादी करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद इंडोनेशियाई एजेंसियों ने कोई जोखिम लेने के बजाय स्थानीय लोगों और पर्यटकों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। लोगों को ज्वालामुखी के सक्रिय स्थल से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी गई है।
इंडोनेशिया के ज्वालामुखी विज्ञान एवं भूवैज्ञानिक आपदा न्यूनीकरण केंद्र (Volcanology and Geological Disaster Mitigation Center) के मुताबिक, ज्वालामुखी से निकली राख का असर सिर्फ आसपास तक सीमित नहीं रहा। राख राजधानी जकार्ता के साथ ही सुमात्रा द्वीप और दक्षिणी छोर पर स्थित लामपुंग प्रांत (Lampung Province) के कुछ हिस्सों तक फैल गई।
सुबह 5:30 बजे से रोक दी गईं उड़ानें
राख फैलने के बाद सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने रविवार सुबह एक परामर्श जारी किया। इसमें बताया गया कि माउंट अनाक क्राकाटोआ (Mount Anak Krakatau) की बढ़ी हुई ज्वालामुखीय गतिविधि को देखते हुए सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 30 मिनट तक उड़ान संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया।
देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर इसका बड़ा असर दिखाई दिया। यात्रियों ने रिफंड यानी टिकट का पैसा वापस करने की मांग की। कई यात्रियों को अपना चेक-इन किया हुआ सामान भी वापस लेना पड़ा। वहीं, एयरपोर्ट के प्रस्थान बोर्ड पर रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
एयरपोर्ट पर खड़े रह गए 170 विमान
इंडोनेशिया के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation) ने कहा कि वह ज्वालामुखी विस्फोट के बाद हवाई यात्रा पर पड़ने वाले असर पर लगातार नजर रख रहा है। विभाग हवाई अड्डे, एयरपोर्ट संचालकों, हवाई सेवाओं और मौसम विज्ञान एजेंसी के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहा है।
विभाग के मुताबिक, सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रात के दौरान खड़े किए गए 170 विमान अब भी वहीं मौजूद हैं। ज्वालामुखी से निकली राख के कारण उड़ान संचालन पर असर पड़ने से इन विमानों का परिचालन भी प्रभावित हुआ।
209 उड़ानें प्रभावित, 22,800 यात्रियों की बढ़ी परेशानी
एयरपोर्ट बंद किए जाने और उड़ानों के संचालन पर रोक के कारण रविवार को कुल 209 उड़ानें प्रभावित हुईं। इसका असर करीब 22,800 यात्रियों पर पड़ा। प्रभावित उड़ानों में दक्षिण सुलावेसी (South Sulawesi) के मकासर (Makassar) के बीच चलने वाली व्यस्त घरेलू उड़ानें भी शामिल रहीं।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सबसे ज्यादा असर सिंगापुर (Singapore) जाने वाली और वहां से आने वाली उड़ानों पर पड़ा। इसके अलावा हांगकांग (Hong Kong), सिडनी (Sydney), एम्स्टर्डम (Amsterdam), दक्षिण कोरिया के सियोल (Seoul), कतर के दोहा (Doha) और मलेशिया के कुआलालंपुर (Kuala Lumpur) से जुड़ी उड़ानें भी प्रभावित हुईं।
इनमें कुछ उड़ानों को रद्द कर दिया गया, कुछ के परिचालन में देरी हुई और कई उड़ानों के समय में बदलाव करना पड़ा। वहीं, लामपुंग, बाली (Bali) और सुराबाया (Surabaya) जाने वाली कुछ घरेलू उड़ानें भी रद्द की गईं या उनका मार्ग बदल दिया गया।
सरकार बोली, यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहले
परिवहन मंत्रालय के नागरिक उड्डयन महानिदेशक लुकमान एफ. लैसा (Lukman F. Laisa) ने कहा कि परिचालन से जुड़ा हर फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सरकार और नागरिक उड्डयन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उपग्रह तस्वीरों में दिखे राख के दो बड़े गुबार
इंडोनेशिया की ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसी और ऑस्ट्रेलिया के डार्विन वोल्केनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर (Darwin Volcanic Ash Advisory Centre) ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर ज्वालामुखी से निकले राख के दो बड़े गुबारों की पहचान की।
पहला राख का गुबार करीब 20,000 फुट की ऊंचाई तक पहुंचा और उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा। इसका असर जकार्ता, बैंटन (Banten), पश्चिमी जावा (West Java) और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में देखने को मिला।
वहीं, दूसरा राख का गुबार और भी ज्यादा ऊंचाई तक पहुंच गया। यह करीब 50,000 फुट की ऊंचाई तक गया और पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में फैलता चला गया। इस गुबार का असर बैंटन, लामपुंग और बेंगकुलु (Bengkulu) प्रांतों के कुछ हिस्सों, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य (Southern Sunda Strait) और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर (Indian Ocean) के कुछ इलाकों तक पहुंच गया।
फिलहाल, ज्वालामुखी विस्फोट में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सबसे नजदीकी आबादी को हटाने का कोई आदेश भी जारी नहीं किया गया है। लेकिन राख के तेजी से फैलने और हवाई यात्रा पर पड़े बड़े असर को देखते हुए संबंधित एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ानों के संचालन से जुड़े फैसले स्थिति के हिसाब से लिए जा रहे हैं।


