पाकिस्तान में तख्तापलट की आहट? समझें आसिम मुनीर के हाथ पूरी सैन्य ताकत आने से कैसे पलटेगा खेल

Pakistan Coup: पाकिस्तान में नए रक्षा कानून के बाद आसिम मुनीर की सैन्य शक्तियां बढ़ गई हैं। सेना, नौसेना, वायुसेना और रणनीतिक कमान पर बढ़े अधिकारों के बीच तख्तापलट की चर्चा तेज है।

Alakha Singh
Published on: 24 Aug 2026 9:13 PM IST (Updated on: 24 Aug 2026 9:20 PM IST)
पाकिस्तान में तख्तापलट की आहट? समझें आसिम मुनीर के हाथ पूरी सैन्य ताकत आने से कैसे पलटेगा खेल
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Asim Munir Coup, Pakistan: पाकिस्तान में सेना और सत्ता के रिश्ते हमेशा से बेहद संवेदनशील रहे हैं। देश के इतिहास में अयूब खान, जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ जैसे सैन्य शासक लोकतांत्रिक सरकारों को हटाकर सत्ता अपने हाथों में ले चुके हैं। अब एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति में सेना की बढ़ती ताकत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह हैं पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर।

नई रक्षा व्यवस्था के तहत आसिम मुनीर को पाकिस्तान की तीनों सेनाओं से जुड़े मामलों में बेहद व्यापक अधिकार मिल गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक प्रभाव फिर उस मुकाम पर पहुंच रहा है, जहां लोकतांत्रिक सरकार के ऊपर सैन्य नेतृत्व हावी हो सकता है?

CDF आसिम मुनीर को मिले बड़े अधिकार

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने 20 अगस्त 2026 को Defence Forces Act, 2026 और National Command Authority Act, 2010 में संशोधन को मंजूरी दी। इन बदलावों के बाद CDF का पद पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था में बेहद शक्तिशाली हो गया है।

कानून के तहत CDF को सशस्त्र बलों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के संबंध में कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। वह किसी व्यक्ति को रिटायर, डिस्चार्ज या सेवा में बनाए रखने से जुड़े फैसले ले सकता है। जरूरत पड़ने पर निर्धारित रिटायरमेंट उम्र या सेवा अवधि में छूट देने का अधिकार भी CDF को दिया गया है।

यानी सैन्य अधिकारियों के करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में अब CDF की भूमिका बेहद अहम हो गई है।

सेना, नौसेना और वायुसेना पर बढ़ी पकड़

आसिम मुनीर की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एक साथ पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज हैं।

नई व्यवस्था के तहत CDF के पास सेना की कमान के साथ-साथ नौसेना और वायुसेना के ऑपरेशनल मामलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा पाकिस्तान की रणनीतिक और परमाणु कमान से जुड़े मामलों में भी वह शीर्ष सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाते हैं।

इसका मतलब है कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत का बड़ा हिस्सा एक ही पद के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है।

27वें संविधान संशोधन ने बदली पूरी सैन्य व्यवस्था

आसिम मुनीर को मिले इन अधिकारों की नींव नवंबर 2025 में हुए पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन में रखी गई थी।

इस संशोधन के जरिए लंबे समय से मौजूद Chairman, Joint Chiefs of Staff Committee (CJCSC) का पद खत्म कर दिया गया और उसकी जगह Chief of Defence Forces का नया पद बनाया गया।

खास बात यह है कि CDF का पद पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ ही जुड़ा हुआ है। आसिम मुनीर इस नई व्यवस्था के तहत पाकिस्तान के पहले CDF बने।

इसके बाद सैन्य कमान की संरचना में सेना प्रमुख की भूमिका और मजबूत हो गई।

क्या शहबाज सरकार पर मंडरा रहा है खतरा?

यहीं से पाकिस्तान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल उठता है—क्या यह सैन्य शक्तियों का केंद्रीकरण भविष्य में लोकतांत्रिक सरकार के लिए चुनौती बन सकता है?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान में तख्तापलट होने जा रहा है। नए कानून अपने आप में किसी सैन्य तख्तापलट की घोषणा नहीं हैं। लेकिन इनसे यह जरूर साफ होता है कि पाकिस्तान की सैन्य कमान को संस्थागत रूप से पहले की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाया गया है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने इन कानूनों को मंजूरी दी है। हालांकि संसद में इसे लेकर विपक्ष और सहयोगी दलों की ओर से सवाल भी उठे। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कानून लाने के तरीके पर आपत्ति जताई, हालांकि अंततः उनकी पार्टी के सांसदों ने विधेयकों के पक्ष में मतदान किया।

न्यूक्लियर कमांड से लेकर अधिकारियों की नियुक्ति तक प्रभाव

नई व्यवस्था का सबसे संवेदनशील पहलू पाकिस्तान की रणनीतिक और परमाणु कमान से जुड़ा है। CDF को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में केंद्रीय सैन्य भूमिका हासिल है।

इसके अलावा नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर की नियुक्ति में भी CDF की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नियुक्ति करते हैं, लेकिन प्रक्रिया में CDF की सिफारिश को विशेष महत्व दिया गया है।

इससे पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य सत्ता के बीच संतुलन को लेकर बहस और तेज हो सकती है।

इमरान खान से ‘सीक्रेट डील’ का दावा कितना सच?

सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में आसिम मुनीर और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच कथित संपर्क या किसी ‘सीक्रेट डील’ के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि उपलब्ध जानकारी में ऐसी किसी गुप्त डील की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए शहबाज शरीफ को हटाने के लिए आसिम मुनीर और इमरान खान के बीच किसी समझौते को फिलहाल दावे से आगे बढ़कर तथ्य नहीं माना जा सकता।

असल मुद्दा फिलहाल यह है कि पाकिस्तान में सैन्य कमान को जिस तरह नए कानूनी अधिकार दिए गए हैं, उससे सेना की संस्थागत ताकत निश्चित तौर पर बढ़ी है।

तख्तापलट की आहट या मजबूत सैन्य सिस्टम?

पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए यह सवाल स्वाभाविक है। अयूब खान, जिया-उल-हक और मुशर्रफ के दौर ने यह दिखाया है कि पाकिस्तान में सेना सिर्फ सीमा की रक्षा करने वाली संस्था नहीं रही, बल्कि कई बार सीधे सत्ता के केंद्र में भी आ चुकी है।

लेकिन मौजूदा हालात को सीधे तख्तापलट कहना फिलहाल सही नहीं होगा। ज्यादा सटीक तस्वीर यह है कि आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान की सैन्य कमान को संवैधानिक और कानूनी ढांचे के भीतर असाधारण रूप से व्यापक अधिकार दिए गए हैं।

अब बड़ा सवाल यह होगा कि इन अधिकारों का इस्तेमाल केवल सैन्य प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित रहता है या आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीति पर भी इसका असर दिखाई देता है।

यही तय करेगा कि पाकिस्तान में यह सिर्फ सैन्य सुधार है या सत्ता के समीकरण में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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