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August 12, 2026: आसमान में 12 अगस्त को दिखेगा अद्भुत नजारा, 24 घंटे में होंगी 3 बड़ी खगोलीय घटनाएं
August 12, 2026:12 अगस्त 2026 को सुबह छह ग्रहों की कतार, दिन में पूर्ण सूर्यग्रहण और रात में पर्सिड उल्का बौछार का पीक देखने को मिलेगा। हालांकि भारत में सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा।
August 12, 2026: Three Major Astronomical Events to Light Up the Sky
August 12, 2026: 12 अगस्त 2026 की तारीख खगोल विज्ञान में दिलचस्प घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाली है। सूर्योदय से पहले आसमान में छह ग्रहों की कतार नजर आएगी, दिन में दुनिया के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्यग्रहण होगा और रात होते-होते पर्सिड उल्का बौछार अपने चरम पर पहुंच जाएगी। खास बात यह है कि सूर्यग्रहण और उल्का बौछार का पीक एक ही अमावस्या के आसपास पड़ रहा है। जिससे रात का आसमान उल्काओं को देखने के लिए बेहद अनुकूल रहेगा।
खगोल प्रेमियों के लिए 12 अगस्त का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि सुबह से रात तक आसमान का नजारा लगातार बदलता रहेगा। जबकि भारत में इस पूरे घटनाक्रम की स्थिति थोड़ी अलग होगी। सूर्यग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, लेकिन पर्सिड उल्का बौछार और ग्रहों की स्थिति को देखने का मौका मिल सकता है।
सूर्योदय से पहले छह ग्रहों की कतार पर रहेगी नजर
12 अगस्त की सुबह सूरज निकलने से पहले पूर्वी आसमान में छह ग्रह एक साथ दिखाई देने की स्थिति में होंगे। इनमें बुध, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून शामिल हैं। इसे आम तौर पर 'प्लैनेटरी अलाइनमेंट' या ग्रहों की कतार कहा जा रहा है। लेकिन यह सभी छह ग्रह नंगी आंखों से आसानी से दिखाई नहीं देंगे। जबकि मंगल और शनि अपेक्षाकृत आसानी से देखे जा सकते हैं। बुध और बृहस्पति क्षितिज के काफी करीब होंगे, इसलिए साफ और खुले क्षितिज की जरूरत पड़ेगी। यूरेनस को देखने के लिए बाइनोकुलर और नेपच्यून के लिए टेलिस्कोप ज्यादा उपयोगी रहेगा। यानी सोशल मीडिया पर दिखने वाली किसी तस्वीर की तरह छह चमकीले ग्रह एकदम पास-पास खड़े नजर नहीं आएंगे। वे आकाश में अलग-अलग जगहों पर एक काल्पनिक रेखा के आसपास दिखाई देंगे।
दिन में होगा 2026 का पूर्ण सूर्यग्रहण
इसके बाद 12 अगस्त को साल का सबसे बड़ा खगोलीय आकर्षण यानी पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। NASA के मुताबिक ग्रहण की पूर्णता की पट्टी ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरेगी। उत्तरी अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा। पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य के चमकीले हिस्से को पूरी तरह ढक देगा। इस दौरान सूर्य का बाहरी वातावरण यानी कोरोना दिखाई दे सकता है। NASA के अनुसार अधिकांश स्थानों पर पूर्णता दो मिनट से कम समय तक रहेगी, जबकि ग्रहण की केंद्रीय पट्टी के कुछ हिस्सों में यह अवधि दो मिनट से कुछ अधिक हो सकती है।
भारत में नहीं दिखेगा सूर्यग्रहण
भारतीय दर्शकों के लिए यह मायूस करने वालीएक बात हो सकती है। क्योंकि 12 अगस्त को सूर्यग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। IMD के आधिकारिक दस्तावेज में भी इसे 'Not Visible in India' बताया गया है। इसकी वजह यह है कि जब ग्रहण भारत के समय के अनुसार हो रहा होगा, तब भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे होगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोग इसे सीधे आसमान में देखने की कोशिश न करें। ग्रहण को लाइव स्ट्रीम या अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं के प्रसारण के जरिए देखा जा सकता है।
रात में होगी पर्सिड उल्का बौछार
दिन का ग्रहण खत्म होने के बाद 12 और 13 अगस्त की रात आसमान एक और खूबसूरत नजारा दिखाएगा। इस दौरान पर्सिड उल्का बौछार अपने पीक पर होगी। यह उल्का बौछार हर साल जुलाई से अगस्त के बीच दिखाई देती है और इसका संबंध 109P/Swift-Tuttle धूमकेतु से है। पृथ्वी जब इस धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल और छोटे कणों के रास्ते से गुजरती है, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश कर जलने लगते हैं और हमें 'टूटते तारों' जैसी चमकती लकीरें दिखाई देती हैं। सामान्य परिस्थितियों में पर्सिड्स की दर करीब 60 से 100 उल्काएं प्रति घंटे तक बताई जाती है। हालांकि 2026 में इंटरनेशनल मेटियर ऑर्गनाइजेशन के अनुमान के मुताबिक वास्तविक दर करीब 30 से 50 उल्काओं प्रति घंटे के आसपास रह सकती है। क्योंकि इस साल पृथ्वी उल्कीय मलबे की अपेक्षाकृत विरल पट्टी से गुजरने वाली है।
अमावस्या बनाएगी रात के आसमान को और बेहतर
इस साल पर्सिड्स के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि इसका पीक अमावस्या के आसपास पड़ रहा है। चांदनी नहीं होने के कारण आसमान अपेक्षाकृत ज्यादा अंधेरा रहेगा और हल्की चमक वाली उल्काओं को देखने की संभावना बढ़ जाएगी। आम तौर पर उल्का बौछार देखते समय सबसे बड़ी दिक्कत चांद की रोशनी होती है, लेकिन इस बार वह बाधा काफी कम रहेगी। उल्काएं केवल सिर के ऊपर एक खास हिस्से में नहीं दिखेंगी। वे पूरे आसमान में अलग-अलग दिशाओं में चमकती हुई दिखाई दे सकती हैं। शहरों की तेज रोशनी से दूर, खुले और अंधेरे स्थान से इन्हें देखना ज्यादा बेहतर रहेगा।
12 अगस्त क्यों है इतना खास?
असल दिलचस्पी इसी संयोग में है। एक ही तारीख के आसपास सुबह ग्रहों की कतार, दिन में पूर्ण सूर्यग्रहण और रात में पर्सिड उल्का बौछार का चरम देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से ये घटनाएं एक-दूसरे की वजह से नहीं हो रही हैं, लेकिन उनका कैलेंडर पर एक साथ आ जाना इसे बेहद दिलचस्प खगोलीय संयोग जरूर बना रहा है।


