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खत्म हुआ सस्पेंस! अयातुल्लाह के बेटे मोज्तबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर?
Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान में नए सुप्रीम लीडर को लेकर अटकलें तेज हैं। अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोज्तबा खामेनेई के नाम की चर्चा जोरों पर है।
Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान की सत्ता के गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल गूंज रहा है कि देश का अगला सुप्रीम लीडर कौन? टीवी चैनलों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेजी से चल रही खबरों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। कहा जा रहा है कि अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोज्तबा खामेनेई ने यह जिम्मेदारी संभाल ली है। हालांकि आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है, लेकिन चर्चाएं तेज हैं और अटकलों का बाजार गर्म है।
सुप्रीम लीडर की कुर्सी पर मोज्तबा?
बताया जा रहा है कि 56 वर्षीय मोज्तबा, खामेनेई के दूसरे बड़े बेटे हैं। लंबे समय से उन्हें सत्ता के बेहद करीब माना जाता रहा है। भले ही उन्होंने कभी कोई औपचारिक पद नहीं संभाला, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी मजबूत पकड़ की चर्चा होती रही है। अगर यह खबर सही साबित होती है, तो यह ईरान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि वहां धार्मिक नेतृत्व को विरासत में मिलना आम परंपरा नहीं मानी जाती।
संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय निवेश
मोज्तबा की संपत्ति को लेकर भी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। साल 2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इसके बावजूद उनके अंतरराष्ट्रीय निवेश की चर्चा होती रही है। रिपोर्टों के मुताबिक पश्चिमी बाजारों में उन्होंने अरबों डॉलर का निवेश किया है। उनकी सटीक नेट वर्थ सार्वजनिक नहीं है, पर कहा जाता है कि उनके पास कई करोड़ की संपत्ति और एक बड़ा निवेश साम्राज्य है। स्विस बैंक खातों और ब्रिटेन में लग्जरी प्रॉपर्टी की खबरों ने उनकी आर्थिक ताकत को और चर्चा में ला दिया है।
परिवार और निजी जिंदगी
मोज्तबा की शादी जहरा हदद-अब्देल से हुई थी, जो एक प्रभावशाली ईरानी नेता के परिवार से आती हैं। बताया जाता है कि उनकी शादी 2004 में हुई और उनके तीन बच्चे हैं, हालांकि इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं है। कुछ रिपोर्टों में उनकी पत्नी की मौत की भी खबरें आई हैं, लेकिन इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिवॉल्यूशनरी गार्ड का समर्थन
माना जाता है कि मोज्तबा के ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर से मजबूत संबंध हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उन्हें चुना है, हालांकि इस फैसले पर दबाव की चर्चाएं भी हैं। अगर मोज्तबा सच में सुप्रीम लीडर बनते हैं, तो यह न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल, दुनिया की नजर तेहरान पर टिकी हुई है।


