China Support Russia: चीन और रूस बदल रहे हैं बाल्टिक देशों की रणनीति, अमेरिकी सीनेटरों की चेतावनी

China Support Russia: बाल्टिक देशों ने चीन के रूस समर्थन को देखते हुए अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है।

Newstrack/IANS
Published on: 15 May 2026 12:58 PM IST
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China Support Russia: अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटरों और राज्य विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रूस की युद्ध मशीन के लिए चीन का बढ़ता समर्थन बाल्टिक देशों के बीजिंग को देखने के नजरिए को तेजी से बदल रहा है। लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया अब चीन के साथ आर्थिक संबंधों को यूक्रेन युद्ध से सीधे जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।

बाल्टिक सुरक्षा पर हाउस फॉरेन अफेयर्स सब-कमेटी की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा बार-बार उठा। लॉमेकर्स ने नाटो के तीन फ्रंटलाइन देशों को रूस के खतरे और यूरोप में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक बताया। बता दें कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद रूस से स्वतंत्रता हासिल करने वाले देशों को बाल्टिक देश कहा जाता है। बाल्टिक सागर के पूर्वी तट पर स्थित एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया को बाल्टिक देश कहा जाता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के उप सहायक सचिव क्रिस्टोफर स्मिथ ने कहा कि बाल्टिक सरकारें रूस के रक्षा क्षेत्र को चीन के समर्थन की वजह से बीजिंग के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंधों पर फिर से विचार कर रही हैं। स्मिथ ने लॉमेकर्स से कहा, “चीन, रूस के रक्षा औद्योगिक ढांचे के लिए लगभग 80 फीसदी डुअल यूज सामान उपलब्ध कराता है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाल्टिक देश इससे सबक लेते हुए चीन के साथ अपने आर्थिक संबंधों को सीमित कर रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पूरे यूरोप में यह चिंता बढ़ रही है कि यूक्रेन युद्ध चौथे साल में भी जारी है और चीन, रूस के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी लाइफलाइन बन गया है।

रैंकिंग मेंबर रिप्रेजेंटेटिव विलियम कीटिंग ने कहा कि चीन यूक्रेन संघर्ष पर गहराई से नजर बनाए हुए हैं और देख रहा है कि नाटो अपनी पूर्वी सीमा पर कैसे जवाब देता है।

कीटिंग ने कहा, “चीन को लेकर हमारी रणनीतिक नीति उसे सीमित करने की है।” यह बयान उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें पूछा गया था कि क्या बीजिंग ताइवान को लेकर अपनी रणनीति बनाते समय यूक्रेन और बाल्टिक देशों में हो रहे घटनाक्रमों का विश्लेषण कर रहा है। इस पर सहमति जताते हुए स्मिथ ने कहा कि चीन निश्चित रूप से यूक्रेन युद्ध का गहराई से अध्ययन कर रहा है।

रिपब्लिकन सीनेटरों ने इस इलाके में चीन के असर वाले कामों और आर्थिक दबाव को लेकर भी चिंता जताई। प्रतिनिधि यंग किम ने 2021 में ताइवान को “ताइवानीज” नाम से एक रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलने की इजाजत देने के लिथुआनिया के फैसले पर जोर दिया। इस कदम पर बीजिंग ने तीखा जवाब दिया।

किम ने पूछा कि क्या लिथुआनिया के नेताओं की चीन के साथ संबंध फिर से शुरू करने की हालिया टिप्पणियों के बाद लिथुआनिया अपना रुख नरम कर रहा है। स्मिथ ने जवाब दिया कि लिथुआनिया यूरोप के अंदर चीन के आर्थिक दबाव के खिलाफ एक बड़ी आवाज बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि बाल्टिक देश, जैसा कि वे चीन के साथ अपने संबंधों को देखते हैं, वे यूक्रेन में रूस के लिए चीन के समर्थन को बहुत ध्यान से देख रहे हैं।”

दोनों पार्टियों के सीनेटरों ने एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया को मॉडल सहयोगी बताया। इन्होंने नाटो के रक्षा खर्च के लक्ष्यों को पार कर लिया है, जबकि यूक्रेन को मिलिट्री और राजनीतिक रूप से जोरदार तरीके से सपोर्ट किया है।

स्मिथ ने कहा कि बाल्टिक देशों ने पहले ही कम्युनिकेशन सिस्टम से कई चीनी पार्ट्स हटा दिए हैं और सुरक्षित सप्लाई चेन पर अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। रिपब्लिकन प्रतिनिधि रैंडी फाइन ने कहा कि चीन इन देशों का भी दुश्मन बन रहा है, भले ही यह बहुत, बहुत दूर लग सकता है।

बाल्टिक देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा रहे थे और 2004 में नाटो में शामिल हुए थे। 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने के हमले के बाद से ये देश कीव के सबसे मजबूत समर्थकों में शामिल रहे हैं। लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया ने अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा यूक्रेन की मदद में दिया है और सैन्य खर्च में भी काफी बढ़ोतरी की है। इन देशों को आशंका है कि रूस नाटो के पूर्वी हिस्से पर दबाव बढ़ा सकता है।

Akriti Pandey

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