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पाकिस्तान की हेकड़ी से सबक! तीस्ता नदी पर भारत से कोई टेंशन नहीं लेना चाहता बांग्लादेश, जानिए कितना है अहम
बांग्लादेश का कहना है कि तीस्ता पर समाधान जरूरी है, लेकिन वह भारत के साथ दोस्ताना संबंध भी बनाए रखना चाहता है।
India-Bangladesh, Teesta River: भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे तीस्ता नदी जल बंटवारे के विवाद के बीच वहां की सरकार ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर भारत के साथ अपने रिश्तों में खटास नहीं चाहता। बांग्लादेश का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब सिंधु जल समझौता भारत की ओर से निरस्त करने के बाद पाकिस्तान की हालत खराब हुई।
बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा कि भारत उसका मित्र देश है और तीस्ता के मामले में दोनों देशों को एक-दूसरे के हितों को ध्यान में रखना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश चीन की मदद से तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
दशकों से अटका हुआ है तीस्ता जल समझौता
तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है और भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश पहुंचती है। वहां यह नदी जमुना नदी में मिल जाती है। बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में खेती और लोगों की आजीविका के लिए तीस्ता बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी इसके पानी का इस्तेमाल सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए किया जाता है। दोनों देशों के बीच तीस्ता के पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत 1980 के दशक से जारी है।
चीन की एंट्री से बढ़ी भारत-बांग्लादेश में टेंशन
अब तीस्ता नदी का मुद्दा सिर्फ पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं रह गया है। बांग्लादेश चीन की मदद से तीस्ता नदी के पुनरुद्धार और प्रबंधन से जुड़ी परियोजना पर काम करना चाहता है। जून में बीजिंग दौरे के दौरान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीनी नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की थी।
चीन की संभावित भूमिका ने इस परियोजना को रणनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। उत्तरी बांग्लादेश का इलाका भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब है। यही संकरा भू-भाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है और चीन की विस्तारवादी निगाहें अक्सर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बॉर्डर पर रही है। इसे लेकर भी भारत विरोध जाहिर करता रहा है।
गंगा समझौते से अलग है तीस्ता विवाद
तीस्ता जल बंटवारे का मामला भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुए गंगा जल समझौते से अलग है। गंगा समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है और दोनों देश उसके भविष्य को लेकर भी बातचीत कर रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां शेयर हैं।
बांग्लादेश के लिए कितना अहम है तीस्ता नदी?
तीस्ता नदी बांग्लादेश के लिए बहुत अहम है। खासकर देश के उत्तरी हिस्से के लिए यह नदी खेती, पानी और लोगों की रोजी-रोटी का बड़ा आधार है।
खेती के लिए जरूरी: उत्तरी बांग्लादेश के कई इलाकों में सिंचाई के लिए तीस्ता के पानी पर काफी निर्भरता है। पानी की उपलब्धता सीधे किसानों की फसल और आमदनी को प्रभावित करती है।
लाखों लोगों की आजीविका: नदी के आसपास रहने वाले लोगों की खेती, मछली पालन और दूसरे स्थानीय काम तीस्ता से जुड़े हैं।
सुखाड़ में वरदान: मानसून में ज्यादा पानी आने पर बाढ़ और नदी कटाव की समस्या बढ़ती है, जबकि सूखे मौसम में पानी कम होने से सिंचाई प्रभावित होती है। तीस्ता के बेहतर प्रबंधन से दोनों समस्याओं को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
सीधे शब्दों में कहें तो बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से के लिए तीस्ता सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि खेती, पानी, रोजगार और करोड़ों लोगों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा संसाधन है। इसी वजह से तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा बांग्लादेश के लिए इतना संवेदनशील है।


