भारत का दुश्मन था खामेनेई? कश्मीर से दिल्ली दंगों तक ज़हर उगलने वाले ईरानी 'सुप्रीम लीडर' का अंत

Khamenei Anti-India History: भारत का दुश्मन था खामेनेई?" कश्मीर, CAA और दिल्ली दंगों पर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले ईरानी नेता का अंत। जानें क्यों भारत ने उन्हें बार-बार सुनाई खरी-खोटी।

Harsh Sharma
Published on: 3 March 2026 5:51 PM IST
भारत का दुश्मन था खामेनेई? कश्मीर से दिल्ली दंगों तक ज़हर उगलने वाले ईरानी सुप्रीम लीडर का अंत
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Khamenei Anti-India History: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने पूरी दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। जहाँ एक ओर रूस और पाकिस्तान जैसे देश शोक मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर उन बयानों की चर्चा तेज़ हो गई है जो खामेनेई ने भारत के खिलाफ दिए थे। क्या आप जानते हैं कि जिस खामेनेई की मौत पर आज मातम मनाया जा रहा है, वही शख्स सालों से भारत के आंतरिक मामलों में आग लगाने की कोशिश कर रहा था? कश्मीर में अलगाववाद को हवा देने से लेकर दिल्ली के दंगों पर 'हिंदू चरमपंथ' का लेबल लगाने तक, खामेनेई ने कभी भी भारत का अपमान करने का मौका नहीं छोड़ा। आज उनकी मौत के बाद भारत के कूटनीतिक गलियारों में एक पुरानी फाइल फिर से खुल गई है।

भारत के खिलाफ खामेनेई का 'हथियार

अयातुल्ला अली खामेनेई ने पिछले सात सालों में एक-दो बार नहीं बल्कि बार-बार भारत की संप्रभुता को चुनौती दी। 2017 में उन्होंने कश्मीर के मुसलमानों के नाम पर पूरी दुनिया को एकजुट होने की अपील की, जो कि सीधे तौर पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का समर्थन था। इतना ही नहीं, जब 2019 में अनुच्छेद 370 हटा, तब भी उन्होंने भारत को 'न्यायपूर्ण नीति' की नसीहत दे डाली। खामेनेई की नफरत का सबसे वीभत्स चेहरा 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान दिखा, जब उन्होंने ट्वीट कर हिंदुओं को 'चरमपंथी' बताया और दुनिया भर के मुसलमानों से भारत के खिलाफ खड़े होने को कहा। उन्होंने बकायदा #IndianMuslimsInDanger जैसे हैशटैग चलाकर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की साजिश रची थी, जिसका भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने हर बार ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा जवाब दिया।

कांग्रेस बनाम भाजपा

खामेनेई की मौत के बाद भारत की पुरानी कूटनीतिक चालों पर भी बहस छिड़ गई है। अक्सर लोग मोदी सरकार को ईरान विरोधी मानते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी कहते हैं। 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में तीन बार (2005, 2006 और 2009) ईरान के खिलाफ वोट किया था। यह वह समय था जब भारत अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील कर रहा था और कई अमेरिकी अधिकारियों ने बाद में माना था कि भारत से ये वोट 'जबरदस्ती' करवाए गए थे। इसके विपरीत, 2022 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ईरान के खिलाफ वोट करने के बजाय 'अब्स्टेन' (मतदान से दूर रहना) किया, जो भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का बड़ा प्रमाण है।

खामेनेई की मौत पर दुनिया का बंटवारा और भारत का रुख

खामेनेई की मौत के बाद इस्लामिक दुनिया का असली चेहरा भी सामने आ गया है। जहाँ ओआईसी (OIC) के 57 सदस्य देशों में से केवल 10 ने ही उनकी मौत पर शोक जताया, वहीं सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रभावशाली देश खामोश रहे। इसकी बड़ी वजह यह है कि खामेनेई का ईरान लगातार अपने पड़ोसी मुस्लिम देशों पर मिसाइल हमले कर रहा था। भारत के लिए यह तनाव इसलिए चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी देशों में 90 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं। भारत ने हमेशा शांति और संवाद की बात की है, लेकिन खामेनेई के उन बयानों को भूलना मुश्किल है जहाँ उन्होंने भारत को म्यांमार और गाजा की श्रेणी में खड़ा कर दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में उनके ऐसे ही एक ट्वीट को 'अस्वीकार्य' बताया था।

क्या खामेनेई के बाद बदलेंगे भारत-ईरान संबंध?

ईरान में अब सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। लेकिन एक बात साफ है कि खामेनेई के शासनकाल में भारत-ईरान संबंधों में 'धार्मिक हस्तक्षेप' का जो कांटा चुभ रहा था, वह अब खत्म हो सकता है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश के साथ दोस्ती चाहता है, लेकिन अपने घरेलू मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं करेगा। खामेनेई के अंत के बाद अब देखना होगा कि ईरान का नया नेतृत्व भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी पर ध्यान देता है या फिर पुराने 'धार्मिक कट्टरपंथ' की राह पर चलता है। फिलहाल, भारत संयम और कूटनीतिक सतर्कता के साथ इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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