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चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ा! TRF को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने पर शहबाज शरीफ बौखलाए, बीजिंग ने भी किया समर्थन
China supports US: चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ते हुए, अमेरिका के पहलागाम हमले के आतंकियों को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने के फैसले का समर्थन किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर बौखलाए हुए हैं।
China left Pakistan Shahbaz Sharif angry after TRF declared global terrorist organization Beijing also supported it
China supports US: अमेरिका द्वारा पहलागाम हमले के आतंकियों को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने से पाकिस्तान बुरी तरह परेशान हो गया है। अमेरिका ने एक दिन पहले ही पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) को वैश्विक आतंकवादी संगठन के तौर पर मान्यता दी। अब, चीन ने भी अमेरिका के इस कदम को सही बताया, जिससे पाकिस्तान को और बड़ा झटका लगा है। इस फैसले से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर को भी तगड़ा नुकसान हुआ है, जो पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच कर चुके थे।
पाकिस्तान बौखलाया
पाकिस्तान ने अमेरिका के कदम के बाद टीआरएफ (The Resistance Front) और लश्कर-ए-तैयबा के बीच किसी भी संबंध को नकारा है। पाकिस्तान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने अपने देश में मौजूद आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसके साथ ही, उसने पहलगाम हमले को लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने की किसी भी कोशिश को सिरे से खारिज किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हमने आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क को व्यापक रूप से समाप्त किया है। उनके सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।"
अमेरिका से सख्त कदम की उम्मीद नहीं थी
पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच करने के बाद यह उम्मीद नहीं थी कि अमेरिका इतना सख्त कदम उठा सकता है। लेकिन अब अमेरिका के इस फैसले से पाकिस्तान काफी परेशान हो गया है। पाकिस्तान ने विदेश मंत्रालय के बयान में कहा, "पहलगाम आतंकी हमले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है, और इसे किसी प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ना पूरी तरह गलत है। पाकिस्तान ने अमेरिका के फैसले पर सीधे टिप्पणी करने से तो बचा, लेकिन संकेत दिए कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस दिशा में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कदम उठाए हैं।
पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय दबाव में फंसने की स्थिति
पाकिस्तान का यह कदम, आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में प्रतिबद्ध होने का दावा करना, अब उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। जब अमेरिका और चीन जैसे बड़े देश पाकिस्तान के कदमों को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं, तो यह साफ हो रहा है कि पाकिस्तान को आतंकवाद को लेकर अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी साख को फिर से बना सके।
चीन का समर्थन
हालांकि, चीन ने अमेरिका के इस कदम को सही बताया, लेकिन पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बहुत असहज हो गई है। पाकिस्तान के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय दबाव और अपनी छवि को बनाए रखने के बीच वह संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। अब यह देखना होगा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को कैसे आगे बढ़ाता है और वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विश्वास को फिर से कैसे जीतता है। इस फैसले ने पाकिस्तान को विकट स्थिति में डाल दिया है, और यह वक्त पाकिस्तान के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करने का है।


