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चीन की नई चालबाजी! रडार को चकमा देने वाला बनाया एंटी-शिप क्रूज मिसाइल YJ-18A, भारत के लिए एक नई चुनौती
चीन ने कथित तौर पर काली रडार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग वाली नई एंटी-शिप क्रूज मिसाइल का समुद्र में परीक्षण किया है।
China Anti-Ship Missile, YJ-18A: चीन ने अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक नए एंटी-शिप क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल पर काले रंग की ऐसी कोटिंग की गई है, जो रडार की तरंगों को सोखने में मदद करती है। माना जा रहा है कि इसका मकसद मिसाइल को दुश्मन के रडार से बचाकर उसके युद्धपोतों तक पहुंचाना है। ऐसे में भारत के लिए इसका तोड़ निकालना एक नई चुनौती है।
समुद्र में किया गया मिसाइल का टेस्ट
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने इस नए मिसाइल का परीक्षण समुद्र के एक अज्ञात इलाके में किया। इसे चीनी नौसेना के एक युद्धपोत पर लगे वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से दागा गया। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने पिछले शनिवार को इस परीक्षण से जुड़ा वीडियो भी जारी किया था, जिसमें मिसाइल का काला रंग साफ दिखाई दे रहा था।
हांगकांग के अखबार South China Morning Post ने सैन्य विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि यह मिसाइल YJ-18A का नया वेरिएंट हो सकती है। हालांकि, चीन ने सार्वजनिक तौर पर इसकी पूरी तकनीकी जानकारी सामने नहीं रखी है।
काली कोटिंग क्यों है खास?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मिसाइल पर की गई काली कोटिंग सिर्फ उसे अलग दिखाने के लिए नहीं है। इसे रडार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग माना जा रहा है। इसका काम दुश्मन के रडार से आने वाली रेडियो तरंगों को ज्यादा से ज्यादा सोखना और वापस जाने वाले सिग्नल को कम करना है। इससे दुश्मन के रडार के लिए मिसाइल को पहचानना और उसकी सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
चीनी सैन्य विशेषज्ञ सॉन्ग झोंगपिंग के मुताबिक, काले रंग का एक दूसरा फायदा भी हो सकता है। गहरे समुद्र का पानी कई बार काफी गहरा और लगभग काला दिखाई देता है। ऐसे में समुद्र की सतह के करीब उड़ने वाली मिसाइल को काला रंग कुछ हद तक दृश्य रूप से छिपाने में भी मदद कर सकता है।
YJ-18A की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
YJ-18A को चीन की प्रमुख एंटी-शिप मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी खासियत यह बताई जाती है कि यह अपने सफर के बड़े हिस्से में सबसोनिक गति से आगे बढ़ती है, लेकिन लक्ष्य के करीब पहुंचने पर अचानक सुपरसोनिक गति पकड़ सकती है।
यानी दुश्मन के जहाज को मिसाइल का पता चल जाने के बाद भी उसके पास प्रतिक्रिया करने के लिए बहुत कम समय बच सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, YJ-18A को चीन के Type 052D और Type 055 जैसे आधुनिक विध्वंसक युद्धपोतों पर तैनात किया जाता है। ये दोनों चीन की नौसेना के बेहद महत्वपूर्ण सतही युद्धपोत हैं।
लक्ष्य के करीब पहुंचते ही बढ़ जाती है रफ्तार
चीन की सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, मूल YJ-18 की अनुमानित रेंज करीब 540 किलोमीटर बताई जाती है। इसकी क्रूजिंग स्पीड लगभग 966 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है, जबकि लक्ष्य के करीब पहुंचने पर यह करीब Mach 3 की रफ्तार तक जा सकती है।
Mach 3 का मतलब आवाज की गति से करीब तीन गुना रफ्तार है। इतनी तेज गति में लक्ष्य की ओर बढ़ने वाली मिसाइल को रोकना किसी भी युद्धपोत की एयर डिफेंस प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
चीन का फोकस सिर्फ स्पीड पर नहीं
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन अब मिसाइलों की ताकत बढ़ाने के लिए सिर्फ ज्यादा रफ्तार पर निर्भर नहीं रहना चाहता। उसकी कोशिश ऐसी तकनीक विकसित करने की है, जिसमें मिसाइल को रडार से छिपाने और जरूरत पड़ने पर बेहद तेज गति से हमला करने, दोनों क्षमताओं का इस्तेमाल किया जा सके।
यही वजह है कि नई मिसाइल की काली कोटिंग को लेकर काफी चर्चा हो रही है। अगर यह वास्तव में रडार-एब्जॉर्बिंग तकनीक है, तो यह मिसाइल की पहचान और ट्रैकिंग को कठिन बनाने की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है।
चीन लगातार बढ़ा रहा है स्टील्थ तकनीक
चीन पिछले कुछ वर्षों में अपनी सेना के अलग-अलग हिस्सों में स्टील्थ तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। लड़ाकू विमानों से लेकर ड्रोन और नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक में ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है, जिससे दुश्मन के सेंसर और रडार को चकमा दिया जा सके।
चीन छठी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान और नए स्टील्थ ड्रोन विकसित करने के साथ-साथ ऐसी तकनीक पर भी काम कर रहा है, जो दुश्मन के स्टील्थ विमानों का पता लगा सके।


