Daylight Saving Time क्या है? अमेरिका में घड़ियां बदलने की परंपरा क्यों हो सकती है खत्म

Daylight Saving Time Explained: भारत में DST क्यों नहीं लागू होता? जानिए Daylight Saving Time के पीछे का विज्ञान

Jyotsana Singh
Published on: 20 July 2026 1:54 PM IST (Updated on: 20 July 2026 1:54 PM IST)
Daylight Saving Time Explained
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Daylight Saving Time Explained: क्या आपने कभी सोचा है कि जब भारत में रात होती है तो अमेरिका में दिन क्यों होता है? या फिर अलग-अलग देशों में घड़ियां अलग-अलग समय क्यों दिखाती हैं? इसका जवाब धरती पर खींची गई काल्पनिक देशांतर रेखाओं (Longitude) और समय क्षेत्रों (Time Zones) में छिपा है। पूरी दुनिया का समय ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) और कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) के आधार पर तय किया जाता है। इसी वजह से भारत का समय इंग्लैंड से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। जबकि अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में भी अलग-अलग समय चलता है। यही कारण है कि दुनिया के कुछ देशों में साल में दो बार घड़ियों की सुइयां भी बदली जाती हैं, जिसे डेलाइट सेविंग टाइम (Daylight Saving Time-DST) कहा जाता है। अब अमेरिका इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में आइए आसान भाषा में समझते हैं कि दुनिया में समय कैसे तय होता है। डेलाइट सेविंग टाइम क्या है और इसका आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ता है।

दुनिया में समय कैसे तय होता है?

धरती अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है। इसी दौरान अलग-अलग हिस्सों में सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बदलता रहता है। यदि पूरी दुनिया में एक ही समय लागू कर दिया जाए तो कहीं आधी रात में सुबह के 8 बजे होंगे तो कहीं दोपहर में रात के 12 बजे। इसी समस्या के समाधान के लिए पृथ्वी को 360 देशांतर रेखाओं में बांटा गया और उन्हें 24 समय क्षेत्रों यानी टाइम जोन में विभाजित किया गया। प्रत्येक टाइम जोन लगभग 15 डिग्री देशांतर के बराबर होता है। उसमें एक घंटे का समय अंतर माना जाता है।

GMT और UTC क्या हैं?

दुनिया में समय की गणना का आधार इंग्लैंड के लंदन स्थित ग्रीनविच वेधशाला से गुजरने वाली शून्य डिग्री देशांतर रेखा है। इसे ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) कहा जाता है। आधुनिक समय प्रणाली में कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) को अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाता है। दुनिया के सभी देशों के समय की तुलना इसी मानक से की जाती है। भारत का समय UTC+5:30 है, यानी भारत GMT/UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे चलता है।

भारत का समय इंग्लैंड से 5 घंटे 30 मिनट आगे क्यों है?

भारत का मानक समय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के पास स्थित 82.5 डिग्री पूर्व देशांतर रेखा के आधार पर तय किया गया है। इसी वजह से पूरे देश में एक ही भारतीय मानक समय (IST) लागू होता है। चूंकि यह रेखा ग्रीनविच से 82.5 डिग्री पूर्व में है, इसलिए भारत का समय GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे रहता है।

डेलाइट सेविंग टाइम आखिर क्या है?

डेलाइट सेविंग टाइम यानी DST ऐसी व्यवस्था है जिसमें गर्मियों के दौरान घड़ियों को एक घंटा आगे कर दिया जाता है। ताकि शाम के समय अधिक प्राकृतिक रोशनी का उपयोग किया जा सके। जैसे ही सर्दियां शुरू होती हैं, घड़ियों को फिर एक घंटा पीछे कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को क्रमशः स्प्रिंग फॉरवर्ड और फॉल बैक कहा जाता है।

डेलाइट सेविंग टाइम की शुरुआत क्यों हुई थी?

इस व्यवस्था की शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऊर्जा बचाने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय बिजली और ईंधन की खपत कम करने के लिए सरकारों ने लोगों को दिन की प्राकृतिक रोशनी का अधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी इसका व्यापक उपयोग हुआ और बाद में अमेरिका सहित कई देशों ने इसे अपनी समय व्यवस्था का हिस्सा बना लिया।

अमेरिका में समय बदलने का नियम कैसे लागू होता है?

अमेरिका एक विशाल देश है, जहां कई टाइम जोन हैं। अधिकांश राज्यों में हर साल मार्च के दूसरे रविवार को घड़ियों को एक घंटा आगे कर दिया जाता है। जबकि नवंबर के पहले रविवार को उन्हें फिर एक घंटा पीछे कर दिया जाता है। हालांकि हवाई और एरिजोना के अधिकांश हिस्से इस व्यवस्था का पालन नहीं करते क्योंकि वहां इसकी जरूरत नहीं मानी जाती।

अमेरिका अब इसे खत्म क्यों करना चाहता है?

साल में दो बार समय बदलने की वजह से लोगों की जैविक घड़ी प्रभावित होती है। कई लोगों को नींद की समस्या होती है, बच्चों के स्कूल और कर्मचारियों की दिनचर्या बदल जाती है। उड़ानों, रेल सेवाओं, कारोबार और अंतरराष्ट्रीय बैठकों के समय में भी बदलाव करना पड़ता है। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए अमेरिका में सनशाइन प्रोटेक्शन एक्ट (Sunshine Protection Act) के जरिए इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग तेज हो गई है।

क्या डेलाइट सेविंग टाइम से वास्तव में फायदा होता है?

शुरुआत में माना जाता था कि इससे बिजली की बचत होगी क्योंकि शाम के समय कृत्रिम रोशनी कम इस्तेमाल करनी पड़ेगी। लेकिन आधुनिक दौर में एयर कंडीशनर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और 24 घंटे चलने वाले उद्योगों के कारण कई अध्ययनों में इसकी उपयोगिता पहले जैसी प्रभावी नहीं पाई गई। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ अब इसे समाप्त करने की वकालत कर रहे हैं।

भारत में डेलाइट सेविंग टाइम क्यों नहीं लागू होता?

भारत भूमध्य रेखा के अपेक्षाकृत करीब स्थित है। यहां पूरे साल दिन और रात की अवधि में बहुत अधिक अंतर नहीं आता। इसलिए घड़ियों का समय बदलने की जरूरत महसूस नहीं होती। यही कारण है कि भारत में पूरे वर्ष केवल भारतीय मानक समय (IST) लागू रहता है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है अमेरिका का फैसला?

अगर अमेरिका साल में दो बार घड़ियां बदलने की व्यवस्था खत्म कर देता है तो इसका असर केवल वहां तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार, शेयर बाजार, आईटी उद्योग, विमान सेवाओं, ऑनलाइन मीटिंग और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के कामकाज के समय में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत की आईटी कंपनियां और अमेरिकी ग्राहकों के साथ काम करने वाले कई उद्योग भी नए समय अंतर के अनुसार अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव कर सकते हैं।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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