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Donald Trump: ईरान डील पर ट्रंप का बड़ा बयान, होर्मुज स्ट्रेट से नाकाबंदी हटाने का दिया आदेश
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा होने का ऐलान किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाई जाएगी।
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Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि यूएस और ईरान ने एक डील पूरी कर ली है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म हो जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे महीनों की लड़ाई के बाद एक बड़ी कामयाबी बताया। इसकी वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर काफी बुरा असर पड़ा और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का डर पैदा कर दिया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई!”
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए क्यों अहम है?
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया का ध्यान होर्मुज स्ट्रेट पर था, जिससे दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। होर्मुज स्ट्रेट कई महीनों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव का केंद्र रहा है। शिपिंग में रुकावटों की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
अमेरिकी नाकाबंदी हटाने का आदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को फिर से खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी दे रहे हैं। उन्होंने लिखा, “मैं होर्मुज स्ट्रेट को टोल फ्री खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। इसके साथ ही, अमेरिका नेवल ब्लॉकेड को तुरंत हटाने जा रहा है। दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो।”
ट्रंप बोले- यह समझौता क्षेत्र में शांति लाएगा
एक दूसरे पोस्ट में, ट्रंप ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक डिप्लोमैटिक कामयाबी बताया। उन्होंने लिखा, “यह महान समझौता पूरे इलाके में शांति और सुरक्षा लाएगी। कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति बनाने की कोशिश की और मेरे सामने सभी विफल हो गए। इलाके के नेताओं को पहली बार ऐसा राष्ट्रपति मिला है जो उन्हें असली शांति पाने में मदद कर सकता है। शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए स्ट्रेट को खोले जाने के बाद, क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए दोनों दिशाओं में फिर से तेल का प्रवाह शुरू हो जाएगा!”
समझौते की शर्तों पर अभी भी सस्पेंस
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने समझौते की डिटेल्स नहीं बताईं और न ही व्हाइट हाउस की तरफ से डील से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी साझा की गई है। व्हाइट हाउस की पोस्ट में उन प्रमुख मुद्दों का जिक्र नहीं किया गया, जो लंबे समय से वाशिंगटन और तेहरान के बीच मतभेदों की वजह बने हुए हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उस पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध जैसे संवेदनशील विषय शामिल हैं।
नेविगेशन और शिपिंग बहाली पर फोकस
हालांकि, ट्रंप के बयानों से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते का मुख्य मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट के जरिए नेविगेशन की आजादी को फिर से शुरू करना और कमर्शियल शिपिंग में रुकावटों को दूर करना है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी जताई समझौते की संभावना
कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि अमेरिका और ईरानी नेगोशिएटर, मध्यस्थ के साथ हफ्तों की बातचीत के बाद एक समझौते के करीब पहुंच गए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिका और ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि इस हफ्ते के आखिर में डील पर एक औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाना इस अरेंजमेंट का मुख्य हिस्सा है।
अखबार ने बताया कि दोनों पक्ष दुश्मनी खत्म करने और आगे की बातचीत के लिए जगह बनाने के मकसद से एक अंतरिम फ्रेमवर्क पर सहमत हुए हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट ने भी इसी तरह बताया कि इस समझौते से अमेरिका की नाकाबंदी खत्म हो जाएगी और स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा, जबकि दूसरे बड़े मुद्दे भविष्य की बातचीत के लिए छोड़ दिए जाएंगे। अखबार ने कहा कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और पाबंदियों में राहत पर बातचीत के एक अलग फेज में चर्चा जारी रहने की उम्मीद है।
ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की सफलता के रूप में पेश किया समझौता
न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि इस समझौते से लड़ाई रुकने, स्ट्रेट को फिर से खोलने और नाकाबंदी हटाने की उम्मीद है, जबकि न्यूक्लियर से संबंधित मामले को भविष्य की बातचीत के लिए टाल दिया जाएगा। अमेरिकी मीडिया ने इस समझौते को एक सीजफायर अरेंजमेंट बताया जो दोनों देशों के बीच बड़ी बातचीत का रास्ता बना सकता है। ट्रंप ने इस समझौते को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया कि उनका प्रशासन उन जगहों पर सफल रहा है, जहां पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति पीछे रह गए थे।


