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US Iran Deal: ट्रंप ने किया बड़ा दावा, ईरान नहीं चाहता परमाणु हथियार, आज हो सकता है ऐतिहासिक समझौता
US Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जल्द शांति समझौता होगा, जिससे होर्मुज स्ट्रेट खुलने और वैश्विक बाजारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
US Iran Deal
US Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होने वाले हैं। इसके तुरंत बाद होर्मुज स्ट्रेट सभी के लिए खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने इससे पहले 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था, “समझौते पर कल हस्ताक्षर होने वाले हैं और जैसे ही यह समझौता साइन होगा। होर्मुज स्ट्रेट सभी के लिए खुल जाएगा।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं चाहता है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका उचित समय पर ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हटाने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के संबंध अलग और बेहतर होंगे। हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर प्रक्रिया 'तेजी से, आसानी से और बिना किसी परेशानी के' आगे नहीं बढ़ी तो अमेरिका के पास 'अंतिम विकल्प' मौजूद है।
वैश्विक बाजारों के लिए ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट वाली टिप्पणी खास महत्व रखती है। यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार होने वाले कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है, खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखता है, क्योंकि इनका सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग लागत पर पड़ता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह प्रस्तावित समझौता ओबामा काल के परमाणु समझौते से अलग होगा, क्योंकि इसमें किसी तरह का वित्तीय भुगतान शामिल नहीं होगा।
उन्होंने लिखा, “ओबामा प्रशासन की तरह उन्हें सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान नहीं किया जाएगा, जिसमें 1.7 अरब डॉलर नगद भी शामिल थे। इस बार कोई पैसा हाथ नहीं बदलेगा।” राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ईरान में बची हुई परमाणु सामग्री को बाद में हटाकर नष्ट कर दिया जाएगा।
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कथित तौर पर इस बात से इनकार किया कि रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए किसी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। उन्होंने इसके लिए 'दूसरे पक्ष की हिचकिचाहट' को जिम्मेदार बताया।
बाकेई ने जोर देकर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला कोई भी संभावित एमओयू केवल आगे की बातचीत जारी रखने के लिए एक रूपरेखा होगा और इसे अंतिम समझौता नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत अगले 60 दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है। यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में दी गई है।


