Eiffel Tower Controversy: एफिल टॉवर पर महिला कर्मचारियों को हटाने से विवाद, BAPS संतों के दौरे के बाद हड़ताल; लैंगिक समानता पर बहस

Eiffel Tower Controversy: पेरिस के एफिल टॉवर पर BAPS संतों के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ कार्यस्थलों से हटाने के निर्देश पर विवाद बढ़ गया। कर्मचारियों की हड़ताल के बाद टॉवर एक दिन बंद रहा।

Newstrack Network
Published on: 9 Sept 2026 7:06 PM IST (Updated on: 9 Sept 2026 7:06 PM IST)
Eiffel Tower Controversy
X

Eiffel Tower Controversy (Image Credit-Social Media)

पेरिस। दुनिया के सबसे मशहूर पर्यटन स्थलों में शुमार फ्रांस की राजधानी स्थित एफिल टॉवर एक अभूतपूर्व विवाद के केंद्र में आ गया है। वैश्विक हिंदू धार्मिक संगठन 'बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था' (BAPS) के साधुओं के एक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान एफिल टॉवर पर तैनात महिला कर्मचारियों को उनके नियमित कार्यस्थलों से हटाकर वहां केवल पुरुष कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया। फ्रांसीसी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, इस कदम को देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और कार्यस्थल पर लैंगिक समानता के सिद्धांतों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। इसके कड़े विरोध में टॉवर के कर्मचारियों ने अचानक काम रोककर हड़ताल कर दी, जिसके चलते प्रतिष्ठित एफिल टॉवर को पूरे एक दिन (सोमवार) के लिए पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रखना पड़ा। मंगलवार को स्थिति सामान्य होने पर ही इसे दोबारा खोला जा सका।

फ्रांसीसी ट्रेड यूनियनों का तीखा आक्रोश: 'अपमानजनक और अस्वीकार्य'

फ्रांसीसी समाचार पत्र ल मोंद (Le Monde) और समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) की रिपोर्टों के अनुसार, एफिल टॉवर के प्रमुख श्रमिक संगठनों (CGT और FO) ने इस घटना की तीखी भर्त्सना की है। यूनियनों का आरोप है कि शनिवार को BAPS के संतों के आने से ठीक पहले टॉवर के सुरक्षा और स्वागत डेस्क पर तैनात महिला कर्मियों को वहां से हट जाने और खास हिस्सों में न जाने का मौखिक निर्देश दिया गया। श्रमिक प्रतिनिधियों ने इसे महिला कर्मियों के लिए 'अत्यंत अपमानजनक' और 'पेशेवर गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला' बताया। यूनियनों ने संयुक्त बयान में कहा कि फ्रांस एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है, जहां किसी भी धार्मिक आस्था के नियमों के आधार पर कार्यस्थल पर महिलाओं को उनके दायित्वों से अलग नहीं किया जा सकता। इसी नाराजगी के चलते सैकड़ों कर्मियों ने सोमवार को आकस्मिक वॉकआउट कर दिया, जिससे हजारों अंतरराष्ट्रीय सैलानी एफिल टॉवर के दीदार से वंचित रह गए।

प्रबंधन ने मानी गलती, जांच के आदेश

एफिल टॉवर का परिचालन करने वाली सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी SETE (सोसाइटी डी'एक्सप्लॉयटेशन डे ला टूर एफिल) ने दबाव बढ़ने के बाद अपनी चूक स्वीकार की है। कंपनी ने पुष्टि की कि BAPS प्रतिनिधिमंडल ने आधिकारिक तौर पर यह आग्रह किया था कि उनके संतों के संन्यास नियमों के मद्देनजर 'महिलाओं से उनका संपर्क यथासंभव सीमित' रखा जाए। प्रबंधन ने इस मांग को स्वीकार करते हुए महिला कर्मियों को सीमित दूरी बनाए रखने का निर्देश जारी कर दिया था। प्रबंधन ने अब माना है कि यह निर्णय कार्यस्थल के आंतरिक नियमों और फ्रांस के श्रम कानूनों के सिद्धांतों के प्रतिकूल था।

पेरिस नगर निगम और मेयर कार्यालय ने भी इस मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। पेरिस की मेयर एनी हिडाल्गो के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सेवाओं और फ्रांसीसी स्मारकों पर किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इस संबंध में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। उधर, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने प्रतिक्रिया देते हुए इस पूरे विवाद को एफिल टॉवर प्रबंधन और संबंधित संस्था के बीच का स्थानीय मामला बताया।

BAPS संस्था ने जताया खेद, रखा अपना पक्ष

विवाद गहराने के बाद पेरिस स्थित BAPS संस्था ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत बयान जारी कर पूरे घटनाक्रम पर खेद प्रकट किया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि शनिवार को आयोजित यह निजी दौरा पूरी तरह एफिल टॉवर की स्थानीय प्रबंधन टीम की सहमति और सहयोग से तैयार किया गया था, ताकि आम पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा न हो। संस्था ने जोर देकर कहा कि उनकी तरफ से किसी भी पर्यटक के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई गई थी और न ही किसी को असुविधा पहुंचाने का कोई इरादा था।

BAPS ने अपने बयान में कहा कि संस्था सभी चिंताओं को गंभीरता से लेती है और यदि इस व्यवस्था से किसी भी व्यक्ति या कर्मचारी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वे इसके लिए बिना शर्त क्षमाप्रार्थी हैं। गौरतलब है कि स्वामीनारायण संप्रदाय के त्यागी संतों के लिए 'अष्टंग ब्रह्मचर्य' के बेहद कड़े नियम निर्धारित हैं। इन संन्यास नियमों के तहत संत महिलाओं से शारीरिक दूरी बनाए रखते हैं, उनसे सीधे बातचीत या नेत्र संपर्क से बचते हैं और उनके निकट संपर्क में नहीं आते। इसी परंपरा के कारण वैश्विक स्तर पर BAPS के कई परिसरों में संतों के लिए अलग मार्ग और सभाओं में महिलाओं व पुरुषों के लिए बैठने के पृथक खंड निर्धारित होते हैं।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story