एपस्टीन की 'डर्टी' पार्टी में मस्क और जकरबर्ग! लीक हुई नयी तस्वीर, खुल गए गहरे दफन राज

Elon Musk-Zuckerberg Epstein Party Photos: एपस्टीन की कथित ‘डर्टी पार्टी’ से जुड़ी लीक तस्वीर ने दुनिया में सनसनी फैला दी है। एलॉन मस्क, मार्क जकरबर्ग और अन्य टेक दिग्गजों के नाम सामने आने के बाद विवाद गहराता जा रहा है। जानिए इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी और नए खुलासे।

Harsh Srivastava
Published on: 10 Feb 2026 2:48 PM IST
एपस्टीन की डर्टी पार्टी में मस्क और जकरबर्ग! लीक हुई नयी तस्वीर, खुल गए गहरे दफन राज
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Elon Musk-Zuckerberg Epstein Party Photos: आज की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर तकनीक की दुनिया के उन दिग्गजों से जुड़ी है जिन्हें हम अपना रोल मॉडल मानते हैं। जेफरी एपस्टीन, वो नाम जिसे सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, एक बार फिर दुनिया भर की सुर्खियों में है। एक ऐसी गुप्त तस्वीर लीक हुई है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। इस तस्वीर में दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलॉन मस्क और फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग एक साथ एक शानदार डिनर टेबल पर बैठे नजर आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पार्टी उस वक्त की है जब एपस्टीन यौन अपराधों में दोषी साबित हो चुका था। यानी, ये दिग्गज जानते थे कि वे किसके साथ खाना खा रहे हैं।

जब रईसों की महफिल में उड़ा कानून का मजाक

लीक हुई तस्वीर में देखा जा सकता है कि एलॉन मस्क और मार्क जकरबर्ग एक ही टेबल पर आमने-सामने बैठे हैं। टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलॉन मस्क सीधे कैमरे की ओर देख रहे हैं, जबकि जकरबर्ग थोड़े गंभीर नजर आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह फोटो खुद एपस्टीन ने ही क्लिक की होगी क्योंकि उसने यह तस्वीर खुद को ही 3 अगस्त 2015 को ईमेल की थी। इस महफिल को एपस्टीन ने 'वाइल्ड' यानी बेहद जंगली और बेलगाम बताया था। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या इन अरबपतियों का रसूख कानून से भी ऊपर है?

मस्क के दावों की खुली पोल: क्या बोल रहे थे झूठ?

इस तस्वीर के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा फजीहत एलॉन मस्क की हो रही है। मस्क ने हमेशा यह दावा किया था कि उनका जेफरी एपस्टीन से कोई लेना-देना नहीं है और वे कभी उसकी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए। मस्क ने तो यहाँ तक कहा था कि एपस्टीन के साथ अपराध करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन 2015 की यह तस्वीर उनके सभी दावों को झुठलाती नजर आ रही है। अब सवाल यह उठता है कि मस्क ने दुनिया से यह बात क्यों छिपाई? क्या इस 'वाइल्ड' पार्टी में कुछ ऐसा हुआ था जिसे मस्क कभी दुनिया के सामने नहीं आने देना चाहते थे?

बिल गेट्स और रूसी लड़कियों का 'गंदा' कनेक्शन

एपस्टीन की काली फाइलों में सिर्फ मस्क और जकरबर्ग ही नहीं, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स का नाम भी कीचड़ में सना हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, बिल गेट्स रूसी लड़कियों से मिलते थे। फाइलों में चौंकाने वाला जिक्र है कि एपस्टीन ने गेट्स के लिए खास दवाओं का इंतजाम किया था, ताकि लड़कियों से संबंध बनाने के बाद उन्हें किसी गुप्त बीमारी (STD) का सामना न करना पड़े। यह खुलासा बिल गेट्स की साफ-सुथरी छवि को पूरी तरह बर्बाद करने वाला है। इसके अलावा गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन का नाम भी सामने आया है, जिन्होंने एपस्टीन के उस कुख्यात प्राइवेट आइलैंड का दौरा किया था जहाँ मासूम लड़कियों का शिकार किया जाता था।

रसूखदारों का वो चेहरा जो कभी नहीं दिखा

जेफरी एपस्टीन की इन फाइलों ने साबित कर दिया है कि सत्ता और पैसे के गलियारों में कैसे घिनौने खेल खेले जाते हैं। लिंकडइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन से लेकर पेपाल के पीटर थिएल तक, इस पार्टी की लिस्ट बहुत लंबी है। ये लोग सिर्फ बिजनेस पार्टनर नहीं थे, बल्कि एक ऐसी दुनिया का हिस्सा थे जहाँ नैतिकता का कोई मोल नहीं था। अब जैसे-जैसे नई तस्वीरें और ईमेल सामने आ रहे हैं, दुनिया के इन 'भगवान' माने जाने वाले टेक दिग्गजों के चेहरे से नकाब उतर रहा है। क्या इन रईसों पर कभी कोई कार्रवाई होगी या इनका पैसा फिर से सच को दबा देगा?

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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