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Europe Heatwave 2026: यूरोप में हीटवेव बनी जानलेवा, 1000 से अधिक लोगों की गई जान, WHO ने जताई चिंता
Europe Heatwave 2026: यूरोप में भीषण हीटवेव से कई देशों में तापमान 40°C के पार पहुंच गया। WHO ने 1,300 से अधिक मौतों की पुष्टि की, कई जगह रिकॉर्ड टूटे।
Europe Heatwave 2026: यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लगातार पड़ रही गर्मी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है, कई जगह स्कूल बंद करने पड़े हैं और पानी की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग धूप में रखे बर्तनों पर अंडे और बेकन पकाते नजर आ रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी घटनाओं में 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है और यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है।
फ्रांस में सबसे ज्यादा असर
फ्रांस इस भीषण गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। मई में असामान्य गर्मी के बाद जून में 11 दिनों तक चली हीटवेव ने हालात और बिगाड़ दिए। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक करीब 1,000 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि कुछ इलाकों में तापमान पहले से कम हुआ है, लेकिन कई हिस्सों में अब भी पारा 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में फिर से तापमान बढ़ने की संभावना जताई है।
ब्रिटेन और मध्य यूरोप में टूटे रिकॉर्ड
ब्रिटेन में पिछले सप्ताह जून महीने का नया तापमान रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इंग्लैंड के नॉरफ़ॉक इलाके में तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो जून महीने का अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। वहीं, स्लोवाकिया और हंगरी में भी रिकॉर्ड टूट गए। स्लोवाकिया में तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि हंगरी में 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोनों देशों में यह अब तक का सबसे अधिक तापमान है।
क्रोएशिया, जर्मनी और अन्य देशों में भी गर्मी का प्रकोप
क्रोएशिया के तटीय शहर स्प्लिट में भी अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। यहां तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।जर्मनी, पोलैंड और चेक गणराज्य में भी गर्मी ने नए रिकॉर्ड बनाए। जर्मनी में तापमान 41.7 डिग्री, पोलैंड में 40.5 डिग्री और चेक गणराज्य में 41.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में लोगों को राहत देने के लिए पुलिस ने लगातार दूसरे दिन पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया।
यूक्रेन में सैनिकों के लिए बढ़ी मुश्किलें
यूरोप की यह भीषण गर्मी यूक्रेन तक पहुंच चुकी है। युद्ध के मोर्चे पर तैनात सैनिकों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। पुराने टैंकों के अंदर अत्यधिक गर्मी होने से सैनिकों के लिए लंबे समय तक ड्यूटी करना मुश्किल हो रहा है।
क्यों पड़ रही है इतनी भीषण गर्मी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार की भीषण गर्मी की मुख्य वजह 'ओमेगा ब्लॉक' नाम का मौसम पैटर्न है। इसमें उच्च दबाव वाला क्षेत्र दो कम दबाव वाले क्षेत्रों के बीच फंस जाता है। इस कारण आसमान लंबे समय तक साफ रहता है, बादल नहीं बनते और बारिश नहीं होती। नतीजतन सूरज की तेज किरणें लगातार जमीन को गर्म करती रहती हैं, जिससे कई दिनों तक तापमान बेहद ऊंचा बना रहता है।विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार और ज्यादा तीव्र होती जा रही हैं। अगर वैश्विक तापमान बढ़ने की रफ्तार नहीं रुकी, तो आने वाले वर्षों में दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी भीषण गर्मी आम बात बन सकती है।


