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Europe Heatwave: यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी से सूखी नदियां, डेन्यूब में दिखे हिटलर के डूबे युद्धपोत
Europe Heatwave: यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी और सूखे से डेन्यूब नदी का जलस्तर घटा। 80 साल पुराने नाजी जर्मनी के डूबे युद्धपोत फिर दिखाई दिए, जानें पूरा मामला।
Europe Heatwave: Dries Danube River, Reveals Sunken Nazi Warships After 80 Years
Europe Heatwave: लोग यूरोप घूमने इसलिए जाते हैं क्योंकि एक ही महाद्वीप में बहुत अलग-अलग तरह के पर्यटन अनुभव मिल जाते हैं। यहां ऐतिहासिक शहरों, बर्फीले पहाड़ों, समुद्र तटों, खूबसूरत गांवों, संग्रहालयों और आधुनिक शहरों का अनोखा मेल है। पूरे 12 महीने अपने सुहाने मौसम और खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के लिए दुनिया भर के सैलानियों की पसंद रहा यूरोप इस समय गर्मी के ऐसे संकट से जूझ रहा है, जिसने उसकी नदियों से लेकर जंगलों और बिजली व्यवस्था तक को प्रभावित कर दिया है। भीषण हीटवेव और कम बारिश के कारण कई इलाकों में नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इसी के साथ सर्बिया में डेन्यूब नदी का पानी घटा तो करीब 80 साल पुराना युद्ध इतिहास भी सतह पर नजर आने लगा। नदी के भीतर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डुबोए गए जर्मन युद्धपोतों के हिस्से दिखाई देने लगे हैं। पानी में डूबे इन जहाजों की तस्वीरें जहां एक तरफ हिटलर के दौर की भयावह यादें ताजा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यूरोप में बढ़ते गर्मी और जल संकट की गंभीर तस्वीर भी सामने रख रही हैं। ऐसे में सूखती नदी जहां इतिहास की एक डरावनी तस्वीर दिखा रही है, वहीं यूरोप के सामने जल संकट, परिवहन और बिजली उत्पादन जैसी नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं।
भीषण गर्मी से सूख रही यूरोप की नदियां
यूरोप इस समय तेज गर्मी और सूखे की मार झेल रहा है। कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। लगातार गर्म मौसम के बीच बारिश की कमी ने नदियों और जलाशयों में पानी की मात्रा कम कर दी है। सर्बिया में भी डेन्यूब का जलस्तर बेहद नीचे पहुंचने की स्थिति सामने आई है। अधिकारियों ने कम जलस्तर को लेकर गहरी चिंता जताई है। क्योंकि इसका असर सिर्फ पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। बल्कि नदी के जरिए होने वाला परिवहन, कृषि, उद्योग और ऊर्जा उत्पादन भी इससे प्रभावित हो सकता है।
डेन्यूब यूरोप की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है। यह जर्मनी के ब्लैक फॉरेस्ट क्षेत्र से निकलती है और ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोएशिया, सर्बिया, रोमानिया, बुल्गारिया, मोल्दोवा और यूक्रेन से होते हुए काला सागर तक पहुंचती है। करीब 2,850 किलोमीटर लंबी यह नदी यूरोप के कई देशों के लिए व्यापार और परिवहन की महत्वपूर्ण जीवनरेखा है।
पानी घटा तो सामने आया 80 साल पुराना युद्ध
डेन्यूब का जलस्तर कम होने से सर्बिया के प्राहोवो के आसपास पहले भी ऐसी तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, जिन्हें देखकर द्वितीय विश्व युद्ध की यादें ताजा हो गई थीं। साल 2022 में भीषण सूखे के दौरान नदी का पानी इतना कम हो गया था कि उसके भीतर डूबे जर्मन युद्धपोतों के बड़े हिस्से दिखाई देने लगे थे। इन जहाजों में कई जगह कमांड ब्रिज, मस्तूल, लोहे के ढांचे और तोपों के हिस्से तक नजर आए थे।
इन जहाजों को 1944 में जर्मन सेना ने जानबूझकर डेन्यूब में डुबो दिया था। उस समय सोवियत सेना के आगे बढ़ने के कारण जर्मन सेना पीछे हट रही थी। जर्मन नौसेना की ब्लैक सी फ्लीट के कई जहाजों को दुश्मन के हाथों में जाने से रोकने के लिए नदी में डुबो दिया गया था। बाद में ये जहाज नदी की गाद और पानी के नीचे दबे रह गए और कई दशकों तक दिखाई नहीं दिए।
डूबे जहाजों को क्यों कहा जाता है 'घोस्ट फ्लीट'
प्राहोवो के आसपास नदी में मौजूद इन जहाजों को अक्सर 'घोस्ट फ्लीट' यानी भूतिया बेड़े के तौर पर भी बताया जाता है। इसकी वजह यह है कि सामान्य परिस्थितियों में ये जहाज पानी के नीचे छिपे रहते हैं, लेकिन जब नदी का जलस्तर असामान्य रूप से कम हो जाता है तो इनके हिस्से अचानक दिखाई देने लगते हैं। 2022 में सूखे के दौरान दर्ज की गई तस्वीरों में कई पुराने जहाज नदी के बीचोंबीच खड़े नजर आए थे।
इनमें से कुछ जहाजों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। लोहे का बड़ा हिस्सा जंग खा चुका है, जबकि कुछ ढांचे रेत और गाद में आधे दबे हुए हैं। हालांकि, ये सिर्फ ऐतिहासिक अवशेष नहीं हैं। इन जहाजों के भीतर युद्ध के समय इस्तेमाल किया गया गोला-बारूद और अन्य खतरनाक सामग्री मौजूद होने की आशंका भी चिंता का कारण रही है।
पुराने गोला-बारूद ने बढ़ाई चिंता
डूबे हुए जहाजों से सबसे बड़ी चिंता विस्फोटक सामग्री को लेकर है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन जहाजों पर हथियार, गोला-बारूद और दूसरे सैन्य उपकरण मौजूद थे। दशकों तक पानी में रहने के बावजूद इनमें से कुछ सामग्री पूरी तरह नष्ट हुई हो, यह जरूरी नहीं है। यही कारण है कि जब पानी का स्तर बहुत नीचे चला जाता है और जहाजों के हिस्से बाहर आने लगते हैं तो प्रशासन के लिए यह सुरक्षा का मुद्दा भी बन जाता है।
कम पानी के कारण जहाजों के मलबे और नदी के तल की स्थिति बदलने से डेन्यूब में बड़े मालवाहक जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। कई जगहों पर नदी का सुरक्षित नौवहन चैनल संकरा हो जाता है। इससे यूरोप के इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।
डेन्यूब का पानी घटा तो कारोबार भी प्रभावित
डेन्यूब सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि यूरोप के कई देशों के बीच व्यापार का अहम रास्ता है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में अनाज, कोयला, धातु, तेल और अन्य सामान की ढुलाई होती है। जलस्तर कम होने पर मालवाहक जहाजों को अपनी क्षमता कम करनी पड़ती है, ताकि वे नदी के उथले हिस्सों में फंसें नहीं। इसका सीधा असर व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है।
नदी का कम जलस्तर यूरोप की ऊर्जा व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन रहा है। कुछ बिजली संयंत्रों में कूलिंग के लिए नदी के पानी की जरूरत होती है। पानी कम होने पर इन संयंत्रों के संचालन पर असर पड़ सकता है। रोमानिया में डेन्यूब के कम जलस्तर ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र की कूलिंग व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है। पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वहां अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े हैं।
गर्मी के साथ बढ़ रहा है सूखे का खतरा
यूरोप में मौजूदा गर्मी सिर्फ तापमान बढ़ने की कहानी नहीं है। लगातार कई दिनों तक अत्यधिक तापमान, कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी मिलकर सूखे की स्थिति को गंभीर बना रहे हैं। इसका असर नदियों के साथ खेती, जंगलों और पेयजल संसाधनों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में जंगलों में आग की घटनाओं ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। जलवायु विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण हीटवेव की अवधि और तीव्रता बढ़ सकती है। इसका असर नदियों के जलस्तर पर भी पड़ता है। जब गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है तो वाष्पीकरण बढ़ता है और बारिश कम होने की स्थिति में नदियों में पानी तेजी से घट सकता है।


