2024 में ही सुरक्षा खतरा मानकर हटाया गया था सह-पायलट, फिर फ्लाईदुबई के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा?

Flydubai Co-Pilot Hamam Al Hammami: फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी को 2024 में ही सुरक्षा जोखिम माना गया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि वह दूसरी एयरलाइन के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा।

Newstrack Network
Published on: 4 Oct 2026 4:59 PM IST
Hamam Al Hammami
X

Flydubai Flight FZ1073 

Flydubai Co-Pilot Hamam Al Hammami: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर जानलेवा हमला करने वाले सह-पायलट की पहचान 29 वर्षीय ओमानी नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में हुई है। इस पहचान के सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति को करीब दो साल पहले कथित कट्टरपंथी विचारों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण ओमान में विमान उड़ाने की जिम्मेदारी से हटा दिया गया था, वह दूसरी एयरलाइन में नौकरी पाने के बाद यात्री विमान के कॉकपिट तक कैसे पहुंच गया?

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सह-पायलट ने कॉकपिट में आपात स्थिति के लिए रखी जाने वाली क्रैश-एक्स यानी विशेष कुल्हाड़ी से कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया और विमान का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की। अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने वरिष्ठ खुफिया एवं कानून प्रवर्तन अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अल-हम्मामी को 2024 में Oman Air में रहते हुए सुरक्षा जोखिम के तौर पर चिन्हित किया गया था।

30 सितंबर को हुई यह घटना शुरुआत में कॉकपिट के भीतर दो पायलटों के बीच हिंसक झड़प का मामला लग रही थी, लेकिन सह-पायलट के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी सामने आने के बाद इसकी जांच का दायरा बढ़ गया है। UAE के अभियोजन अधिकारियों ने इसे 'आतंकवादी कृत्य का प्रयास' बताया है। अब जांच में हमले के मकसद के साथ-साथ अल-हम्मामी की पुरानी सुरक्षा रिपोर्ट, फ्लाईदुबई में उसकी नियुक्ति और एयरलाइनों के बीच कर्मचारियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

2024 में Oman Air ने सुरक्षा जोखिम मानकर हटाया था

अमेरिकी मीडिया संस्थान ABC News ने वरिष्ठ खुफिया और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के हवाले से हमलावर की पहचान हमाम अल-हम्मामी के रूप में की है। वह 29 वर्षीय ओमानी नागरिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह पहले Oman Air से जुड़ा था और वर्ष 2024 में उसे उड़ान संबंधी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसके कथित कट्टरपंथी विचारों और सुरक्षा जोखिम को लेकर चिंताएं सामने आई थीं।

इस जानकारी के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी पायलट को एक एयरलाइन या राष्ट्रीय विमानन व्यवस्था ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण उड़ान से हटा दिया था, तो दूसरी एयरलाइन में नियुक्ति के दौरान यह जानकारी सामने क्यों नहीं आई? क्या Oman Air ने इस संबंध में औपचारिक सूचना साझा की थी? क्या पायलटों के सुरक्षा रिकॉर्ड को लेकर एयरलाइनों के बीच कोई व्यवस्था मौजूद है? फ्लाईदुबई में नियुक्ति से पहले अल-हम्मामी की पृष्ठभूमि की जांच किस स्तर तक की गई थी?

अब जांच का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं सवालों पर केंद्रित है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना ने एयरलाइन कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच और कॉकपिट के भीतर से पैदा होने वाले खतरे को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।

विमान को इजरायल में गिराने की मंशा की भी जांच

अमेरिकी मीडिया की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, जांचकर्ताओं के सामने यह जानकारी आई है कि हमले का उद्देश्य विमान का नियंत्रण हासिल करना और उसे इजरायल में दुर्घटनाग्रस्त करना हो सकता था। ABC News ने जांच से परिचित अधिकारियों के हवाले से बताया है कि संदिग्ध जांचकर्ताओं के साथ सहयोग कर रहा है।

हालांकि, हमले के पीछे कोई व्यापक साजिश थी या अल-हम्मामी ने अकेले इसकी योजना बनाई थी, इसकी जांच अभी जारी है। UAE ने घटना को आतंकवादी कृत्य का प्रयास बताया है, लेकिन किसी घटना को आतंकवादी कृत्य कहना और हमलावर का किसी स्थापित आतंकवादी संगठन का सदस्य होना अलग-अलग बातें हैं।

अभी उपलब्ध विश्वसनीय जानकारियों में ISIS या अल-कायदा से अल-हम्मामी की औपचारिक सदस्यता अथवा उनके साथ किसी संचालन संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में अब तक आतंकवादी संगठनों से उसका प्रत्यक्ष संबंध सामने नहीं आया है। इसलिए उसके ISIS प्रभावित सीरिया में लंबे समय तक रहने या अल-कायदा समर्थक होने जैसी अपुष्ट बातों को स्थापित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इससे पहले सह-पायलट के इस्लामी कट्टरपंथ से प्रभावित होने की बात कही थी। हालांकि, यह उनका सार्वजनिक दावा था। UAE और अन्य देशों की एजेंसियां उसकी पृष्ठभूमि, डिजिटल गतिविधियों और संभावित संपर्कों की जांच कर रही हैं।

कॉकपिट में रखी क्रैश-एक्स से किया हमला

घटना के बाद सबसे पहले यह सवाल उठा था कि हमलावर विमान में कुल्हाड़ी जैसी वस्तु लेकर कैसे पहुंचा। UAE की पुष्टि के बाद स्पष्ट हुआ कि हमले में इस्तेमाल की गई वस्तु बाहर से सुरक्षा जांच पार कराकर लाई गई सामान्य कुल्हाड़ी नहीं थी, बल्कि विमान के कॉकपिट में आपात स्थिति के लिए रखी जाने वाली क्रैश-एक्स थी।

कई यात्री विमानों में ऐसी विशेष कुल्हाड़ी आपात स्थिति में विमान की आंतरिक संरचना काटने, आग लगने या दूसरी गंभीर परिस्थिति में रास्ता बनाने जैसे कामों के लिए रखी जाती है। यानी इस मामले में सामान्य हवाई अड्डा सुरक्षा जांच में चूक का सवाल नहीं है, बल्कि कॉकपिट के भीतर उपलब्ध आपातकालीन उपकरण को ही हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया।

इससे विमानन सुरक्षा के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा हो गया है। जिस उपकरण को आपात स्थिति में पायलट और यात्रियों की मदद के लिए रखा जाता है, अगर उसका इस्तेमाल कॉकपिट के अधिकृत सदस्य द्वारा ही हमले के लिए किया जाए तो ऐसे खतरे से कैसे निपटा जाए?

घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने खोला कॉकपिट का दरवाजा

हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर ने अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे बाहर मौजूद चालक दल के सदस्यों और अन्य लोगों को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला।

Reuters के मुताबिक, अस्पताल में उपचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में स्मित ने बताया था कि हमले के दौरान उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था, जिसके बाद दूसरे लोग सहायता के लिए अंदर पहुंच सके।

विमान में दूसरे योग्य पायलट भी मौजूद थे। स्थिति नियंत्रित होने के बाद उड़ान का मार्ग बदलकर सऊदी अरब के तबूक की ओर किया गया, जहां विमान को सुरक्षित उतार लिया गया। इस घटना में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उनकी सूझबूझ और चालक दल के अन्य सदस्यों की मदद से विमान में सवार यात्रियों और क्रू की जान बच गई।

ओमानी नागरिक को तेल अवीव जाने वाली उड़ान पर क्यों तैनात किया गया?

इस मामले में अल-हम्मामी की राष्ट्रीयता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वह ओमान का नागरिक है, जबकि ओमान और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि उसे तेल अवीव जाने वाली उड़ान पर किस प्रक्रिया के तहत तैनात किया गया और चालक दल के चयन के दौरान उसकी राष्ट्रीयता तथा सुरक्षा पृष्ठभूमि की किस स्तर पर जांच हुई।

AP ने भी इस पहलू को विमानन सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों में शामिल किया है। हालांकि, केवल किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता के आधार पर किसी साजिश का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों में अलग-अलग देशों के नागरिक पायलट के रूप में काम करते हैं और उनकी नियुक्ति कंपनी तथा संबंधित देशों के नियमों के आधार पर होती है। लेकिन अल-हम्मामी के कथित पुराने सुरक्षा रिकॉर्ड के कारण इस मामले में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है।

भारतीय कैप्टन की बहादुरी की UAE में भी हुई प्रशंसा

कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की भारत और इजरायल के बाद संयुक्त अरब अमीरात में भी सराहना हुई है। UAE के उप प्रधानमंत्री और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने शनिवार को उनसे मुलाकात की। उन्होंने स्मित की हिम्मत, जिम्मेदारी और यात्रियों की जान बचाने के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि UAE को गर्व है कि स्मित फ्लाईदुबई टीम का हिस्सा हैं।

इससे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित से बातचीत की थी। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में उपचार के दौरान उनसे बात कर उनका हाल जाना था।

हमले के दौरान सिर और शरीर पर चोट लगने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर बाहरी सहायता पहुंचने का रास्ता बनाया। यही कदम यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिहाज से निर्णायक साबित हुआ।

सबसे बड़ा सवाल: सुरक्षा जोखिम की जानकारी फ्लाईदुबई तक क्यों नहीं पहुंची?

अब तक सामने आई जानकारियों से हमले की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो रही है। सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने कॉकपिट में मौजूद क्रैश-एक्स से भारतीय कैप्टन पर हमला किया और विमान का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की। UAE अधिकारियों ने इसे आतंकवादी कृत्य का प्रयास बताया है। इसके साथ ही यह जानकारी भी सामने आई है कि अल-हम्मामी को 2024 में Oman Air में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण उड़ान की जिम्मेदारियों से हटाया गया था।

हालांकि, अभी इस मामले में कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। पहला, क्या अल-हम्मामी ने हमले की योजना अकेले बनाई थी या उसका किसी दूसरे व्यक्ति अथवा संगठन से संपर्क था? दूसरा, 2024 में उसके बारे में सामने आई सुरक्षा संबंधी जानकारी फ्लाईदुबई की नियुक्ति प्रक्रिया तक क्यों नहीं पहुंची? क्या यह जानकारी साझा की गई थी और यदि हां, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? तीसरा, उसे तेल अवीव जाने वाली उड़ान पर किस प्रक्रिया के तहत तैनात किया गया?

इन्हीं सवालों के कारण FZ1073 की घटना अब केवल कॉकपिट में हुई हिंसक झड़प या एक भारतीय पायलट की बहादुरी की कहानी नहीं रह गई है। यह वैश्विक नागरिक विमानन में 'इनसाइडर थ्रेट' यानी विमान के संचालन के लिए अधिकृत व्यक्ति से पैदा होने वाले खतरे का गंभीर मामला बन गई है।

कॉकपिट का मजबूत दरवाजा बाहर से आने वाले हमलावर को रोक सकता है, लेकिन जब खतरा पहले से कॉकपिट के भीतर मौजूद हो तो सुरक्षा की पहली दीवार कर्मचारियों की सही पृष्ठभूमि जांच और सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का समय पर साझा होना है। अल-हम्मामी की पूरी पृष्ठभूमि और किसी आतंकी संगठन से उसके संभावित संबंधों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story