हाफिज सईद को लाहौर में समन भेजेगा भारत, Pahalgam केस में ट्रायल की तैयारी तेज

पहलगाम आतंकी हमले के मामले में NIA हाफिज सईद को लाहौर में राजनयिक माध्यम से कोर्ट समन भेजने की तैयारी में है। जानें Trial in Absentia और BNSS की धारा 356 का पूरा मामला।

Alakha Singh
Published on: 22 Aug 2026 3:25 PM IST (Updated on: 22 Aug 2026 3:29 PM IST)
हाफिज सईद को लाहौर में समन भेजेगा भारत, Pahalgam केस में ट्रायल की तैयारी तेज
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Hafiz Saeed Summons: 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ भारत ने कानूनी कार्रवाई और तेज कर दी है। 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अब उसे पाकिस्तान के लाहौर में राजनयिक माध्यम से कोर्ट का समन भेजने की तैयारी में है। इसके बाद यदि वह अदालत के सामने पेश नहीं होता है, तो उसके खिलाफ गैरहाजिरी में मुकदमे (Trial in Absentia) की राह खुल सकती है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जम्मू की विशेष NIA अदालत की ओर से हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद अब समन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। समन को विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए पाकिस्तान तक पहुंचाया जाएगा।

MEA के जरिए पाकिस्तान भेजा जाएगा कोर्ट समन

NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले की साजिश से जोड़ा है। एजेंसी ने उसे व्यक्तिगत तौर पर और लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके कथित फ्रंट द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के प्रमुख नेताओं में शामिल व्यक्ति के तौर पर आरोपी बनाया है।

NIA का आरोप है कि सईद ने भारत के खिलाफ साजिश और युद्ध छेड़ने से जुड़े अपराधों में भूमिका निभाई।

चार्जशीट के बाद विशेष अदालत ने जुलाई में उसके खिलाफ Non-Bailable Warrant (NBW) जारी किया। अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में उसे अदालत के सामने पेश होने का औपचारिक अवसर दिया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार समन को विदेश मंत्रालय के जरिए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक पहुंचाएगी। इसके लिए राजनयिक चैनल का इस्तेमाल किया जाएगा।

समन भेजना क्यों है महत्वपूर्ण?

हाफिज सईद पाकिस्तान में है और भारत में चल रही जांच एवं अदालती कार्रवाई में अब तक उसके सामने पेश होने की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में समन भेजने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत के रिकॉर्ड में यह दर्ज हो कि आरोपी को कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।

अगर समन के बावजूद सईद अदालत में पेश नहीं होता और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित किया जाता है, तो आगे उसके खिलाफ गैरहाजिरी में मुकदमा चलाने का रास्ता खुल सकता है।

BNSS की धारा 356 क्या कहती है?

भारत के नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में कुछ निर्धारित परिस्थितियों में घोषित अपराधी के खिलाफ उसकी गैरमौजूदगी में जांच, सुनवाई या फैसला करने का प्रावधान है।

इसी प्रक्रिया के तहत भारत पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सईद को अदालत में उपस्थित होने का अवसर दिया गया और उसे समन तथा अन्य कानूनी नोटिस की प्रक्रिया पूरी तरह से अपनाई गई।

यानी भारत की कोशिश केवल गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उसके खिलाफ आगे की न्यायिक कार्रवाई में कोई प्रक्रियागत कमी न रह जाए।

पाकिस्तान में मौजूदगी के बावजूद भारत की कार्रवाई

पाकिस्तान लंबे समय से यह कहता रहा है कि हाफिज सईद आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों में सजा काट रहा है। दूसरी ओर, भारतीय एजेंसियां उस पर भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों और आतंकी साजिशों से जुड़े होने के आरोप लगाती रही हैं।

ऐसे में पाकिस्तान में उसकी मौजूदगी भारत के लिए सबसे बड़ी कानूनी चुनौतियों में से एक है। भारत और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण सहयोग का अभाव भी इस मामले को और जटिल बनाता है।

समन भेजने की प्रक्रिया के जरिए भारत यह रिकॉर्ड तैयार करना चाहता है कि उसने सईद को भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने का औपचारिक अवसर देने के लिए उपलब्ध कानूनी और राजनयिक रास्तों का इस्तेमाल किया।

पहलगाम केस में आगे क्या होगा?

NIA की कार्रवाई का अगला महत्वपूर्ण चरण यह होगा कि अदालत की ओर से जारी प्रक्रिया का पालन किस तरह होता है। यदि हाफिज सईद समन के बावजूद अदालत के सामने पेश नहीं होता और कानून में निर्धारित अन्य शर्तें पूरी होती हैं, तो उसके खिलाफ Trial in Absentia की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया का मकसद जल्दबाजी में कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत न्यायिक रिकॉर्ड तैयार करना है जिसमें आरोपी को सुनवाई का अवसर देने की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हों।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ सकता है दबाव

हाफिज सईद के खिलाफ भारत की न्यायिक कार्रवाई का असर केवल घरेलू अदालत की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। एक मजबूत न्यायिक रिकॉर्ड भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपना पक्ष रखने में मदद कर सकता है।

विशेष रूप से आतंकवाद और आतंक के वित्तपोषण से जुड़े मामलों में पाकिस्तान पर भारत का दबाव बढ़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई FATF से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श में भी भारत के पक्ष को मजबूत कर सकती है।

भारत पहले से ही हाफिज सईद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध तंत्रों का इस्तेमाल करता रहा है। अब पहलगाम मामले में समन से लेकर संभावित ट्रायल इन एब्सेंटिया तक की प्रक्रिया को उसी व्यापक कानूनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सईद के खिलाफ भारत की कानूनी रणनीति क्या है?

पूरी कार्रवाई को तीन स्तरों पर देखा जा सकता है कि पहला, अदालत से गैर-जमानती वारंट; दूसरा, पाकिस्तान में राजनयिक माध्यम से समन की तामील; और तीसरा, कानूनी शर्तें पूरी होने पर गैरहाजिरी में मुकदमे की संभावित प्रक्रिया।

इससे भारत यह संदेश देना चाहता है कि किसी आरोपी के देश से बाहर होने या प्रत्यर्पण सहयोग नहीं मिलने से न्यायिक प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक रुकी नहीं रहनी चाहिए।

हालांकि, ट्रायल इन एब्सेंटिया अपने आप शुरू नहीं हो जाता। इसके लिए BNSS में निर्धारित कानूनी शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होगा।

पाकिस्तान ने बढाई आतंकी सईद की सुरक्षा:

हाल ही में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की सुरक्षा में बड़ा इजाफा किया है। खुफिया आकलनों के मुताबिक, बढ़ते खतरे को देखते हुए पाकिस्तान ने उसकी सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंतजाम किए हैं। बताया जा रहा है कि हाफिज सईद को कई बार हत्या के प्रयासों का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा आतंकी संगठन के भीतर बढ़ते मतभेद और हालिया नुकसान ने भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी हाफिज सईद की सुरक्षा अब ISI की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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