कौन है गैंगस्टर हिमांशु भाऊ? जिसे अमेरिका में FBI ने उठाया, भारत को जल्द मिल सकती है कस्टडी

Gangster Himanshu Bhau Arrest: गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका में FBI ने गिरफ्तार किया है। जानिए कौन है हिमांशु भाऊ, भारत से अमेरिका कैसे पहुंचा, कैसे बनाया अपराध का नेटवर्क और भारत को उसकी कस्टडी कब मिल सकती है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 24 Oct 2026 8:31 AM IST
Who Is Gangster Himanshu Bhau? FBI Arrest
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Gangster Himanshu Bhau Arrested

Gangster Himanshu Bhau Arrest: भारत के मोस्ट वांटेड गैंगस्टरों में शामिल हिमांशु भाऊ आखिरकार अमेरिकी एजेंसियों के शिकंजे में आ गया है। हरियाणा के रोहतक से शुरू हुई उसकी अपराध की कहानी कुछ ही सालों में दिल्ली-NCR (Delhi-NCR), हरियाणा और पंजाब तक पहुंच गई। इसके बाद उसने देश छोड़ा और विदेश में बैठकर कथित तौर पर अपना गैंग चलाने लगा।

अब अमेरिकी एजेंसियों ने उसे लास वेगास (Las Vegas) में पकड़ लिया है। भारतीय एजेंसियों को उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत लाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैक की गई और अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जानकारी दी गई। इसके बाद उसे अमेरिका में पकड़ा गया।

FBI के शिकंजे में कैसे आया हिमांशु भाऊ?

ताजा जानकारी के मुताबिक, हिमांशु भाऊ की लोकेशन अमेरिकी एजेंसियों तक भारतीय एजेंसियों ने पहुंचाई थी। NIA (National Investigation Agency) से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) और सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर उसकी लोकेशन लास वेगास में ट्रैक की गई। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के साथ जानकारी साझा की और गुरुवार शाम उसे गिरफ्तार किया गया।

अब भारतीय एजेंसियां उसकी डिपोर्टेशन (Deportation) या प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अमेरिका जा सकती है।

जिसके बाद अब ऐसा माना जाअ रहा है कि हिमांशु भाऊ को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लेकिन उसकी भारतीय कस्टडी अभी औपचारिक रूप से नहीं मिली है।

आखिर कौन है हिमांशु भाऊ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमांशु भाऊ का असली नाम हिमांशु रिटोलिया (Himanshu Ritoliya) बताया जाता है। वह हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव का रहने वाला है।

उसकी उम्र अभी करीब 23 साल बताई जा रही है, लेकिन इतनी कम उम्र में ही वह उत्तर भारत के बड़े संगठित अपराध नेटवर्क (Organised Crime Network) में अपना नाम बना चुका था।

पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, फिरौती, आपराधिक धमकी, हथियारों से जुड़े अपराध और आपराधिक साजिश जैसे कई मामले दर्ज हैं।

Indian Express के एक रिपोर्ट में उसके खिलाफ 30 से ज्यादा आपराधिक मामले बताए गए हैं, जिनमें कम से कम 16 मामले हत्या या हत्या की कोशिश से जुड़े हैं।

17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम

हिमांशु की कहानी की शुरुआत किसी पुराने गैंगस्टर की तरह नहीं हुई थी। पुलिस के मुताबिक, वह काफी कम उम्र में अपराध की दुनिया में आ गया था।

साल 2020 में वह हिसार के बाल सुधार गृह (Juvenile Correctional Facility) में बंद था। इसी दौरान वह दूसरे कैदियों के साथ वहां से फरार हो गया।

एक मीडिया संस्थान की पुरानी पड़ताल के मुताबिक, उस समय हिमांशु सिर्फ 17 साल का था। सुधार गृह से भागने के बाद उसने स्थानीय अपराधियों से संपर्क बढ़ाया और धीरे-धीरे संगठित अपराध की तरफ बढ़ता चला गया।

यहीं से उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने कुछ ही सालों में उसे स्थानीय बदमाश से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांटेड गैंगस्टर बना दिया।

नीरज बवाना गैंग से कनेक्शन और अपना गैंग

बाल सुधार गृह से निकलने के बाद हिमांशु के संपर्क दिल्ली के गैंगस्टरों से हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, उसका संपर्क जेल में बंद गैंगस्टर नीरज बवाना और नवीन बाली से हुआ।

पड़ताल के मुताबिक, हिमांशु को पहले अपनी वफादारी साबित करने के लिए एक विरोधी गैंग के सदस्यों को निशाना बनाने का काम दिया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे उसने खुद का नेटवर्क खड़ा करना शुरू कर दिया।

पुलिस के मुताबिक, आगे चलकर उसका गैंग दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक फैल गया।

क्या है विदेश भागने की पूरी कहानी?

आपको बताते चलें कि जब भारत में पुलिस का शिकंजा कसने लगा तो हिमांशु ने देश छोड़ने का रास्ता अपनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 'कुणाल सिंह' के नाम से पासपोर्ट हासिल किया। इसके बाद अगस्त 2022 में भारत से निकल गया।

उसका रास्ता UAE (United Arab Emirates) होते हुए यूरोप तक पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, वह कथित तौर पर 'डंकी रूट' से यूरोप पहुंचा और बाद में पुर्तगाल (Portugal) में रहकर अपना नेटवर्क चलाने लगा।

यानी पुलिस से बचने के लिए देश छोड़ने के बाद उसने अपराध की दुनिया छोड़ने के बजाय कथित तौर पर अपना ऑपरेशन विदेश से चलाना शुरू कर दिया।

पुर्तगाल बैठकर भारत में चलता था गैंग?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, हिमांशु का नेटवर्क विदेश में बैठकर भारत में काम करता था। उसका तरीका भी काफी अलग बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, गैंग के लोग पहले कारोबारियों और दूसरे लोगों को फोन या मैसेज के जरिए धमकाते थे। उनसे फिरौती (Extortion Money) मांगी जाती थी। अगर कोई पैसा देने से इनकार करता था तो कथित तौर पर उसके घर या प्रतिष्ठान के बाहर फायरिंग (Firing) करवाई जाती थी।

रिपोर्ट्स में NIA से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गैंग सोशल मीडिया (Social Media) का इस्तेमाल युवाओं तक पहुंचने के लिए भी करता था। सोशल मीडिया पर गैंग की लाइफस्टाइल दिखाकर युवाओं को आकर्षित किया जाता और फिर उन्हें अपराध के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती थी।

यही वजह थी कि पुलिस के लिए विदेश में बैठे हिमांशु तक पहुंचना आसान नहीं था, जबकि भारत में उसके कथित नेटवर्क के लोग लगातार सक्रिय बताए जा रहे थे।

2023 में इंटरपोल ने जारी किया रेड नोटिस

वहीं भारत से फरार होने के बाद हिमांशु पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शिकंजा कसने लगा। अगस्त 2023 में इंटरपोल (Interpol) ने उसके खिलाफ रेड नोटिस (Red Notice) जारी किया। उस समय हरियाणा पुलिस ने बताया था कि हिमांशु 18 गंभीर आपराधिक मामलों में वांटेड था। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, फिरौती, आपराधिक धमकी और फर्जीवाड़े जैसे मामले शामिल थे।

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। इंटरपोल का रेड नोटिस अपने आप में कोई अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट (International Arrest Warrant) नहीं होता। इसका मकसद सदस्य देशों की पुलिस को किसी वांछित व्यक्ति का पता लगाने और कानून के मुताबिक उसकी अस्थायी गिरफ्तारी में सहयोग करना होता है।

बर्गर किंग हत्याकांड से भी जुड़ा नाम

वहीं हिमांशु भाऊ का नाम दिल्ली के चर्चित बर्गर किंग हत्याकांड (Burger King Murder Case) में भी सामने आया। 18 जून 2024 को दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित बर्गर किंग आउटलेट में अमन जून नाम के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने हिमांशु के कथित नेटवर्क से जुड़ी युवती अनु धनखड़ को गिरफ्तार किया था।

जांच में पुलिस ने आरोप लगाया था कि अनु ने अमन जून को सोशल मीडिया के जरिए रेस्टोरेंट तक बुलाने में भूमिका निभाई और वहां मौजूद शूटरों को जरूरी जानकारी दी। इस मामले ने हिमांशु भाऊ के नाम को देशभर में चर्चा में ला दिया।

एल्विश यादव के घर फायरिंग का भी कनेक्शन

हिमांशु भाऊ गैंग का नाम यूट्यूबर और सोशल मीडिया सेलिब्रिटी एल्विश यादव (Elvish Yadav) के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में भी सामने आया। रिपोर्टस के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने हिमांशु और उसके कथित नेटवर्क को दिल्ली-हरियाणा में कई हाई-प्रोफाइल शूटिंग और हत्या के मामलों से जोड़ा है। इनमें एल्विश यादव के घर के बाहर फायरिंग का मामला भी शामिल है।

हालांकि ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम फैसला अदालत की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से क्यों है दुश्मनी?

हिमांशु भाऊ को लेकर एक और बड़ा नाम सामने आता है और वह है लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi)। पुलिस और जांच एजेंसियों के मुताबिक, हिमांशु का नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े नेटवर्क का विरोधी माना जाता है। वहीं हिमांशु के संपर्क नीरज बवाना और बंबीहा गैंग से जुड़े लोगों के साथ बताए जाते हैं।

यही गैंगवार (Gang Rivalry) उत्तर भारत के संगठित अपराध की दुनिया में कई हिंसक घटनाओं की वजह बनी है। हालांकि अलग-अलग मामलों में किस गैंग की सीधी भूमिका थी, यह जांच और अदालत की प्रक्रिया का विषय है।

सोशल मीडिया से बनाया गैंग का 'ब्रांड'

हिमांशु भाऊ के नेटवर्क की एक खास बात उसका सोशल मीडिया इस्तेमाल भी बताया जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर हथियारों, गाड़ियों और गैंगस्टर लाइफस्टाइल से जुड़ी पोस्ट के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।

इसके बाद कुछ युवाओं को कथित तौर पर छोटे-मोटे अपराधों और फायरिंग जैसी वारदातों में इस्तेमाल किया जाता था।

यानी गैंग का मॉडल सिर्फ पुराने तरीके वाली वसूली तक सीमित नहीं था। इसमें सोशल मीडिया (Social Media), विदेशी ठिकाने (Foreign Base), स्थानीय शूटर (Local Shooters) और वर्चुअल कम्युनिकेशन (Virtual Communication) का इस्तेमाल भी शामिल बताया गया।

कितना बड़ा था गैंग का नेटवर्क?

आपको बताते चलें कि दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियां लंबे समय से हिमांशु के नेटवर्क पर काम कर रही थीं। साल 2025 में दिल्ली पुलिस ने हिमांशु भाऊ और नीरज बवाना गैंग से जुड़े तीन कथित सदस्यों को रोहिणी में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, ये लोग दोनों गैंग के लिए काम कर रहे थे।

मार्च 2026 में भी दिल्ली पुलिस ने महाराष्ट्र से हिमांशु गैंग के दो कथित शूटरों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर फिरौती के लिए फायरिंग समेत कई मामलों में शामिल होने का आरोप था। इन कार्रवाइयों से यह साफ होता है कि जांच एजेंसियां उसके विदेश में बैठे होने के बावजूद भारत में उसके नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश लगातार करती रही हैं।

अब अमेरिका में पकड़े जाने के बाद क्या होगा?

वहीं अब हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसे भारत कब लाया जाएगा? भारतीय एजेंसियां अब अमेरिका के साथ मिलकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेंगी। इसमें डिपोर्टेशन या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय एजेंसियां अमेरिकी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही हैं और उसकी वापसी की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारतीय एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हिमांशु को भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के हवाले किया जा सकता है।

छोटी उम्र, बड़ा अपराध नेटवर्क

हिमांशु भाऊ की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि उसने अपराध की दुनिया में कदम बेहद कम उम्र में रखा और कुछ ही साल में उसका नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया।

रोहतक के एक गांव से शुरू हुई कहानी बाल सुधार गृह से फरारी, स्थानीय गैंग से संपर्क, अपना नेटवर्क खड़ा करने, विदेश भागने और वहां से भारत में कथित अपराध नेटवर्क चलाने तक पहुंची।

अब अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियों के सामने अगला लक्ष्य उसे भारत लाना और उसके खिलाफ दर्ज मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाना है।

अगर प्रत्यर्पण या डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी होती है तो यह भारतीय एजेंसियों के लिए विदेश से संचालित हो रहे हिमांशु भाऊ नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा अगला चरण होगा।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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