Buddhist Relics Exhibition: बौद्ध धरोहर से मजबूत होंगे भारत-मंगोलिया संबंध, जानिए जून में क्यों खास होगा आयोजन

Buddhist Relics Exhibition: भारत सरकार 1 से 10 जून तक मंगोलिया के उलानबटार स्थित गंडेन मठ में भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्या-यन के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करेगी। यह आयोजन भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को नई मजबूती देगा।

Newstrack/IANS
Published on: 27 May 2026 5:14 PM IST (Updated on: 27 May 2026 5:14 PM IST)
Buddhist Relics Exhibition: बौद्ध धरोहर से मजबूत होंगे भारत-मंगोलिया संबंध, जानिए जून में क्यों खास होगा आयोजन
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नई दिल्ली/उलानबटार, 27 मई । भारत धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाता जा रहा है। इसके साथ ही कई देशों के साथ उसके संबंधों में भी काफी सुधार आया है। वहीं अब भारत से मंगोलिया बौद्ध धरोहर का संदेश जल्द पहुंचेगा। इस पहल को भारत और मंगोलिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

मंगोलिया में होगा बौद्ध धरोहर का विशेष आयोजन

मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, इंटरनेशनल बौद्ध कन्फेडरेशन (आईबीसी) और नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम के सहयोग से भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्या-यन के पवित्र अवशेषों की एक विशेष प्रदर्शनी 1 से 10 जून तक गंडेन मठ में लगाई जाएगी। जिसमे काफी कुछ ख़ास होने वाला है।

इससे पहले जून 2022 में भगवान बुद्ध के कपिलवस्तु से जुड़े चार पवित्र अवशेषों को भारत से मंगोलिया ले जाया गया था। करीब 29 साल बाद 11 दिनों के लिए गंदन्तेगछेलिंग मठ में प्रदर्शित किया गया था। इन अवशेषों को महात्मा बुद्ध के दंत अवशेष के साथ प्रदर्शित किया गया था। उस समय ये अवशेष भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान से विशेष सुरक्षा के साथ भेजे गए थे और एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी उनके साथ गया था।

पीएम मोदी की घोषणा के बाद साकार हुई सांस्कृतिक पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में खुरेलसुख उखना के चार दिवसीय भारत दौरे के दौरान घोषणा की थी कि अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्या-यन के अवशेष भी मंगोलिया भेजे जाएंगे। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने बौद्ध संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम बताया था।

14 अक्टूबर 2025 को संयुक्त संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और मंगोलिया के रिश्ते केवल राजनयिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आध्यात्मिक और आत्मीय बंधन पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, "हमारे संबंधों की असली गहराई हमारे पीपल-टू-पीपल-टाइज में दिखाई देती है। सदियों से दोनों देश बौद्ध धर्म के सूत्र में बंधे हैं। इस वजह से हमें 'स्पिरिचुअल सिबलिंग' कहा जाता है। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि अगले वर्ष भगवान बुद्ध के दो महान शिष्यों सारिपुत्र और मौद्गल्या-यन के पवित्र अवशेष भारत से मंगोलिया भेजे जाएंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच बौद्धिक और धार्मिक संबंधों को और गहरा करेगा।"

बौद्ध धर्म के जरिए मजबूत हो रहे भारत-मंगोलिया संबंध

बौद्ध परंपरा में सारिपुत्र और मौद्गल्या-यन को भगवान बुद्ध के सबसे प्रमुख शिष्यों में माना जाता है, जिनका योगदान बौद्ध धर्म के ज्ञान, शिक्षाओं और साधना के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। सारिपुत्र को विशेष रूप से गहन ज्ञान और विश्लेषणात्मक समझ के लिए जाना जाता है, जबकि मौद्गल्या-यन को आध्यात्मिक शक्तियों और साधना में सिद्ध माना जाता है।

माना जाता है कि भारत और मंगोलिया के बीच यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रिश्तों का प्रतीक भी है, जो बौद्ध धम्म के माध्यम से सदियों से जुड़ा हुआ है।

Shweta Srivastava

Shweta Srivastava

News Publisher Mail ID - aqua_shweta2000@yahoo.co.in

मैं श्वेता श्रीवास्तव 15 साल का मीडिया इंडस्ट्री में अनुभव रखतीं हूँ। मैंने अपने करियर की शुरुआत एक रिपोर्टर के तौर पर की थी। पिछले 9 सालों से डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्यरत हूँ। इस दौरान मैंने मनोरंजन, टूरिज्म और लाइफस्टाइल डेस्क के लिए काम किया है। इसके पहले मैंने aajkikhabar.com और thenewbond.com के लिए भी काम किया है। साथ ही दूरदर्शन लखनऊ में बतौर एंकर भी काम किया है। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एंड फिल्म प्रोडक्शन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। न्यूज़ट्रैक में मैं लाइफस्टाइल और टूरिज्म सेक्शेन देख रहीं हूँ।

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