किसी देश के Passport की ‘ताकत’ क्या होती है? भारत का पासपोर्ट कितना शक्तिशाली? 2026 की रैंकिंग ने खोला 'राज'

Strongest Passports In The World 2026: पासपोर्ट की ताकत कोई आधिकारिक तौर पर कोई वैश्विक कानूनी रैंकिंग नहीं है। यह काम संयुक्त राष्ट्र संघ नहीं करता बल्कि अलग अलग निजी संस्थाएं अपने ढंग के पैमाने से सूचकांक निकालती हैं।

Yogesh Mishra
Published on: 16 Aug 2026 10:53 AM IST (Updated on: 16 Aug 2026 10:55 AM IST)
Strongest Passports In The World 2026
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Strongest Passports In The World 2026

Strongest Passports In The World 2026: किसी देश के पासपोर्ट की ‘ताकत’ से आमतौर पर यह समझा जाता है कि उस देश का नागरिक कितने देशों या गंतव्यों में पहले से नियमित वीजा लिए बिना आसानी से प्रवेश कर सकता है। जितने ज्यादा देशों में बिना पूर्व वीजा, आगमन पर वीजा या कुछ स्वीकृत त्वरित प्रवेश व्यवस्थाओं के माध्यम से जाना संभव हो, उस पासपोर्ट को उतना 'शक्तिशाली' माना जाता है।


हालांकि पासपोर्ट की ताकत कोई आधिकारिक तौर पर कोई वैश्विक कानूनी रैंकिंग नहीं है। यह काम संयुक्त राष्ट्र संघ नहीं करता बल्कि अलग अलग निजी संस्थाएं अपने ढंग के पैमाने से सूचकांक निकालती हैं।

फिर भी... अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक उद्धृत सूचकांकों में Henley Passport Index प्रमुख है। यह 199 पासपोर्टों को 227 यात्रा गंतव्यों के मुकाबले देखता है और अंतरराष्ट्रीय विमान परिवहन संघ के यात्रा दस्तावेज संबंधी आँकड़ों का प्रयोग करता है। इसका मूल प्रश्न है- किस पासपोर्ट का धारक किसी गंतव्य पर जाने से पहले नियमित वीजा प्राप्त किए बिना वहाँ प्रवेश कर सकता है या नहीं।

इसमें कुछ आगमन-वीजा और ऐसी इलेक्ट्रॉनिक यात्रा अनुमति भी शामिल हो सकती हैं जिनके लिए पहले विस्तृत सरकारी वीजा स्वीकृति ज़रूरी नहीं होती। इसलिए Henley का ‘55 गंतव्य’ और भारत सरकार का ‘27 वीजा-मुक्त देश’ एक-दूसरे का विरोध नहीं हैं।दोनों की गिनती का तरीका अलग है।

Passport मजबूत होने का वास्तविक अर्थ क्या है?


मान लीजिए देश ‘A’ के नागरिक को 190 देशों में जाने के लिए पहले दूतावास जाकर वीजा आवेदन, बैंक विवरण, आय प्रमाण, यात्रा कार्यक्रम, साक्षात्कार और कई हफ्ते की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। वह टिकट खरीद सकता है और सामान्य औपचारिकताओं के साथ यात्रा कर सकता है। दूसरी ओर देश ‘B’ के नागरिक को सिर्फ 25-30 देशों में ऐसी सुविधा है और अमेरिका, यूरोप, जापान, ब्रिटेन तथा दूसरे प्रमुख आर्थिक केंद्रों के लिए पहले लंबी वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। स्पष्ट है कि देश ‘A’ का नागरिक अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के मामले में कहीं ज्यादा स्वतंत्र है।

लेकिन Passport की ताकत सिर्फ पर्यटन की सुविधा नहीं है। बल्कि इसका बड़ा प्रभाव व्यापार यात्राओं, सम्मेलनों, शिक्षा संबंधी छोटी यात्राओं, पारिवारिक मुलाकातों, आकस्मिक अंतरराष्ट्रीय अवसरों और कभी-कभी रोजगार संबंधी गतिविधियों पर भी पड़ता है। मजबूत पासपोर्ट वाला व्यक्ति अचानक किसी दूसरे देश की बैठक में जाने का फैसला बहुत आसानी से कर सकता है। लेकिन कमजोर पासपोर्ट वाला व्यक्ति उसी यात्रा के लिए कई सप्ताह पहले आवेदन करने को मजबूर हो सकता है।


इसीलिए पासपोर्ट की शक्ति किसी देश की कूटनीतिक प्रतिष्ठा, आपसी विश्वास, नागरिकों के प्रवासन संबंधी जोखिम, आर्थिक स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और पारस्परिक वीजा समझौतों से भी जुड़ जाती है। हालांकि किसी देश का सैन्य या आर्थिक रूप से बहुत शक्तिशाली होना अपने-आप उसके पासपोर्ट को दुनिया का सबसे शक्तिशाली नहीं बना देता। चीन इसका अच्छा उदाहरण है- विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में होने के बावजूद उसका पासपोर्ट अभी शीर्ष श्रेणी में नहीं है।

भारत का Passport 2026 में कितना शक्तिशाली है?


अगस्त, 2026 तक उपलब्ध Henley Passport Index के मुताबिक, भारत लगभग 80वें स्थान पर है और भारतीय पासपोर्ट धारक लगभग 55 गंतव्यों तक बिना पहले से पारंपरिक वीजा लिए पहुँच सकते हैं। इसमें शुद्ध वीजा-मुक्त प्रवेश के अलावा आगमन पर वीजा तथा कुछ स्वीकार्य त्वरित प्रवेश व्यवस्थाएँ शामिल हो सकती हैं।

लेकिन भारत सरकार ने 12 अगस्त, 2026 को लोकसभा में जो जानकारी दी, वह अधिक सूक्ष्म है। सरकार के मुताबिक, भारतीय नागरिकों को 27 देशों में वास्तविक वीजा-मुक्त प्रवेश, 47 देशों में आगमन पर वीजा और 66 देशों में इलेक्ट्रॉनिक वीजा की सुविधा उपलब्ध है। इलेक्ट्रॉनिक वीजा को Henley हमेशा अपने वीजा-मुक्त स्कोर में नहीं गिनता। क्योंकि अगर यात्रा से पहले सरकारी मंजूरी आवश्यक है तो वह सामान्य वीजा जैसा ही माना जा सकता है।

यह भी जानें -

भारत के लिए वीजा-मुक्त या अपेक्षाकृत सरल प्रवेश वाले महत्वपूर्ण गंतव्यों में भूटान, नेपाल, मलेशिया, थाईलैंड, मालदीव, मॉरीशस, कजाखस्तान, फिजी, रवांडा और कुछ कैरेबियाई तथा प्रशांत देश शामिल हैं; नियम प्रत्येक देश में रहने की अवधि और यात्रा के उद्देश्य के मुताबिक अलग हो सकते हैं। लेकिन भारत के पासपोर्ट की सबसे बड़ी सीमा यह है कि दुनिया के अनेक प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक केंद्रों जैसे कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, अधिकांश यूरोपीय शेंगेन देश, जापान और ऑस्ट्रेलिया के लिए भारतीयों को अभी भी पहले वीजा लेना पड़ता है।


इसलिए 55 गंतव्यों का आंकड़ा देखने में अच्छा लग सकता है। लेकिन पासपोर्ट की वास्तविक उपयोगिता इस बात से भी तय होती है कि वे गंतव्य आर्थिक और व्यावसायिक रूप से कितने महत्वपूर्ण हैं।

भारत की स्थिति इसलिए मध्यम से नीचे की श्रेणी की वैश्विक गतिशीलता कही जा सकती है- पासपोर्ट बहुत कमजोर देशों जैसा नहीं है। लेकिन विकसित यूरोपीय और पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में अंतर अभी बहुत बड़ा है।

यहाँ एक और दिलचस्प बात है। Global Passport Index 2026 नामक दूसरे निजी सूचकांक में भारत को 125वाँ स्थान दिया गया है। जबकि Henley में लगभग 80वाँ। यह अंतर किसी अचानक भारतीय पासपोर्ट के कमजोर या मजबूत होने के कारण नहीं। बल्कि दोनों संस्थाओं की पद्धति अलग होने के कारण है। भारत सरकार ने इसी वजह से ऐसी रैंकिंगों को सार्वभौमिक मानक मानने से इनकार किया है।

2026 में दुनिया के महत्वपूर्ण देशों की Passport ताकत


अगर जुलाई 2026 के नवीनतम Henley आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो तस्वीर बहुत रोचक है। सिंगापुर दुनिया में पहले स्थान पर है और उसके नागरिक 192 गंतव्यों में पहले से वीजा लिए बिना प्रवेश कर सकते हैं। उसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं और लगभग 188 गंतव्यों तक ऐसी सुविधा रखते हैं। स्वीडन 187 के साथ तीसरे और फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन सहित कई यूरोपीय देश 186 गंतव्यों के साथ चौथे स्थान पर हैं।


अगर 15 प्रमुख देशों को तुलना के लिए देखें तो स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है- सिंगापुर-पहला स्थान, 192 गंतव्य।जापान-दूसरा, 188 गंतव्य। दक्षिण कोरिया- दूसरा, 188 गंतव्य। संयुक्त अरब अमीरात-दूसरा, 188 गंतव्य। स्वीडन-तीसरा, 187 गंतव्य। फ्रांस-चौथा, 186 गंतव्य। जर्मनी-चौथा, 186 गंतव्य। इटली-चौथा, 186 गंतव्य। स्पेन-चौथा, 186 गंतव्य। स्विट्जरलैंड-पाँचवाँ, 185 गंतव्य। ब्रिटेन-छठा, 184 गंतव्य। ऑस्ट्रेलिया-सातवाँ, 183 गंतव्य। कनाडा-सातवाँ, 183 गंतव्य। अमेरिका-दसवाँ, 180 गंतव्य। चीन-लगभग 60वाँ, 83 गंतव्य।

इस लिस्ट में भारत को जोड़ें तो भारत लगभग 80वें स्थान और करीब 55 गंतव्यों पर है, जबकि पाकिस्तान 2026 के निचले हिस्से में लगभग 31 गंतव्यों के साथ है।

इन देशों की स्थिति को थोड़ा विस्तार से समझना उपयोगी होगा:


सिंगापुर का पासपोर्ट वर्तमान समय में दुनिया का सबसे शक्तिशाली है। यह सिर्फ इसलिए नहीं कि सिंगापुर समृद्ध देश है। बल्कि इसलिए भी कि उसने दशकों में अत्यंत सक्रिय कूटनीतिक संबंध, भरोसेमंद सीमा और दस्तावेज व्यवस्था तथा लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों के साथ यात्रा समझौते विकसित किए हैं। सिंगापुर के नागरिक के लिए दुनिया के बहुत कम स्थान ऐसे रह जाते हैं, जहाँ पहले से पारंपरिक वीजा लेना आवश्यक हो। जुलाई 2026 में उसका स्कोर 192 है।


जापान और दक्षिण कोरिया दोनों 188 गंतव्यों के साथ विश्व के दूसरे स्थान पर हैं। इनके नागरिकों के लिए यूरोप, उत्तर अमेरिका, एशिया और अनेक अन्य क्षेत्रों की यात्रा अत्यंत आसान है। इनके पासपोर्ट की ताकत उनके आर्थिक विकास, कम अवैध प्रवासन जोखिम, मजबूत राजनयिक संबंधों और उच्च स्तर के अंतरराष्ट्रीय विश्वास से जुड़ी हुई है।

2026 की सबसे उल्लेखनीय कहानी संयुक्त अरब अमीरात की है। वह अब जापान और दक्षिण कोरिया के साथ दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। जुलाई, 2026 तक लगभग 188 गंतव्यों तक बिना पूर्व वीजा पहुँच के साथ UAE ने पिछले दो दशकों में लगभग 60 स्थानों की छलांग लगाई है और 153 अतिरिक्त गंतव्य जोड़े हैं। यह दिखाता है कि पासपोर्ट की शक्ति स्थायी नहीं होती। सक्रिय विदेश नीति और वीजा समझौतों से इसे काफी तेजी से बदला जा सकता है।

इसके साथ ही फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों के पासपोर्ट लगभग 186 गंतव्यों के साथ दुनिया के शीर्ष चार स्तरों में हैं। यूरोपीय संघ और शेंगेन व्यवस्था इनके नागरिकों को पहले ही यूरोप के भीतर अत्यधिक स्वतंत्र आवागमन देती है, और इनके द्विपक्षीय संबंध दुनिया के बड़े हिस्से तक यह सुविधा बढ़ाते हैं।

ब्रिटेन जुलाई 2026 में लगभग 184 गंतव्यों के साथ छठे स्थान के आसपास है। यूरोपीय संघ से बाहर आने के बावजूद ब्रिटिश पासपोर्ट अभी भी विश्व के अत्यंत शक्तिशाली पासपोर्टों में है, हालांकि ऐतिहासिक रूप से उसकी स्थिति में कुछ गिरावट हुई है।

कनाडा और ऑस्ट्रेलिया दोनों लगभग 183 गंतव्यों के साथ सातवें स्थान पर हैं। इनके नागरिकों को अधिकांश विकसित दुनिया तथा बड़ी संख्या में एशियाई और लैटिन अमेरिकी देशों में बहुत आसान प्रवेश मिलता है।

Passport को लेकर अमेरिका की स्थिति


अमेरिका की कहानी विशेष रूप से दिलचस्प है। अमेरिकी पासपोर्ट अत्यंत शक्तिशाली बना हुआ है। लेकिन अब दुनिया में पहले स्थान के आसपास नहीं है। जुलाई 2026 में यह लगभग 180 गंतव्यों और दसवें स्थान पर है। 2014 में अमेरिका Henley सूचकांक में शीर्ष स्थान तक पहुँच चुका था, इसलिए पिछले दशक में उसकी सापेक्ष स्थिति कमजोर हुई है। इसका अर्थ यह नहीं कि अमेरिकी नागरिक अचानक यात्रा नहीं कर सकते; बल्कि दूसरे देशों विशेषकर एशियाई और यूरोपीय देशों ने उससे अधिक वीजा-मुक्त समझौते विकसित कर लिए हैं।

वर्तमान में Passport को लेकर चीन की स्थिति


चीन का मामला और भी रोचक है। आर्थिक और भू-राजनीतिक महाशक्ति होने के बावजूद जुलाई 2026 में उसका पासपोर्ट लगभग 60वें स्थान और 83 गंतव्यों के आसपास है। पिछले एक दशक में चीन ने काफी सुधार किया है और अनेक देशों के साथ वीजा व्यवस्था आसान की है। लेकिन यूरोप के शेंगेन क्षेत्र और अनेक प्रमुख विकसित देशों में चीनी नागरिकों को अभी भी पहले वीजा लेना पड़ता है।

इस तुलना से एक महत्वपूर्ण बात निकलती है, देश की सैन्य ताकत और पासपोर्ट की ताकत समान चीज नहीं हैं। अमेरिका और चीन दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य तथा आर्थिक शक्तियों में हैं, फिर भी सिंगापुर, जापान या कई छोटे यूरोपीय देशों के पासपोर्ट उनसे अधिक यात्रा स्वतंत्रता देते हैं।

तो... सबसे शक्तिशाली Passport कौन-सा है?


जुलाई 2026 के Henley Passport Index के अनुसार सिंगापुर विश्व का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट है - 192 गंतव्य। इसका सीधा सा अर्थ है कि 227 गंतव्यों में से केवल बहुत सीमित स्थानों पर सिंगापुर के नागरिक को पारंपरिक पूर्व वीजा की बाध्यता रहती है। सिंगापुर की सफलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि वह जनसंख्या और क्षेत्रफल में छोटा देश है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पासपोर्ट शक्ति केवल बड़े देश होने की देन नहीं है। राजनीतिक स्थिरता, विदेश नीति, आर्थिक विश्वसनीयता, कम प्रवासन जोखिम, सीमा सुरक्षा और पारस्परिक समझौते अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

सबसे कमजोर Passport कौन-सा है?

दूसरे छोर पर अफगानिस्तान है। 2026 में अफगान पासपोर्ट दुनिया का सबसे कमजोर पासपोर्ट बना हुआ है। वर्ष के अलग-अलग अद्यतनों में उसका Henley स्कोर लगभग 23–24 गंतव्यों के आसपास रहा है। फरवरी की सूची में 24 गंतव्य और अंतिम स्थान दर्ज था, जबकि जून के अद्यतन में 23 बताया गया। इसके ठीक ऊपर सीरिया, इराक, पाकिस्तान और यमन हैं। इसका व्यावहारिक अर्थ बहुत बड़ा है।

अफगान नागरिक को दुनिया के लगभग हर महत्वपूर्ण आर्थिक या विकसित देश में यात्रा करने से पहले वीजा के लिए आवेदन करना पड़ सकता है। आवेदन में अधिक दस्तावेज, सुरक्षा परीक्षण और अस्वीकृति का अधिक जोखिम हो सकता है। यानी दो मनुष्यों के पास केवल अलग-अलग देश के पासपोर्ट होने से उनकी दुनिया में चलने की स्वतंत्रता में लगभग आठ गुना अंतर हो सकता है, सिंगापुर लगभग 192 गंतव्य और अफगानिस्तान लगभग 23–24। पाकिस्तान भी निचली श्रेणी में है। फरवरी 2026 के Henley आंकड़ों में पाकिस्तान और यमन लगभग 31 गंतव्यों और 98वें स्थान पर थे। इराक 29 और सीरिया 26 के आसपास था।

Passport कमजोर होने का क्या अर्थ है?


यह प्रश्न सिर्फ राजनयिक मित्रता का नहीं है। जब कोई देश यह तय करता है कि दूसरे देश के नागरिक बिना वीजा आ सकते हैं या नहीं, तो वह कई चीजें देखता है - क्या वहाँ से बड़ी संख्या में लोग वीजा अवधि से अधिक रुकते हैं? क्या अवैध प्रवासन का जोखिम अधिक है? क्या पासपोर्ट और नागरिक पहचान व्यवस्था विश्वसनीय है? सुरक्षा संबंधी जोखिम क्या हैं? दोनों देशों के रिश्ते कैसे हैं? क्या दूसरा देश भी हमारे नागरिकों को वैसी ही सुविधा देता है? व्यापार और पर्यटन कितना है?

इसीलिए युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर प्रशासन और बड़े पैमाने पर प्रवासन वाले देशों के पासपोर्ट अक्सर नीचे पहुँच जाते हैं। अफगानिस्तान, सीरिया, इराक, यमन और सोमालिया का नीचे होना केवल आर्थिक गरीबी की कहानी नहीं। सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता भी बड़ी वजह हैं। इसके उलट धनी, स्थिर और कम प्रवासन जोखिम वाले देश आसानी से परस्पर वीजा छूट समझौते कर लेते हैं।

भारत 55 और सरकार 27 क्यों कह रही है?

यह सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर है। अगर आप किसी समाचार में पढ़ें कि 'भारतीय पासपोर्ट से 55 देशों में बिना वीजा जा सकते हैं’, तो इसे यह समझना गलत होगा कि 55 देशों में हवाई जहाज से उतरते ही कोई वीजा प्रक्रिया ही नहीं है। Henley की परिभाषा में ऐसे गंतव्य शामिल हो सकते हैं जहाँ वास्तविक वीजा-मुक्त प्रवेश है, जहाँ पहुँचने पर वीजा मिलता है या जहाँ यात्रा से पहले ऐसी सरल इलेक्ट्रॉनिक यात्रा अनुमति मिल जाती है जिसमें पारंपरिक वीजा स्वीकृति नहीं चाहिए।


भारत सरकार ने इसे अलग-अलग करके बताया है - 27 वास्तविक वीजा-मुक्त, 47 आगमन पर वीजा और 66 इलेक्ट्रॉनिक वीजा वाले देश। एक ही देश कभी एक से अधिक सुविधा-श्रेणियों में परिस्थितियों के अनुसार आ सकता है, इसलिए इन तीन संख्याओं को जोड़कर ‘140 देश’ कहना भी सही नहीं होगा। यात्रा की योजना बनाते समय इसलिए किसी पासपोर्ट सूचकांक के बजाय संबंधित देश के दूतावास या आधिकारिक आव्रजन नियम को अंतिम मानना चाहिए, क्योंकि वीजा नीति किसी भी समय बदल सकती है।

क्या शक्तिशाली पासपोर्ट का मतलब वहाँ के नागरिक को दूसरे देश में काम करने का अधिकार भी है?

नहीं। यह बहुत बड़ा भ्रम है।

असल में वीजा-मुक्त प्रवेश का अर्थ सामान्यतः अल्पकालिक पर्यटन या व्यावसायिक यात्रा है, स्थायी निवास या नौकरी का अधिकार नहीं। उदाहरण के लिए किसी यूरोपीय देश का नागरिक बिना वीजा जापान जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह वहाँ जाकर बिना अनुमति नौकरी शुरू कर सकता है। कार्य, अध्ययन और स्थायी निवास के लिए अलग नियम रहते हैं। इसीलिए पासपोर्ट शक्ति को ‘दुनिया में जहाँ चाहे जाकर रहने की स्वतंत्रता’ नहीं समझना चाहिए। यह मुख्यतः सीमा पार करने की सुगमता मापती है।

क्या दुनिया के 190 देशों का मतलब वास्तव में 190 देश ही है?

यह भी थोड़ा तकनीकी प्रश्न है। Henley कुल 227 यात्रा गंतव्यों को गिनता है। क्योंकि इसमें स्वतंत्र देशों के साथ कुछ क्षेत्र और विशेष प्रशासनिक गंतव्य भी आते हैं। दुनिया में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं। लेकिन पासपोर्ट सूचकांक की गणना केवल उस संख्या तक सीमित नहीं रहती। इसीलिए Singapore का 192 स्कोर पढ़ते समय उसे ‘दुनिया के 193 देशों में से 192’ समझना गलत होगा। Henley 227 गंतव्य देखता है।

Passport की ताकत बढ़ाई कैसे जा सकती है?

किसी देश की सरकार अपने नागरिकों के पासपोर्ट को मजबूत करने के लिए दूसरे देशों से वीजा छूट समझौते, पारस्परिक प्रवेश सुविधा और आगमन-वीजा व्यवस्था पर बातचीत करती है। साथ ही सुरक्षित जैवमितीय पासपोर्ट, विश्वसनीय नागरिक डेटाबेस और अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों का पालन भी विश्वास बढ़ा सकता है।भारत सरकार ने अगस्त 2026 में कहा है कि वह भारतीय नागरिकों के लिए और अधिक वीजा-मुक्त तथा सरल प्रवेश व्यवस्थाएँ हासिल करने के लिए दूसरे देशों से लगातार बातचीत कर रही है और भारतीय पासपोर्ट की सुरक्षा सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन के मानकों के अनुरूप उन्नत किया जा रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात दिखाता है कि यह रणनीति कितनी प्रभावी हो सकती है। दो दशकों में उसकी रैंक लगभग 60 स्थान बढ़ी और जुलाई 2026 में वह दुनिया में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान तक पहुँच गया।

भारत की स्थिति को कैसे देखना चाहिए?

अगर केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और कुछ कमजोर पासपोर्टों से तुलना करें तो भारत की स्थिति काफी बेहतर दिखाई देती है। लेकिन अगर भारत की तुलना उसके आर्थिक आकार और वैश्विक महत्व के अनुरूप देशों से करें तो भारतीय पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता अभी अपेक्षाकृत कमजोर है।

सिंगापुर 192, जापान 188, UAE 188, जर्मनी और फ्रांस 186, ब्रिटेन 184, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया 183, अमेरिका 180 और चीन 83 के आसपास है; भारत करीब 55 पर है। यही अंतर बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में होने के बावजूद उसके नागरिकों की वीजा-मुक्त वैश्विक आवाजाही अभी उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।

लेकिन इसे सिर्फ दूसरे देश भारत को सम्मान नहीं देते’ जैसे भावनात्मक निष्कर्ष से जोड़ना भी गलत होगा। वीजा नीति में कूटनीतिक संबंधों के साथ प्रवासन, प्रति व्यक्ति आय, वीजा अवधि से अधिक रुकने का इतिहास, सुरक्षा मूल्यांकन, शरण आवेदन और पारस्परिकता जैसी व्यावहारिक बातें भी शामिल होती हैं।


इसलिए किसी देश के पासपोर्ट की ताकत दरअसल उस देश की पूरी शक्ति नहीं, बल्कि दुनिया उस देश के सामान्य नागरिक को अपनी सीमाओं पर कितनी सहजता से स्वीकार करती है- उसका एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

शायद पासपोर्ट शक्ति को समझने का सबसे सरल तरीका यही है- पासपोर्ट जितना शक्तिशाली, दुनिया के दरवाजों पर पहले से अनुमति माँगने की आवश्यकता उतनी कम। लेकिन यह यात्रा की सुविधा का पैमाना है, किसी राष्ट्र की संपूर्ण आर्थिक, सैन्य या सभ्यतागत शक्ति का प्रमाणपत्र नहीं।


Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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