ट्रंप-मोदी की दोस्ती करेगी धमाका...अब भारत में धड़ाधड़ बनेंगे तेजस Mark1A जेट, अमेरिका की टेक्नोलॉजी डील से भारतीय रक्षा को फायदा

India US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रक्षा क्षेत्र के लिए अहम है। इससे तेजस फाइटर जेट के इंजन सप्लाई और सैन्य तकनीक सहयोग में गति मिलेगी।

Akriti Pandey
Published on: 4 Feb 2026 11:38 AM IST (Updated on: 4 Feb 2026 11:39 AM IST)
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India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर इन दिनों काफी चर्चा हो रही है। आम तौर पर इस डील को भारत की रूस से तेल खरीद और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसका एक बेहद अहम पहलू रक्षा क्षेत्र से भी जुड़ा हुआ है। यह समझौता भारत के डिफेंस सेक्टर को नई गति दे सकता है, खासकर सैन्य तकनीक और लड़ाकू विमानों के इंजन के मामले में।

मिलिट्री टेक्नोलॉजी सेक्टर को मिल सकती है बड़ी राहत

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा मिलिट्री टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। भारत के कई अहम रक्षा प्रोजेक्ट्स अमेरिका के साथ बेहतर संबंधों पर निर्भर हैं। इनमें सबसे प्रमुख है तेजस फाइटर जेट Mark-1A के लिए जरूरी अमेरिकी इंजन की सप्लाई। इस इंजन के बिना तेजस प्रोग्राम की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

तेजस Mark-1A इंजन सप्लाई में देरी

पिछले साल भारत और अमेरिका के रिश्तों में आई खटास के बाद तेजस Mark-1A फाइटर जेट के लिए इंजन की सप्लाई में देरी हुई। इससे अगली पीढ़ी के फाइटर जेट तेजस Mark-2 के लिए इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी सवाल खड़े हो गए। ये दोनों प्रोजेक्ट भारत की वायु शक्ति के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अमेरिकी इंजन के आधार पर करीब 500 फाइटर जेट बनाने की योजना पर काम कर रही है।

GE F-414 इंजन पर आधारित है तेजस Mark-2

भारत-अमेरिका सैन्य तकनीकी सहयोग जून 2023 में एक अहम मोड़ पर पहुंचा था, जब दोनों देशों ने जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के F-414 एयरो-इंजन के उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए जॉइंट वेंचर पर सहमति जताई थी। तेजस Mark-2 फाइटर जेट की पूरी डिजाइन और योजना इसी इंजन के स्पेसिफिकेशंस पर आधारित है। इस जेट की पहली उड़ान इसी साल प्रस्तावित है।

भारत में क्यों बनी अनिश्चितता

अमेरिका के साथ संबंध कमजोर होने के बाद तेजस प्रोजेक्ट को लेकर भारत में अनिश्चितता बढ़ गई थी। HAL को इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए ट्रंप प्रशासन की मंजूरी की जरूरत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इंजन तकनीक का ट्रांसफर अगले 4-5 दशकों तक भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग की दिशा तय करेगा।

रिश्तों में सुधार की उम्मीद

ट्रेड डील की घोषणा से पहले अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। हालांकि ट्रंप प्रशासन के दौरान रिश्तों में तनाव का असर रक्षा संबंधों पर भी दिखा। अब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ और संबंध सुधारने के संकेतों के बाद स्थिति बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Akriti Pandey

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