'सिंधु जल संधि' पर भारत ने हेग कोर्ट को दिखाया ठेंगा, न्योता देने के बाद भी नहीं गया, पाकिस्तान की बढ़ी धड़कनें

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि विवाद में भारत ने हेग मध्यस्थता अदालत में पेश होने से इनकार किया, जबकि पाकिस्तान ने जल परियोजनाओं पर आपत्ति जताई।

Akriti Pandey
Published on: 11 Feb 2026 12:53 PM IST (Updated on: 11 Feb 2026 12:53 PM IST)
Indus Waters Treaty
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Indus Waters Treaty

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद फिर गरमाया है। हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (Permanent Court of Arbitration) ने कहा है कि भारत ने पाकिस्तान द्वारा शुरू किए गए आर्बिट्रेशन में सुनवाई में हिस्सा लेने का न्योता ठुकरा दिया। अदालत ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे चरण की सुनवाई 3 फरवरी को पूरी हो गई, लेकिन भारत इसमें पेश नहीं हुआ।

भारत-पाकिस्तान के बीच पिछली घटनाएं

सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में 1960 में समझौता हुआ था। भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया था। पाकिस्तान लगातार भारत के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स और नदियों के डिज़ाइन पर आपत्ति जता रहा है। उनका कहना है कि भारत ने साझा जल संसाधनों से जुड़े ट्रीटी के तहत तय लिमिट का उल्लंघन किया है।

चिनाब नदी परियोजनाओं और भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने चिनाब नदी पर सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसकी लागत लगभग 5,129 करोड़ रुपये है। केन्द्र सरकार ने प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। पाकिस्तान ने इस परियोजना की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी मध्यस्थता अदालत को मान्यता नहीं देता और अदालत के आदेशों को अवैध मानता है। भारत केवल ‘तटस्थ विशेषज्ञ’ की प्रक्रिया को कानूनी मानता है।

अदालत की कार्रवाई और भारत का रुख

हेग की अदालत ने नोट किया कि भारत बार-बार न्योता मिलने के बावजूद सुनवाई में भाग नहीं ले रहा है। अदालत ने पाकिस्तान की तरफ से शुरू किए गए दूसरे चरण की सुनवाई पूरी कर ली और भारत को किशनगंगा और बगलिहार परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी और ऑपरेशनल डेटा जमा करने का निर्देश दिया था, जिसकी समयसीमा 9 फरवरी 2026 थी। भारत ने इसे खारिज कर दिया।

भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बंद नहीं करता, तब तक संधि पर सामान्य चर्चा संभव नहीं है। इसके अलावा, भारत किसी भी मध्यस्थता अदालत के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है। भारत का कहना है कि कोर्ट की वैधता संधि के नियमों के खिलाफ है और यह अदालत अवैध रूप से गठित की गई है।

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Akriti Pandey is a journalist with more than three years of experience in the media industry. She holds a degree in Mass Communication and Journalism and specializes in writing on education, lifestyle, health, and astrology-related topics. Known for her reader-focused approach and engaging storytelling, Akriti is passionate about creating informative and accessible content. In her free time, she enjoys writing, sports, and traveling.

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