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Iran Internet Restoration: जनवरी से ठप डिजिटल सेवाएं फिर शुरू होंगी, ईरान सरकार ने दी मंजूरी
Iran Internet Restoration: ईरान में 87 दिनों के डिजिटल ब्लैकआउट के बाद इंटरनेट सेवा बहाल करने की मंजूरी दी गई है। जनवरी 2026 से ठप आम इंटरनेट और डिजिटल सेवाएं फिर शुरू होने की उम्मीद है।
Iran Internet Restoration (Image Credit-Social Media)
Iran Internet Restoration: ईरान में लंबे समय से डिजिटल ब्लैकआउट और इंटरनेट सेवा आम जनता के लिए पूरी तरह से ठप हो गई थी। ईरान में इस साल की शुरुआत में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन और फिर अमेरिका-इजरायल की ओर से किए गए हमले के बाद से इंटरनेट और संचार सेवा पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। हालांकि, 87 दिनों के बाद इन सेवाओं को फिर से बहाल करने की मंजूरी दी गई है।
ईरान इंटरनेशनल मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, ईरान के अधिकारियों ने 87 दिनों के डिजिटल ब्लैकआउट और ग्लोबल इंटरनेट से अलग-थलग रहने के बाद सोमवार को बताया कि इंटरनेट एक्सेस को जनवरी 2026 से पहले वाली स्थिति में वापस लाने की मंजूरी दे दी है।
जानकार सूत्रों के हवाले से ईरानी मीडिया ने बताया कि यह फैसला उपराष्ट्रपति मोहम्मदरेजा आरिफ की अध्यक्षता में सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस की मीटिंग में लिया गया।
अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में इंटरनेट एक्सेस काट दिया गया है। इससे पहले, 8 और 9 जनवरी के आसपास देश भर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी एक्सेस में रुकावट आई थी।
इसके अलावा, ईरान इंटरनेशनल ने शारघ अखबार की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ईरान में लंबे समय से इंटरनेट पर रोक की वजह से युवा उद्यमियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल करके कम लागत वाले बिजनेस बनाने का एक दुर्लभ मौका बंद हो रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये पाबंदियां डिजिटल लेबर्स की एक पीढ़ी को कमजोर कर रही हैं।
रिपोर्ट में बताए गए कस्टम डेटा के मुताबिक, 2025 में ईरान के मोबाइल फोन इंपोर्ट में तेजी से गिरावट आई। कमर्शियल इंपोर्ट घटकर लगभग 8.4 मिलियन डिवाइस रह गया, जिनकी कीमत लगभग 1.6 बिलियन डॉलर थी, जबकि एक साल पहले यह 11.4 मिलियन फोन था, जिनकी कीमत लगभग 2.5 बिलियन डॉलर थी।
इससे इतर ईरानी मीडिया ने सोमवार को केशम आइलैंड पर एयर डिफेंस एक्टिविटी की आवाजें आने की खबर दी, लेकिन कहा कि आवाजें किस तरह की हैं, यह अभी साफ नहीं है और किसी भी आधिकारिक संगठन ने इससे संबंधित कारणों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।


