खामेनेई की अंतिम सलामी में भारत की एंट्री, दो बड़े प्रतिनिधि करेंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शिरकत

Ayatollah Ali Khamenei:ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की याद में 4 जुलाई 2026 से बड़ा श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है, जो कई दिनों तक चलेगा और इसमें कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

Harsh Sharma
Published on: 29 Jun 2026 7:17 PM IST
खामेनेई की अंतिम सलामी में भारत की एंट्री, दो बड़े प्रतिनिधि करेंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शिरकत
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Ayatollah Ali Khamenei: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की याद में एक बड़ा शोक और श्रद्धांजलि कार्यक्रम 4 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। यह आयोजन कई दिनों तक चलेगा और इसमें दुनिया भर से बड़े स्तर पर लोग शामिल होने की संभावना है। भारत की ओर से इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा के शामिल होने की खबर सामने आई है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार दी गई है।

कई दिनों तक चलेगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम

ईरान में यह अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि समारोह 4 जुलाई से 9 जुलाई तक अलग-अलग शहरों में आयोजित किया जाएगा। इसमें लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसाला प्रार्थना हॉल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को राजधानी तेहरान और मध्य ईरान के शहर कोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। 9 जुलाई को यह कार्यक्रम उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में संपन्न होगा, जहां खामेनेई को दफनाया जाएगा। उन्हें शिया मुसलमानों के आठवें इमाम इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

पीएम मोदी को भी मिला था निमंत्रण

ईरान ने इस कार्यक्रम के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया था। हालांकि, आधिकारिक रूप से उनकी भागीदारी को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। ईरान का यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

अमेरिका और इजरायल के हमले में हुई थी मौत

रिपोर्ट्स के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एयरस्ट्राइक में हुई थी। उनकी मौत की खबर के बाद ईरान में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला। मार्च की शुरुआत में उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया था। खामेनेई के निधन को देश के लिए एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा गया।

ईरान में बढ़ा तनाव और संघर्ष

खामेनेई की मौत के बाद ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। इस घटना को ईरान के 46 साल पुराने शिया धर्मतांत्रिक शासन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व के कई इलाकों में तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई थी।

परिवार को भी हुआ था बड़ा नुकसान

सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस हमले में खामेनेई के परिवार को भी भारी नुकसान हुआ था। उनके चार करीबी रिश्तेदारों की मौत हुई थी, जिनमें उनकी बेटी, एक पोता और दामाद शामिल थे।

दुनिया की नजर इस कार्यक्रम पर

अब 4 जुलाई से शुरू होने वाले इस बड़े कार्यक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। इसमें कई देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि यह आयोजन ईरान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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