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समंदर में ईरान की नाकेबंदी! ओमान की खाड़ी में फंसे 53 मिलियन बैरल तेल, $4.8 बिलियन का हुआ भारी नुकसान
Iran oil Blockade: ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी के चलते ईरान के 53 मिलियन बैरल तेल फंस गए हैं, जिससे करीब 4.8 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ है।
Iran oil Blockade: मध्य पूर्व के समंदर में इस समय जो हो रहा है, उसने पूरी दुनिया की सांसें रोक दी हैं। अमेरिका ने ईरान की तेल अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ठप करने के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिससे निकलना तेहरान के लिए लगभग नामुमकिन साबित हो रहा है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने एक ऐसी नाकेबंदी की है, जिसने ईरान के अरबों डॉलर के खजाने को समंदर की लहरों के बीच ही कैद कर दिया है। पेंटागन के ताजा अनुमानों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, जिसमें बताया गया है कि ईरान को अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक झटका लगा है। यह पूरी रिपोर्ट Axios द्वारा साझा की गई है, जिसमें अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई को ईरान पर बनाया गया अब तक का सबसे "अभूतपूर्व आर्थिक दबाव" करार दिया है।
समंदर में कैद हुआ 53 मिलियन बैरल तेल का खजाना
इस पूरे विवाद की शुरुआत 13 अप्रैल से हुई, जब अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में अपनी सैन्य नाकेबंदी को पूरी तरह से लागू कर दिया। इसके बाद से ईरान के लिए तेल की एक बूंद भी बेचना मुश्किल हो गया है। पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, समंदर में इस समय ईरान के 31 विशालकाय टैंकर फंसे हुए हैं। इन टैंकरों में करीब 53 मिलियन बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है, जो अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन टैंकरों में मौजूद माल की कुल कीमत कम से कम 4.8 बिलियन डॉलर है। यह वह पैसा है जो सीधे ईरान के खजाने में जाना था, लेकिन अब यह तेल केवल जहाजों के टैंकों में सड़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि अब तक 40 से ज्यादा ऐसे जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है, जो इस इलाके से तेल लेकर गुजरने की कोशिश कर रहे थे।
ईरान के पास तेल रखने की जगह भी नहीं बची
अमेरिकी नाकेबंदी का असर अब इतना भयानक हो गया है कि ईरान के पास अपने तेल को रखने के लिए जमीन पर कोई जगह नहीं बची है। ईरान के सभी बड़े भंडारण केंद्र और टंकियां अपनी पूरी क्षमता तक भर चुकी हैं। जब जमीन पर जगह नहीं बची, तो ईरान को मजबूरन अपने पुराने और खटारा जहाजों को 'फ्लोटिंग स्टोरेज यूनिट्स' यानी तैरते हुए गोदामों के रूप में इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ईरान न तो अपना तेल बेच पा रहा है और न ही उसे कहीं सुरक्षित रख पा रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की आखिरी कोशिश में कुछ टैंकरों ने चीन तक पहुंचने के लिए बहुत ही लंबे और अत्यधिक महंगे रास्तों का सहारा लिया है, जिससे उनके तेल की लागत कई गुना बढ़ गई है।
अमेरिकी दबाव और शांति वार्ता का भविष्य
अमेरिका द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई के पीछे का असली मकसद ईरान को मजबूर करना है ताकि वह जारी युद्ध को खत्म करने के लिए तैयार हो जाए। पेंटागन के अधिकारियों का मानना है कि जब तक ईरान पर यह आर्थिक दबाव बना रहेगा, तब तक उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कम होती जाएगी। हालांकि, दोनों देशों के बीच शांति वार्ता कई बार शुरू हुई लेकिन अलग-अलग कारणों से हर बार बीच में ही रुकती रही है। इसी के चलते अमेरिका ने अब सैन्य शक्ति के जरिए ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने का फैसला किया है। समंदर में हुई इस कार्रवाई के दौरान अमेरिकी सेना ने दो बड़े टैंकरों को पूरी तरह से जब्त भी कर लिया है, जिससे ईरान की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इस अभूतपूर्व संकट से निकलने के लिए भविष्य में क्या रास्ता अपनाता है।


