ईरान पर हमले की उलटी गिनती शुरू? अमेरिकी सेना तैयार, लेकिन ट्रंप के फैसले पर सस्पेंस

Iran-US Tension: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का खतरा बढ़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना 96 घंटे में बड़े अभियान के लिए तैयार हो सकती है। जानें ट्रंप, इजरायल और ईरान की रणनीति।

Shalni Kumari
Published on: 29 Oct 2026 12:36 PM IST
Donald Trump
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Iran-US Tension: अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव (Military Conflict) का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के निर्देश के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में तैनात अमेरिकी सेना कथित तौर पर 96 घंटे के भीतर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान (Military Operation) के लिए तैयार है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के पास हमले के लिए जरूरी सैन्य संसाधन पहले से ही क्षेत्र में मौजूद हैं। हालांकि, ट्रंप ने अभी तक हमले को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया है। संभावित कार्रवाई का दायरा केवल रडार और मिसाइल ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ईरान के ऊर्जा ढांचे (Energy Infrastructure), सैन्य ठिकानों (Military Bases) और परमाणु प्रतिष्ठानों (Nuclear Facilities) को निशाना बनाने के विकल्प भी शामिल हैं।

एक अमेरिकी अधिकारी ने इस संभावित कार्रवाई को बड़े अभियान के तौर पर बताया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ फिर सैन्य मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहा है या यह दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है?

मध्यावधि चुनाव के बाद हमले की आशंका

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के खिलाफ नए हमले का फैसला इस साल के अंत से पहले लिया जा सकता है। हालांकि, अमेरिका के मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) के बाद सैन्य कार्रवाई की संभावना अधिक मानी जा रही है।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप पहले भी कुछ सैन्य अभियानों के पक्ष में दिखाई दिए हैं, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। इसी वजह से संभावित हमले की तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

पेंटागन (Pentagon) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, रक्षा विभाग (Department of Defense) की जिम्मेदारी सैन्य विकल्प तैयार रखना और राष्ट्रपति के आदेश मिलने पर उन्हें लागू करना है। फिलहाल, हमले की तैयारी और अंतिम राजनीतिक मंजूरी के बीच अंतर बना हुआ है।

अमेरिकी हमले पर ईरान और हूती दे सकते हैं जवाब

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence Agencies) का आकलन है कि यदि अमेरिका और इजरायल (Israel) ईरान पर दोबारा हमला करते हैं, तो तेहरान और यमन के हूती विद्रोही (Houthi Rebels) जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। खुफिया आकलन से परिचित सूत्रों के अनुसार, दोनों संभावित हमलों को गंभीरता से ले रहे हैं।

ईरान पर हमला होने की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों (US Military Bases) को निशाना बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई मध्य पूर्व तक सीमित रहने के बजाय दूसरे देशों तक भी फैल सकती है। इससे क्षेत्रीय संघर्ष (Regional Conflict) के व्यापक युद्ध में बदलने का जोखिम बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने 23 अक्टूबर को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भेजे एक ज्ञापन में कहा था कि ईरान ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने के प्रयास बढ़ा दिए हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि मध्य पूर्व और कुछ अन्य देशों में हमले की साजिशें उन्नत चरण में पहुंच गई हैं।

हालांकि, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का आकलन है कि फिलहाल ईरान और हूती विद्रोही अमेरिका या इजरायल पर पहले हमला करने की संभावना नहीं रखते। लेकिन यदि अमेरिकी या इजरायली सेना पहले कार्रवाई करती है, तो जवाबी हमले की आशंका बनी हुई है।

इजरायल ने अमेरिका से मांगा था संयुक्त हमले का समर्थन

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल संभावित सैन्य कार्रवाई को देखते हुए अपनी तैयारियां कर रहा था और उसने ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका का समर्थन मांगा था। इजरायल के एक सुरक्षा सूत्र के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) चुनाव से पहले ईरान पर संयुक्त हमले (Joint Military Strike) के लिए ट्रंप को मनाने की कोशिश कर रहे थे।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस दावे को ‘फर्जी खबर’ बताते हुए खारिज कर दिया।

सूत्र के मुताबिक, ट्रंप के पीछे हटने की एक वजह इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर की चेतावनी भी थी। उन्होंने अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन को आगाह किया था कि हमले से इजरायल के चुनाव प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें टालने की स्थिति पैदा हो सकती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप समेत वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने इजरायल से फिलहाल अतिरिक्त हमले रोकने को कहा था। हालांकि, भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियान की संभावना से इनकार नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, इजरायल ने तत्काल हमले की योजना टाल दी है, लेकिन अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई की तैयारी जारी रखी है।

मिसाइल रक्षा भंडार पर दबाव, अमेरिकी मदद अहम

इजरायल की ओर से तत्काल हमले टालने के पीछे एक अन्य वजह ईरान और हूती विद्रोहियों की संभावित जवाबी कार्रवाई से बचाव के लिए अमेरिकी सहायता की जरूरत बताई गई है।

मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के मुताबिक, पिछले संघर्ष के दौरान इजरायल के मिसाइल रक्षा भंडार (Missile Defense Stockpile) पर दबाव पड़ा है। ऐसे में यदि सैन्य टकराव दोबारा बढ़ता है, तो अमेरिकी मदद इजरायल के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस बीच, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसी सप्ताह एक सैन्य स्नातक समारोह में कहा कि उन्होंने सेना, मोसाद (Mossad) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने के निर्देश दिए हैं।

फिलहाल, ट्रंप की ओर से ईरान पर नए हमले को लेकर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। लेकिन अमेरिकी सैन्य तैयारियों, इजरायल की रणनीति और ईरान तथा हूती विद्रोहियों की संभावित जवाबी कार्रवाई के संकेतों ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका को फिर तेज कर दिया है।

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