तेल ही नहीं, जिंक-लेड के खजाने पर भी दुनिया की नजर! आखिर ईरान में ऐसा क्या है?

Iran Zinc Reserves: जानिए ईरान के जिंक, लेड और कॉपर के विशाल भंडार क्यों दुनिया के लिए अहम हैं। चीन, रूस और वैश्विक खनिज राजनीति से जुड़ी पूरी जानकारी।

Harsh Sharma
Published on: 10 July 2026 4:58 PM IST
तेल ही नहीं, जिंक-लेड के खजाने पर भी दुनिया की नजर! आखिर ईरान में ऐसा क्या है?
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Iran Zinc Reserves: जब भी ईरान की बात होती है तो सबसे पहले तेल, गैस और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र होता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की असली ताकत सिर्फ ऊर्जा संसाधनों तक सीमित नहीं है। देश के पास जिंक, लेड और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का भी बड़ा भंडार मौजूद है। आज के समय में ये खनिज उद्योग, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी ताकतें ईरान के खनिज संसाधनों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

प्रतिबंधों के बावजूद जारी है खनिज कारोबार

अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने ईरान पर लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इसका असर ईरान के व्यापार पर जरूर पड़ा है, लेकिन खनिज क्षेत्र पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ। ईरान ने चीन और कुछ अन्य एशियाई देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर अपने खनिजों का निर्यात जारी रखा है। यही कारण है कि पश्चिमी कंपनियां भले ही वहां काम न करें, लेकिन एशियाई बाजार ईरान के लिए अहम बने हुए हैं।

जिंक और लेड के बड़े भंडार का मालिक है ईरान

ईरान के पास करीब 22 करोड़ टन से अधिक जिंक और लेड अयस्क का भंडार बताया जाता है। यह दुनिया के कुल भंडार का लगभग 5 प्रतिशत माना जाता है। इसी वजह से ईरान एशिया के प्रमुख जिंक और लेड उत्पादक देशों में शामिल है। देश की सबसे प्रसिद्ध खदानों में अंगौरान और मेहदियाबाद का नाम आता है। अंगौरान खदान को मध्य पूर्व की सबसे बड़ी जिंक और लेड खदानों में गिना जाता है। यहां उच्च गुणवत्ता वाले खनिज बड़ी मात्रा में मौजूद हैं, जिनका उपयोग कई उद्योगों में किया जाता है।

चीन और रूस की क्यों है दिलचस्पी?

ईरान की खदानों का संचालन मुख्य रूप से स्थानीय सरकारी और निजी कंपनियां करती हैं। हालांकि, चीन और रूस इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार माने जाते हैं। चीन ईरान से जिंक और लेड से जुड़े उत्पादों का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा चीनी कंपनियां खनिज प्रसंस्करण और स्मेल्टर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी सहयोग करती रही हैं। वहीं, रूस ने भी खनिज खोज और निवेश से जुड़ी कई परियोजनाओं में रुचि दिखाई है। दोनों देशों के साथ मजबूत रिश्तों की वजह से ईरान प्रतिबंधों के बावजूद अपने खनिज कारोबार को आगे बढ़ाने में सफल रहा है।

लेड और जिंक इतने जरूरी क्यों हैं?

लेड और जिंक आधुनिक उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण धातुएं हैं। लेड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल बैटरियां बनाने में होता है। इसके अलावा यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, एक्स-रे मशीनों और परमाणु संयंत्रों में भी उपयोग किया जाता है। दूसरी ओर, जिंक का सबसे बड़ा उपयोग स्टील और लोहे को जंग से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यह ब्रास, पेंट, रबर, दवाइयों, कॉस्मेटिक उत्पादों और कई औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में भी काम आता है। मानव शरीर के लिए भी जिंक एक जरूरी खनिज माना जाता है।

क्यों बढ़ रहा है ईरान के खनिजों का महत्व?

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में जिन देशों के पास महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार होगा, उनकी वैश्विक रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, ऊर्जा भंडारण और आधुनिक तकनीक के विस्तार के साथ इन खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से ईरान केवल तेल और गैस के कारण ही नहीं, बल्कि अपने विशाल जिंक, लेड और अन्य खनिज संसाधनों की वजह से भी दुनिया की रणनीतिक और आर्थिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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