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Israel Election Exit Poll 2026: किसी को बहुमत नहीं, सरकार की चाबी अरब दलों के पास
Israel Election Exit Poll 2026: इज़रायल चुनाव 2026 के एग्ज़िट पोल में नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत दूर है। जानिए गादी आइज़नकोट, अरब दलों की सीटों और सरकार गठन के समीकरण।
Israel Election Exit Poll 2026 Live Update
Israel Election Exit Poll 2026 Update: इज़रायल में मंगलवार को हुए संसदीय चुनाव के बाद जारी एग्ज़िट पोल ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके राजनीतिक विरोधियों के बीच बेहद करीबी मुकाबले की तस्वीर पेश की है। अधिकांश टेलीविजन चैनलों के सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिखाई दे रही है, लेकिन किसी भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों का स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता दिख रहा। पूर्व सेनाध्यक्ष गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों और नेतन्याहू समर्थक दलों के बीच सीटों का अंतर इतना कम है कि अंतिम मतगणना के परिणाम और छोटे दलों की स्थिति नई सरकार के गठन में निर्णायक हो सकते हैं। चुनाव के बाद इज़रायल के चैनल 11, चैनल 12 और चैनल 13 ने अपने शुरुआती एग्ज़िट पोल में विपक्षी गठबंधन को मामूली बढ़त दिखाई थी, लेकिन रात में संशोधित अनुमानों के बाद दोनों खेमों की सीटें लगभग बराबर हो गईं। 
इज़रायल के प्रमुख समाचार पत्र 'इज़रायल हायोम', आर्थिक समाचार पत्र 'कैलकलिस्ट', 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' और अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यम 'द गार्डियन' की रिपोर्टों के अनुसार संसद में सबसे बड़े दल की स्थिति में लिकुड की बढ़त और गठबंधन की सरकार बनाने की क्षमता दो अलग प्रश्न बन गए हैं। इज़रायल की संसद नेसेट में 120 सीटें हैं। यहाँ राजनीतिक दलों को प्राप्त वोटों के अनुपात में सीटें आवंटित होती हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। संशोधित एग्ज़िट पोल में मुख्य राजनीतिक गठबंधनों को लगभग 50 से 52 सीटों के आसपास दिखाया गया है, जबकि अरब राजनीतिक दलों को 17 से 18 सीटें मिलने का अनुमान है। इस कारण चुनाव परिणाम आने के बाद दलों के बीच राजनीतिक समझौते और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया विशेष महत्व रखेगी। 
चैनल 11 और चैनल 13 के संशोधित एग्ज़िट पोल में दोनों गठबंधन 51-51 सीटों पर
इज़रायल के सार्वजनिक प्रसारक 'कान-11' और समाचार चैनल 13 के संशोधित एग्ज़िट पोल के अनुसार नेतन्याहू समर्थक गठबंधन और विपक्षी गठबंधन, दोनों को 51-51 सीटें मिलने का अनुमान है। शेष 18 सीटें अरब राजनीतिक दलों को मिलती दिखाई गई हैं। यह स्थिति शुरुआती एग्ज़िट पोल से अलग है, जिनमें विपक्ष के लिए 52 से 53 और नेतन्याहू के गठबंधन के लिए लगभग 50 सीटों का अनुमान सामने आया था। इज़रायली आर्थिक समाचार पत्र 'कैलकलिस्ट' ने 28 अक्टूबर को रात लगभग 2:51 बजे प्रकाशित अपने अद्यतन विवरण में दोनों चैनलों के संशोधित अनुमानों का उल्लेख किया है। 
चैनल 12 के संशोधित एग्ज़िट पोल में नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 52 और विपक्षी गठबंधन को 50 सीटें दी गई हैं। इस चैनल ने अपने पहले अनुमान में लिकुड को 24 सीटें दी थीं, जिसे बढ़ाकर 27 कर दिया गया। आइज़नकोट की यशार पार्टी की अनुमानित सीटें 22 से घटाकर 21 कर दी गईं। इसी संशोधन में शास पार्टी को सात और डेमोक्रेट्स को नौ सीटें दी गईं। चैनल 12 का यह संशोधित अनुमान भी किसी गठबंधन को सरकार बनाने का बहुमत नहीं देता। 
चैनल 14 का अलग अनुमान, नेतन्याहू समर्थक दलों को 62 सीटें
इज़रायल के चैनल 14 के संशोधित एग्ज़िट पोल ने अन्य तीन प्रमुख चैनलों से अलग तस्वीर पेश की है। 'इज़रायल हायोम' की रिपोर्ट के अनुसार चैनल 14 ने नेतन्याहू समर्थक दक्षिणपंथी गठबंधन को 62 सीटें मिलने का अनुमान दिया है। यदि वास्तविक मतगणना में ऐसा परिणाम आता है और सभी संबंधित दल एक साथ सरकार बनाने पर सहमत रहते हैं, तो यह 61 सीटों के बहुमत के आँकड़े से एक सीट अधिक होगा। हालाँकि अन्य प्रमुख चैनलों के अनुमान इससे काफी अलग हैं। इसलिए चैनल 14 के अनुमान को अंतिम चुनाव परिणाम मानना उचित नहीं होगा। 
चैनल 14 के शुरुआती अनुमान में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 30 सीटें और आइज़नकोट की यशार पार्टी को 19 सीटें दी गई थीं। इस चैनल ने दक्षिणपंथी गठबंधन को पहले 60 सीटें दिखाई थीं। संशोधित अनुमान में यह संख्या 62 तक पहुँच गई। अलग-अलग सर्वेक्षणों में इतना अंतर इज़रायल की चुनावी प्रणाली और दलों को मिलने वाले वोटों के अनुमानों की संवेदनशीलता को भी सामने लाता है। विशेष रूप से छोटे दलों के लिए निर्धारित न्यूनतम मत प्रतिशत अंतिम सीट वितरण पर असर डाल सकता है। 
रिकॉर्ड मतदान, 77.7 प्रतिशत मतदाताओं ने किया वोट
इज़रायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार 27 अक्टूबर को कुल 77.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पिछले दो दशकों से अधिक समय का सबसे ऊँचा मतदान प्रतिशत है। वर्ष 2022 के संसदीय चुनाव में लगभग 70.6 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस प्रकार इस बार मतदान में लगभग सात प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई। एग्ज़िट पोल में अरब राजनीतिक दलों की सीटों में बढ़ोतरी का अनुमान भी सामने आया है। इससे स्पष्ट होता है कि चुनाव में विभिन्न समुदायों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर दलों के अपने-अपने आकलन महत्वपूर्ण बने हुए हैं। 
सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा तथा पश्चिम एशिया के दूसरे क्षेत्रों में सैन्य संघर्षों के बाद इज़रायल में यह पहला आम चुनाव है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियान और अपने नेतृत्व में लिए गए फैसलों को प्रमुखता दी। दूसरी ओर गादी आइज़नकोट ने सात अक्टूबर की सुरक्षा विफलता की जवाबदेही, सैन्य सेवा में समान भागीदारी और राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव को मुख्य मुद्दा बनाया। युद्ध और सुरक्षा नीति पर दोनों नेताओं के बीच कुछ समानताएँ होने के बावजूद सरकार की जवाबदेही और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर गहरे मतभेद रहे हैं। 
आइज़नकोट ने कहा, जनता ने बदलाव के पक्ष में फैसला दिया
एग्ज़िट पोल जारी होने के बाद पूर्व सेनाध्यक्ष गादी आइज़नकोट ने कहा कि इज़रायल की जनता ने बदलाव के पक्ष में अपना फैसला दिया है। उन्होंने नेतन्याहू की जगह नई सरकार बनाने का प्रयास करने और ऐसी सरकार के गठन की बात कही जो सेना में भर्ती के दायित्व को व्यापक रूप से लागू करे। आइज़नकोट ने संकेत दिया कि वे देश को एक और संसदीय चुनाव की ओर ले जाने के बजाय वर्तमान चुनाव परिणामों के आधार पर सरकार बनाने के लिए पहल करेंगे। उनके राजनीतिक सहयोगी याइर गोलान ने भी परिणामों को सरकार बदलने का अवसर बताया। 
दूसरी ओर नेतन्याहू के सहयोगियों ने यह दलील दी कि अंतिम मतगणना से पहले किसी भी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस बात को प्रमुखता दी कि लिकुड इज़रायल की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और पूर्व रक्षा मंत्री अविगडोर लिबरमैन ने भी एग्ज़िट पोल पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। लिबरमैन ने वास्तविक चुनाव परिणाम आने तक संयम बरतने का आग्रह किया। 
अरब पार्टियों की 18 सीटें, गठबंधन बनाने में बढ़ सकती है अहमियत
इस चुनाव के एग्ज़िट पोल में सबसे उल्लेखनीय राजनीतिक घटनाक्रम अरब पार्टियों की अनुमानित सीटों में वृद्धि है। जॉइंट लिस्ट और मंसूर अब्बास की रा'अम पार्टी को मिलाकर अधिकांश प्रमुख सर्वेक्षणों में 18 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। शुरुआती अनुमानों में कुछ चैनलों ने यह संख्या 17 रखी थी, लेकिन संशोधित एग्ज़िट पोल में 18 सीटों का अनुमान प्रमुखता से सामने आया। ऐसे में दोनों मुख्य यहूदी राजनीतिक गठबंधनों के बहुमत से पीछे रहने की स्थिति में अरब दलों का संसदीय रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाएगा। 
हालाँकि अरब दलों की अनुमानित सीटों को सीधे आइज़नकोट के गठबंधन में जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। विपक्षी गठबंधन में शामिल कई दल अरब पार्टियों के साथ औपचारिक सरकार बनाने को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। विशेष रूप से नफ्ताली बेनेट और उनके राजनीतिक सहयोगियों के लिए यह संवेदनशील प्रश्न है। ऐसी स्थिति में अरब दल किसी सरकार को बाहर से समर्थन देने, किसी प्रस्ताव पर मतदान से अलग रहने या विपक्ष में बैठने जैसे विकल्प चुन सकते हैं। इन संभावनाओं के राजनीतिक परिणाम अलग-अलग होंगे। इसलिए यदि आधिकारिक नतीजे एग्ज़िट पोल के आसपास आते हैं, तो सरकार गठन की बातचीत में इन दलों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। 
अंतिम परिणाम आने में समय, गठबंधन वार्ता लंबी चल सकती है
इज़रायल के संसदीय चुनाव में मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू हो गई है। अभी एग्ज़िट पोल के आधार पर सीटों का अनुमान लगाया जा रहा है। सैनिकों और विशेष मतदान केंद्रों पर पड़े मतपत्रों की गणना के कारण अंतिम परिणाम स्पष्ट होने में समय लग सकता है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार इन श्रेणियों में लगभग छह से साढ़े छह लाख मतदाताओं के वोट शामिल हो सकते हैं। मतगणना के दौरान छोटे दलों की सीटों और मुख्य राजनीतिक गठबंधनों के कुल आँकड़ों में बदलाव संभव है। 
आधिकारिक चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग राजनीतिक दलों से परामर्श करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देंगे जो संसदीय समर्थन जुटाने में सक्षम दिखाई देगा। इज़रायल की संसदीय व्यवस्था में सबसे बड़ी पार्टी के नेता का प्रधानमंत्री बनना अनिवार्य नहीं है। यदि कोई नेता 61 सांसदों का समर्थन जुटा लेता है, तो गठबंधन सरकार का गठन संभव है। लेकिन दोनों प्रमुख खेमों के बीच मौजूदा राजनीतिक मतभेदों को देखते हुए वार्ता जटिल हो सकती है। यदि कोई स्थायी संसदीय बहुमत नहीं बन पाता, तो दोबारा चुनाव की स्थिति भी पैदा हो सकती है। 
इज़रायल की राजनीतिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि गठबंधन वार्ता पूरी होने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रह सकते हैं। इसीलिए एग्ज़िट पोल में उनके गठबंधन को बहुमत से पीछे दिखाए जाने का अर्थ तत्काल सत्ता परिवर्तन नहीं है। वास्तविक सत्ता परिवर्तन तभी होगा जब नई सरकार आवश्यक संसदीय समर्थन के साथ शपथ ग्रहण करेगी। 
इस तरह इज़रायल के चुनाव ने एक बार फिर वहाँ की बहुदलीय संसदीय व्यवस्था की जटिलता को सामने रखा है। लिकुड सबसे बड़ी पार्टी के रूप में दिखाई दे रही है, लेकिन नेतन्याहू समर्थक और विरोधी दलों के बीच बेहद करीबी मुकाबले के कारण नई सरकार का स्वरूप अभी अनिश्चित है। रिकॉर्ड मतदान और अरब पार्टियों की बढ़ी हुई अनुमानित सीटों ने चुनाव के बाद होने वाले राजनीतिक संवाद को विशेष महत्व दे दिया है। अब अगला निर्णायक चरण आधिकारिक मतगणना और उसके बाद संसदीय बहुमत जुटाने की प्रक्रिया होगी।


