इजरायल चुनाव के नतीजे कल, नेतन्याहू को सत्ता बाहर करने को गादी आइजेनकोट अरब दलों का समर्थन

इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराया। विपक्ष ने गादी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया। 53 बनाम 48 सीटों के बीच 19 सीटों वाले अरब दलों के हाथ में सरकार की चाबी।

Alakha Singh
Published on: 3 Nov 2026 10:35 PM IST
इजरायल चुनाव के नतीजे कल, नेतन्याहू को सत्ता बाहर करने को गादी आइजेनकोट अरब दलों का समर्थन
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Israel Election Result 2026: इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। पूर्व सेना प्रमुख और याशर पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री पद का साझा उम्मीदवार बनाने पर विपक्ष के पांच प्रमुख नेताओं ने सहमति जता दी है। सभी दल राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के सामने आइजेनकोट के नाम की सिफारिश करेंगे। बुधवार, 4 नवम्बर 2026 को चुनाव के अंतिम परिणाम घोषित किए जाएंगे।

मंगलवार (3 नवंबर) को तेल अवीव के उत्तर में स्थित हर्जलिया में हुई अहम बैठक के बाद विपक्ष ने साफ कर दिया कि उसका अगला लक्ष्य नेतन्याहू सरकार को हटाकर जल्द से जल्द नई सरकार बनाना है। विपक्ष ने इसे 'नेशनल इमरजेंसी गवर्नमेंट' यानी राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने की पहल बताया है। हालांकि, नेतन्याहू को हटाने की रणनीति पर सहमति के बावजूद सरकार बनाने का रास्ता अभी आसान नहीं है। सबसे बड़ी अड़चन अरब दलों को साथ लेने और उनके समर्थन पर निर्भर रहने को लेकर है।

आइजेनकोट के नाम पर विपक्ष की मुहर, नेतन्याहू को हटाने की तैयारी

हर्जलिया की बैठक में गादी आइजेनकोट, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, यिस्राइल बेतेनु के नेता एविग्दोर लिबरमैन, डेमोक्रेट्स के यायर गोलान और येश अतीद के नेता यायर लैपिड शामिल हुए। बैठक के बाद नेताओं ने संयुक्त रूप से आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने का मौका देने का समर्थन किया।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टियों की बातचीत करने वाली टीमें तत्काल साझा नीतिगत एजेंडा और गठबंधन समझौते तैयार करेंगी। उनका घोषित उद्देश्य 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद बनी नेतन्याहू सरकार को हटाकर एक नई राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार स्थापित करना है।

आइजेनकोट ने सरकार गठन के लिए चार प्रमुख सिद्धांत सामने रखे हैं। इनमें इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में मान्यता, स्वतंत्रता घोषणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, सभी के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा और हमास को आतंकवादी संगठन मानते हुए उसकी सैन्य क्षमता तथा गाजा में उसके शासन को समाप्त करना शामिल है। इन शर्तों के कारण अरब दलों के साथ गठबंधन की संभावनाएं और जटिल हो सकती हैं।

बेनेट ने बैठक के बाद जल्द कार्रवाई की जरूरत बताते हुए कहा कि अब समय गंवाने का मौका नहीं है और विपक्ष को पूरी तेजी से आगे बढ़ना होगा।

53 बनाम 48 सीटें, फिर भी सत्ता की चाबी 19 सीटों वाले अरब दलों के पास

27 अक्टूबर को हुए इजरायल के आम चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायली संसद) में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत है।

अंतिम नतीजों के मुताबिक नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वहीं अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने संयुक्त रूप से 19 सीटें हासिल कीं।

इसका सीधा मतलब है कि नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से आठ सीट दूर है, जबकि विपक्ष को बहुमत तक पहुंचने के लिए 13 और सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अरब दलों के 19 सांसदों का समर्थन मिल जाए तो विपक्ष के पास 67 सीटों का आंकड़ा हो सकता है।

यही वजह है कि चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे अरब दल अब सरकार गठन की पूरी गणित के केंद्र में आ गए हैं। जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने विपक्ष से राजनीतिक वास्तविकता स्वीकार करने और नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए साथ आने की अपील की है।

विपक्ष में ही फूट! अरब दलों के समर्थन पर लिबरमैन और गोलान आमने-सामने

नेतन्याहू के खिलाफ विपक्षी एकजुटता के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी दल अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने को तैयार होंगे?

डेमोक्रेट्स के नेता यायर गोलान अरब दलों को साथ लेने के पक्ष में खुलकर खड़े हैं। उनका कहना है कि अरब पार्टियों को राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखना नस्लवादी सोच है। उन्होंने विपक्षी बैठक से पहले अरब दलों के नेताओं से भी मुलाकात की और अरब समुदाय के इलाकों में बढ़ते अपराध पर कार्रवाई का भरोसा दिया।

दूसरी तरफ एविग्दोर लिबरमैन अरब दलों को सरकार में शामिल करने या उनके बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने के विरोध में हैं। वह नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने के भी पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अरब सांसदों के सहारे सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर उनकी आपत्ति विपक्ष के लिए बड़ा संकट बन सकती है।

अरब दलों ने भी संकेत दिया है कि वे गठबंधन सरकार का हिस्सा बने बिना नेतन्याहू को हटाने के लिए संसदीय स्तर पर सहयोग कर सकते हैं। जॉइंट लिस्ट के नेताओं ने सरकार में शामिल होने के बजाय संसद में बदलाव के लिए समर्थन देने की संभावना जताई है। ऐसे में विपक्ष को केवल आइजेनकोट के नाम पर सहमति नहीं, बल्कि सरकार चलाने के लिए व्यावहारिक समझौता भी करना होगा।

नेतन्याहू ने भी चला दांव, 'व्यापक राष्ट्रीय सरकार' बनाने की पेशकश

विपक्ष की रणनीति के बीच नेतन्याहू भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। सोमवार को उन्होंने अपने नेतृत्व में व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। नेतन्याहू ने दलील दी कि 27 सीटों के साथ उनकी लिकुड पार्टी संसद में सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए सरकार बनाने का पहला अधिकार उनके पास होना चाहिए।

हालांकि, विपक्ष का कोई प्रमुख नेता उनके साथ जाने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहा है। नेतन्याहू ने अरब बहुल पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना को भी खारिज किया है। उन्होंने इन दलों पर इजरायल के यहूदी राष्ट्र के अस्तित्व को न मानने और आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

नेतन्याहू के लिए यह चुनावी नतीजा बड़ा राजनीतिक झटका है। पिछले कार्यकाल में उनके गठबंधन के पास 68 सीटें थीं, जो अब घटकर 53 रह गई हैं। यानी सत्ता में बने रहने के लिए उन्हें नए सहयोगियों की जरूरत है।

बुधवार से राष्ट्रपति हर्जोग की बैठकें, आइजेनकोट को मिल सकता है पहला मौका

अब सरकार गठन की अगली निर्णायक प्रक्रिया राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के साथ शुरू होने वाली है। राष्ट्रपति बुधवार और गुरुवार को संसद में निर्वाचित दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। बुधवार शाम 5 बजे छोटी पार्टियों के साथ परामर्श शुरू होगा और गुरुवार रात 8:30 बजे लिकुड के साथ बैठक निर्धारित है।

इन बैठकों में राजनीतिक दल राष्ट्रपति को बताएंगे कि वे किस नेता को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश करते हैं। यदि आइजेनकोट को विपक्षी दलों के साथ अरब सांसदों का भी समर्थन मिलता है, तो उनके पक्ष में सबसे अधिक सिफारिशें आने की संभावना है।

हालांकि, सबसे अधिक समर्थन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार बनना तय हो गया है। उन्हें निर्धारित समय में संसद का विश्वास हासिल करने के लिए गठबंधन या बाहरी समर्थन का रास्ता निकालना होगा। ऐसा नहीं होने पर इजरायल को एक और चुनाव का सामना करना पड़ सकता है।

नेतन्याहू के सामने सत्ता के साथ कानूनी चुनौतियां भी

76 वर्षीय नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। लेकिन उनकी राजनीतिक मुश्किलें केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं हैं। वह भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मुकदमों का भी सामना कर रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गाजा में कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुए इजरायली सैन्य अभियान में गाजा में भारी जनहानि हुई है। 74 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत के आंकड़े ने नेतन्याहू सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और आलोचना को और बढ़ाया है।

कुल मिलाकर, इजरायल में चुनावी मुकाबला अब सरकार गठन की निर्णायक लड़ाई में बदल चुका है। नेतन्याहू के पास सबसे बड़ा संसदीय गठबंधन जरूर है, लेकिन बहुमत नहीं। दूसरी ओर आइजेनकोट के पीछे विपक्ष एकजुट दिखाई दे रहा है, लेकिन अरब दलों के समर्थन पर मतभेद उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। आने वाले दो दिन तय करेंगे कि इजरायल में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी जाएगी या नेतन्याहू एक बार फिर राजनीतिक गतिरोध का फायदा उठाकर अपनी कुर्सी बचा लेंगे।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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