TRENDING TAGS :
इजराइल में नेतन्याहू की सत्ता पर बड़ा संकट! गादी आइजनकोट को सरकार बनाने का न्योता, 67 सांसदों का मिला समर्थन
इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर बड़ा संकट! राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने गादी आइजनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया। 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद क्या इजराइल में होगा सत्ता परिवर्तन?
Israel Political Crisis: इजराइल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती देते हुए राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने विपक्षी नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट को नई सरकार बनाने का मौका देने का फैसला किया है। 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों में नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से दूर रह गया था। वहीं, आइजनकोट के पक्ष में 67 सांसदों की सिफारिश ने उन्हें सरकार गठन की दौड़ में सबसे आगे खड़ा कर दिया है। हालांकि, राष्ट्रपति के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि नेतन्याहू की विदाई हो चुकी है। असली चुनौती अब 120 सदस्यीय संसद में 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की है।
राष्ट्रपति हर्जोग ने शनिवार, 7 नवंबर की रात आइजनकोट को अपने फैसले की जानकारी दी। उन्हें रविवार, 8 नवंबर को शाम 5 बजे औपचारिक रूप से सरकार बनाने का जनादेश सौंपा जाना है। इस घटनाक्रम ने इजराइल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक शासन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
67 सांसदों का समर्थन, नेतन्याहू को सिर्फ 46 की सिफारिश
इजराइल के 27 अक्टूबर के चुनाव में किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। अंतिम नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उनके सहयोगी दलों को मिलाकर भी गठबंधन केवल 53 सीटें हासिल कर सका। दूसरी ओर, गादी आइजनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिलीं। उनके नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास कुल 48 सीटें हैं। वहीं, अरब नेतृत्व वाली दो पार्टियों ने ऐतिहासिक रूप से 19 सीटें हासिल की हैं।
राष्ट्रपति के साथ राजनीतिक दलों के परामर्श के दौरान 67 सांसदों का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों ने आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने की सिफारिश की, जबकि 46 सांसदों ने नेतन्याहू के नाम का समर्थन किया। सात सांसदों वाली एक पार्टी ने किसी भी उम्मीदवार की सिफारिश नहीं की। यही आंकड़ा आइजनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।
अरब पार्टियां बनीं किंगमेकर, सरकार बनाने की राह आसान नहीं
इस पूरे सियासी घटनाक्रम में अरब नेतृत्व वाली पार्टियां सबसे अहम भूमिका में आ गई हैं। दोनों अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। अगर ये दल आइजनकोट का समर्थन करते हैं तो उनके गठबंधन के लिए बहुमत का आंकड़ा पार करना संभव हो सकता है।
लेकिन इसमें सबसे बड़ी राजनीतिक अड़चन भी है। आइजनकोट अरब पार्टियों के साथ औपचारिक गठबंधन बनाने को लेकर सहज नहीं हैं। उनकी सहयोगी पार्टी इजराइल बेतेनु के नेता एविगडोर लिबरमैन भी अरब दलों के समर्थन से बनने वाली सरकार के विरोध में हैं।
ऐसे में आइजनकोट के सामने तीन संभावित रास्ते हैं। पहला, अरब पार्टियों के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाना। दूसरा, कुछ धार्मिक और अति-रूढ़िवादी दलों को अपने साथ लाना और तीसरा, व्यापक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की कोशिश करना। हालांकि, इनमें से किसी भी विकल्प के लिए उन्हें बड़े राजनीतिक समझौते करने पड़ सकते हैं।
नेतन्याहू ने लगाया चुनाव में धांधली का आरोप
चुनावी झटके के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी खेमे और अरब पार्टियों को निशाने पर लिया है। उन्होंने अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए और राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की वकालत की। साथ ही चेतावनी दी कि कथित तौर पर आतंकवाद समर्थक दलों के सहयोग से सरकार बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, नेतन्याहू के इन आरोपों को लेकर चुनावी अधिकारियों की तरफ से भी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया आई है। केंद्रीय चुनाव समिति के कार्यवाहक महानिदेशक ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता को व्यवस्थित रूप से प्रभावित किए जाने के दावों का कोई आधार नहीं है। इस घटनाक्रम ने नेतन्याहू के राजनीतिक हमलों को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।
सैन्य सेवा और 7 अक्टूबर के हमलों की जांच पर भी टकराव
गादी आइजनकोट के सामने केवल बहुमत जुटाने की चुनौती नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर मौजूद वैचारिक मतभेद भी बड़ी समस्या बन सकते हैं।
आइजनकोट अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने के खिलाफ हैं। इसके अलावा वह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के दौरान हुई सुरक्षा और खुफिया विफलताओं की स्वतंत्र जांच की मांग करते रहे हैं।
इन मुद्दों पर नेतन्याहू और उनके सहयोगी दलों के साथ उनका गंभीर मतभेद है। आइजनकोट ने नेतन्याहू के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना भी खारिज की है। ऐसे में इजराइल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की राह और मुश्किल होती दिखाई दे रही है।
आइजनकोट के पास सरकार बनाने के लिए कितने दिन?
राष्ट्रपति हर्जोग रविवार, 8 नवंबर को शाम 5 बजे आइजनकोट को औपचारिक रूप से सरकार गठन का जनादेश सौंपेंगे। इजराइल के बुनियादी कानून के मुताबिक, उन्हें सरकार बनाने के लिए शुरुआती 28 दिन मिलेंगे। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति अधिकतम 14 दिनों का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं।
इस तरह उनके पास कुल 42 दिनों तक का समय हो सकता है। यदि वह इस अवधि में बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं। अंततः राजनीतिक गतिरोध दूर नहीं होने की स्थिति में देश को दोबारा चुनाव का सामना भी करना पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गादी आइजनकोट अरब पार्टियों के समर्थन और अपने गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों के बीच 61 सांसदों का जादुई आंकड़ा जुटा पाएंगे? फिलहाल नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट जरूर गहरा गया है, लेकिन उनकी राजनीतिक पारी का अंत अभी तय नहीं हुआ है। इजराइल की सत्ता का अगला अध्याय अब आइजनकोट की गठबंधन बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगा।


