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ISS की उलटी गिनती शुरू...अंतरिक्ष पर राज करेगा ये 'ताकतवर देश', भारत कैसे देगा टक्कर?
ISS Space Station: 2030 में ISS का सफर खत्म होगा। इसके बाद चीन अंतरिक्ष में मजबूत स्थिति में होगा, जबकि भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है।
ISS Space Station
ISS Space Station: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का सफर अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। करीब तीन दशकों तक अंतरिक्ष में शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक रहा ISS वर्ष 2030 में अपनी आखिरी यात्रा पूरी कर पृथ्वी पर लौट आएगा। इसके साथ ही विज्ञान, तकनीक और वैश्विक साझेदारी का एक ऐतिहासिक अध्याय समाप्त हो जाएगा। नवंबर 2000 से अब तक फुटबॉल मैदान के आकार का यह स्टेशन लगातार मानव उपस्थिति के साथ पृथ्वी की परिक्रमा करता रहा है। करीब 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से घूमता ISS न सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगों का केंद्र रहा, बल्कि इसने आम लोगों को भी अंतरिक्ष से जोड़ा।
इंसानी सहयोग की सबसे बड़ी मिसाल बना ISS
NASA के साइंस एंड मिशन सिस्टम ऑफिस के पूर्व प्रबंधक जॉन होरैक ने ISS को “मानव सहयोग का कैथेड्रल” कहा है। उनके अनुसार यह स्टेशन इस बात का प्रमाण है कि अलग-अलग देश, भाषाएं और संस्कृतियां मिलकर असंभव को भी संभव बना सकती हैं। ISS की नींव शीत युद्ध के बाद रखी गई थी, जब अमेरिका और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों ने साथ काम करने का फैसला किया। आज भले ही यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक रिश्तों में तनाव हो, लेकिन ISS पर यह साझेदारी अब भी कायम है, जो इसे दुनिया के लिए एक अनोखी मिसाल बनाती है।
2030 में ISS की सुरक्षित वापसी की तैयारी
समय के साथ ISS पुराना हो चुका है और इसके कई सिस्टम अपनी उम्र पूरी कर रहे हैं। इसी वजह से NASA ने स्पेसएक्स को एक विशेष वाहन विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जो 2030 में ISS को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाएगा। इस प्रक्रिया में एक शक्तिशाली इंजन स्टेशन की गति को धीमा करेगा ताकि सुरक्षित री-एंट्री संभव हो सके। ISS को प्रशांत महासागर के निर्जन क्षेत्र पॉइंट नेमो में गिराया जाएगा। यह वही इलाका है जहां पहले भी रूस के मीर स्टेशन सहित कई अंतरिक्ष मलबे गिराए जा चुके हैं।
ISS के बाद अंतरिक्ष में किसका दबदबा?
ISS के खत्म होने के बाद पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन ही एकमात्र सक्रिय स्टेशन रह जाएगा। इससे चीन की अंतरिक्ष ताकत और प्रभाव में इजाफा तय माना जा रहा है। वहीं अमेरिका अब भविष्य के लिए निजी कंपनियों पर भरोसा कर रहा है। ब्लू ओरिजिन, एक्सिओम स्पेस जैसी कंपनियां निजी स्पेस स्टेशन विकसित करने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्पेस स्टेशन भी व्यावसायिक मॉडल पर संचालित होंगे।
भारत का बड़ा सपना: 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन
ISS के अंत को विशेषज्ञ अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं। इसी बीच भारत भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ISRO ने 2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन बनाने का लक्ष्य तय किया है। योजना के अनुसार, 2028 तक पहला मॉड्यूल BAS-1 लॉन्च किया जाएगा। यह स्टेशन ISS से छोटा होगा, जिसका वजन करीब 20–25 टन रहेगा। इसमें 2 से 4 अंतरिक्ष यात्री एक साथ रह सकेंगे और 15–20 दिन तक वैज्ञानिक शोध कर पाएंगे। यह स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।


