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Italy की दूसरी बार PM बनने तैयारी में 'सबसे ताकतवर' महिला... 2027 से पहले Meloni का ‘पावर प्लान’ रिवील्ड! इस 'रणनीति' पर पूरी दुनिया की नजर
Italy elections 2027: प्रस्ताव को लेकर इटली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि जहां एक तरफ सरकार इसे 'स्थिर और मजबूत शासन' के लिए आवश्यक बता रही है, तो वहीं दूसरी तरफ देश की 53 % जनता और विपक्षी दल इसका खुलकर विरोध जता रहे हैं।
Italy elections 2027 (PHOTO: SOCIAL MEDIA)
Italy elections 2027: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बार फिर से सत्ता में लौटने की तैयारी में पूरी तरह से जुट गई हैं। साल 2027 में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले मेलोनी सरकार देश के पूरे चुनावी सिस्टम में बड़े परिवर्तन की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव को लेकर इटली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि जहां एक तरफ सरकार इसे 'स्थिर और मजबूत शासन' के लिए आवश्यक बता रही है, तो वहीं दूसरी तरफ देश की लगभग 53 % जनता और विपक्षी दल इसका खुलकर विरोध जता रहे हैं।
इटली में संसदीय चुनाव कैसे होते हैं ?
मौजूदा वक़्त में इटली में संसदीय चुनाव एक मिश्रित प्रणाली के अंतर्गत कराए जाते हैं। संसद की कुल 400 सीटों को 3 भागों में बांटा गया है। इनमें 37 % सीटों पर ‘पास्ट द पोस्ट’ प्रणाली लागू होती है, जिसमें सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत दर्ज करता है। यह वही तरीका है, जिससे भारत में भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव होते हैं। इसके अलावा 61 % सीटें ‘प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन’ यानी आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाती हैं, जिसमें किसी पार्टी को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें मिलती हैं। शेष 2 % सीटें विदेश में रहने वाले इटली के नागरिकों (NRI) के लिए आरक्षित हैं।
मेलोनी चाहती है ये बड़ा बदवाल
अब जॉर्जिया मेलोनी इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव चाहती हैं। उनकी सरकार 37 % सीटों पर लागू डायरेक्ट चुनाव प्रणाली को खत्म कर, सभी 100 % सीटों पर प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम लागू करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इस परिवर्तन से बड़ी और संगठित पार्टियों को बड़ा लाभ हो सकता है, विशेषकर तब जब कोई पार्टी पूरे देश में एकसमान वोट शेयर हासिल कर ले।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मेलोनी की नजर दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर टिकी हुई है और इसी लक्ष्य के अंतर्गत यह कवायद की जा रही है। गौरतलब है कि साल 2022 के चुनाव में मेलोनी की पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आयी थीं, लेकिन उन्हें देश अपनी सरकार गठबंधन के सहारे ही बनानी पड़ी थी। इस बार मेलोनी का पूरा प्रयास है कि उनकी पार्टी या गठबंधन अपने दम पर बहुमत हासिल करे और किसी सहयोगी पर निर्भर न रहना पड़े।
इटली में सरकार बनाने का नियम
इटली की संसद में सरकार बनाने के लिए लगभग 201 सीटों की आवश्यकता होती है। मेलोनी चाहती हैं कि बदला हुआ चुनावी सिस्टम उन्हें इस लक्ष्य के और करीब ले जाए। यही सबसे बड़ा कारण है कि विपक्ष इसे 'लोकतांत्रिक संतुलन से छेड़छाड़' बता रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार चुनावी नियमों को अपने फायदे के अनुसार ढालना चाहती है, ताकि सत्ता में वापसी सरल हो सके।
बता दे, जनता के एक बड़े हिस्से में भी इस प्रस्ताव को लेकर असंतोष है। सर्वे के अनुसार, तकरीबन 53 % लोग चुनावी सिस्टम में इस तरह के परिवर्तन के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि इससे स्थानीय प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और छोटे दलों की आवाज संसद में दब सकती है।
मेलोनी का अंतरराष्ट्रीय स्तर अपनी मजबूती
लेकिन, इन सबके बीच सबसे दिलचस्प बात यह भी है कि मेलोनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके करीबी रिश्तों की चर्चा भी इसी संदर्भ में हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी कुछ महीनों में जैसे-जैसे इस प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से एलान होगा, इटली की राजनीति और अधिक गर्माने वाली है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जनता के विरोध और विपक्ष के दबाव के बावजूद मेलोनी सरकार इस चुनावी सुधार को लागू कर पाती है या नहीं, और क्या यह परिवर्तन उन्हें दूसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा।


