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रमजान के पहले ही दिन पाकिस्तान में मातम! सहरी के वक्त हुआ जोरदार धमाका, मासूमों की चीखों से दहला कराची
Karachi Blast News: पाकिस्तान के कराची में रमजान के पहले ही दिन मातम! सहरी के वक्त ओल्ड सोल्जर बाजार में भीषण धमाका, 9 बच्चों समेत 16 की मौत। क्या गैस रिसाव बना मासूमों का काल?
Karachi Blast News: आज जब पूरी दुनिया में रमजान के पाक महीने का आगाज हो रहा था और लोग इबादत की तैयारी कर रहे थे, तभी पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर आई जिसने सबका दिल दहला दिया. पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में गुरुवार की सुबह खुशियों की जगह चीख-पुकार में बदल गई. जब लोग सहरी के लिए जाग रहे थे और घरों में चूल्हे जल रहे थे, तभी एक ऐसा धमाका हुआ जिसने हंसते-खेलते परिवारों को पल भर में उजाड़ दिया. यह हादसा इतना भयानक था कि इसकी गूँज दूर-दूर तक सुनाई दी और देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे के ढेर में तब्दील हो गया.
सहरी के वक्त काल बनकर आया धमाका
कराची के ओल्ड सोल्जर बाजार इलाके में गुरुवार की सुबह करीब 4:30 बजे सन्नाटा पसरा हुआ था. लोग रमजान के पहले रोजे की सहरी की तैयारी में जुटे थे. तभी अचानक एक रिहायशी इमारत की पहली मंजिल पर भीषण धमाका हुआ. धमाका इतना शक्तिशाली था कि इमारत का एक बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह ढह गया. आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हर तरफ धूल का गुबार और मलबे के नीचे दबे लोगों की आवाजें आने लगीं. पुलिस और प्रशासन का मानना है कि यह धमाका संदिग्ध गैस रिसाव की वजह से हुआ है, जिसने एक हंसते-खेलते रिहायशी इलाके को कब्रिस्तान में बदल दिया.
मासूम बच्चों पर टूटा मौत का कहर
इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि इसमें मरने वालों में बड़ी संख्या मासूम बच्चों की है. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, इस भीषण विस्फोट में कम से कम 16 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 2 साल से लेकर 17 साल तक के 9 मासूम बच्चे शामिल हैं. 14 से ज्यादा लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं, जिनमें से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. फायर सर्विस की टीमें अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए जीवित बचे लोगों या शवों की तलाश कर रही हैं. रमजान के पहले दिन बच्चों की मौत की खबर ने पूरे कराची में शोक की लहर बढ़ा दी है.
गैस संकट और लापरवाही की बड़ी कीमत
कराची जैसे बड़े शहर में लोग लंबे समय से गैस की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं. मजबूरी में कम आय वाले इलाकों के लोग घरों में असुरक्षित एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं, जो अक्सर 'टाइम बम' साबित होते हैं. पुलिस की शुरुआती जांच में भी यही सामने आया है कि गैस रिसाव की वजह से ही यह भयावह हादसा हुआ है. जर्जर इमारत और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने इस त्रासदी को और बड़ा बना दिया है. लोग अब प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बार-बार होने वाले इन हादसों से सबक क्यों नहीं लिया जा रहा है.
क्या फिर लौट आया पिछले महीने का खौफ?
यह कोई पहली बार नहीं है जब कराची की सड़कों पर मासूमों का खून बहा हो. अभी पिछले महीने ही सदर इलाके के गुल शॉपिंग प्लाजा में लगी भीषण आग को लोग भूले भी नहीं थे, जिसमें 79 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. उस जख्म के भरने से पहले ही इस गैस धमाके ने लोगों को फिर से पुराने खौफ की याद दिला दी है. पाकिस्तान के इन रिहायशी इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम राम भरोसे हैं, और हर बार गरीब जनता ही इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाती है. फिलहाल पूरा इलाका सील कर दिया गया है और अस्पताल में घायलों के परिजन अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं.


