घुटने टेक रही खालिस्तानी मूवमेंट! कनाडा-पंजाब-पाकिस्तान में रफ्तार पर लगा ब्रेक, अब क्या करेगा पन्नू

कनाडा में खालिस्तान समर्थक आंदोलन को कथित तौर पर सीमित जनसमर्थन, कानूनी चुनौतियों और संगठित अपराध से जुड़े आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

Sachin Singh
Published on: 20 Oct 2026 10:18 PM IST
घुटने टेक रही खालिस्तानी मूवमेंट! कनाडा-पंजाब-पाकिस्तान में रफ्तार पर लगा ब्रेक, अब क्या करेगा पन्नू
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Khalistan Movement: कनाडा में खालिस्तान समर्थक आंदोलन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अलग खालिस्तान की मांग करने वाले समूहों को कानूनी चुनौतियों, संगठित अपराध से कथित संबंधों और सिख समुदाय के भीतर सीमित समर्थन जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

पहले जहां इन समूहों की रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बात सामने आती थी, वहीं अब उनके जनसमर्थन में कमी आने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, आंदोलन का वास्तविक समर्थन कितना है, इसे लेकर अलग-अलग दावे हैं और इसके लिए कोई स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं है।

कनाडा में क्यों कमजोर पड़ रहा है आंदोलन?

कनाडा में खालिस्तान समर्थक आंदोलन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक आम सिख समुदाय का रुख बताया जा रहा है। ब्रिटिश कोलंबिया के पूर्व मुख्यमंत्री उज्जल दोसांझ समेत कुछ सामुदायिक नेताओं का दावा है कि अलग खालिस्तान के समर्थन में सक्रिय लोगों की संख्या कनाडा के सिख समुदाय में 5 प्रतिशत से भी कम रह गई है। उनके मुताबिक, समुदाय का बड़ा हिस्सा इस आंदोलन से दूरी बनाए हुए है।

कनाडा में रहने वाले कई सिख परिवार कारोबार, ट्रांसपोर्ट और दूसरे क्षेत्रों में काम करते हैं। आंदोलन से जुड़े विवादों और चरमपंथ के आरोपों के कारण उन्हें सामाजिक स्तर पर परेशानी होने की चिंता भी जताई जाती रही है। हालांकि, पूरे सिख समुदाय की राय को एक जैसा नहीं माना जा सकता।

संगठित अपराध से संबंधों के आरोप

खालिस्तान समर्थक आंदोलन के कुछ समूहों पर संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने के आरोप भी लगाए गए हैं। कनाडा में पंजाबी मूल के कुछ आपराधिक गिरोहों के खिलाफ हत्या, फेंटेनिल और कोकीन की तस्करी जैसे मामलों में जांच हुई है।

खुफिया सूत्रों के हवाले से किए गए दावों में कहा गया है कि अवैध गतिविधियों से मिलने वाले पैसे का कुछ हिस्सा अलगाववादी नेटवर्क को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन आरोपों के कारण आंदोलन से जुड़े समूहों की गतिविधियां जांच के दायरे में आई हैं। हालांकि, किसी खास संगठन या व्यक्ति के खिलाफ ऐसे आरोपों को साबित तथ्य मानने से पहले संबंधित जांच और कानूनी निष्कर्षों को देखना जरूरी है।

कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने कनाडा में मौजूद खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। वहीं, बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) जैसे संगठनों का नाम आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संघीय कार्रवाई में भी सामने आया है।

कानूनी मोर्चे पर भी चुनौतियां

कनाडा में खालिस्तान से जुड़े कुछ लोगों के शरण मांगने के आवेदनों को लेकर भी विवाद सामने आए हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड और संघीय अदालतों ने कई मामलों में शरण के दावों को स्वीकार नहीं किया। कुछ मामलों में दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए।

इन फैसलों को आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों के लिए कानूनी झटके के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, शरण के हर आवेदन का फैसला उसके अपने तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होता है। इसलिए कुछ मामलों में आवेदन खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि सभी खालिस्तान समर्थकों के दावे एक जैसे हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी इन समूहों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कनाडा में अलग खालिस्तान की मांग को लेकर आयोजित कुछ कार्यक्रमों और कथित जनमत-संग्रह जैसी गतिविधियों की आलोचना हुई है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों को आंदोलन के वास्तविक जनसमर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

पाकिस्तान की भूमिका को लेकर क्या दावे हैं?

खालिस्तान समर्थक आंदोलन को लेकर पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में रही है। भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े दावों के मुताबिक, पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI प्रतिबंधित संगठनों को आर्थिक मदद, हथियार और दूसरी तरह की सहायता देती रही है। इन संगठनों में बब्बर खालसा इंटरनेशनल, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन और खालिस्तान कमांडो फोर्स के नाम शामिल बताए जाते हैं।

खुफिया ब्रीफिंग में यह भी दावा किया गया है कि खालिस्तान समर्थक कुछ लोगों को पहले पाकिस्तान में प्रशिक्षण मिला और बाद में उन्होंने कनाडा में नेटवर्क बनाने या धन जुटाने का काम किया। हरदीप सिंह निज्जर का नाम भी ऐसे दावों के संदर्भ में सामने आया है। हालांकि, इन आरोपों और उनके पीछे के सबूतों का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है। पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

अब क्या करेगा पन्नू?

गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके संगठन सिख्स फॉर जस्टिस की गतिविधियां खालिस्तान समर्थक आंदोलन की चर्चा में प्रमुखता से आती रही हैं। कनाडा में जनसमर्थन को लेकर उठते सवाल, कानूनी चुनौतियां और चरमपंथ से जुड़े आरोप इस आंदोलन के सामने मुश्किलें खड़ी करते हैं। दूसरी ओर, विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों और प्रचार गतिविधियों के जरिए समर्थक अपनी मांग को उठाते रहे हैं।

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Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

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